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शव यात्रा में भारी भीड़, कोविड निर्देश तार तार

जौनपुर। कोरोना कॉविड को लेकर जहां पूरा देश जूझ रहा है, हर दिन लोग सावधानियां बरतने के संदेश दे रहे हैं। वहीं मंगलवार को रामघाट स्थित  श्मशान घाट पर एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसे देखकर हर कोई अचंभित था। वजह यह थी कि एक रिटायर्ड लेखपाल के अंतिम संस्कार में पूरे मोहल्ले के लोग उमड़ पड़े। ज्यादातर लोग मास्क नही लगाए, और ना किसी ने कोरोना कोविड के निर्देशों का पालन किया।  हद तो तब हो गया जब ढोल मजीरा और बाजे के साथ उनके शव यात्रा निकाली। मोहल्ले के लोग बताते हैं कि वह भी कोरोना संक्रमण के ही चपेट में ही थे।लेखपाल लालता प्रसाद हरिजन जनपद  के लाइन बाजार थाना क्षेत्र के पचहटिया गांव निवासी थे। रिटायर्ड होने के बाद पिछले कुछ दिनों से वह अस्वस्थ चल रहे थे। मंगलवार को उनका अंतिम संस्कार करने के लिए  लोग उनकी शव यात्रा निकालते हुए रामघाट   स्थित श्मशान घाट पर पहुंचे तो  साथ में मौजूद भारी भीड़  का यह दृश्य देख कर लोगोँ का मन भयभीत हो गया । आखिरकार कुछ लोगों ने कह दिया कि अभी भी इस संक्रमण को कुछ ना समझ लोग नही समझ पा रहे । ज्ञात हो कि कही मिट्टी उठाने के लिए चार कन्धे नही मिल रहे हैं, कहीं भारी भीड़। इससे साबित होता है कि  यह  ना समझ हैं अथवा जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रहे है।  मड़ियाहूं क्षेत्र निवासी एक दयाशंकर सिंह भी थे, जिनकी पत्नी के निधन पर गांव का कोई भी व्यक्ति कंधा देने नहीं आया। आखिर वह बुजुर्ग अपनी पत्नी की लाश को साइकिल पर लेकर पूरे गांव में घूमता रहा तब पुलिस ही मददगार बनी थी।

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जौनपुर। कोरोना कॉविड को लेकर जहां पूरा देश जूझ रहा है, हर दिन लोग सावधानियां बरतने के संदेश दे रहे हैं। वहीं मंगलवार को रामघाट स्थित  श्मशान घाट पर एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसे देखकर हर कोई अचंभित था। वजह यह थी कि एक रिटायर्ड लेखपाल के अंतिम संस्कार में पूरे मोहल्ले के लोग उमड़ पड़े। ज्यादातर लोग मास्क नही लगाए, और ना किसी ने कोरोना कोविड के निर्देशों का पालन किया।  हद तो तब हो गया जब ढोल मजीरा और बाजे के साथ उनके शव यात्रा निकाली। मोहल्ले के लोग बताते हैं कि वह भी कोरोना संक्रमण के ही चपेट में ही थे।लेखपाल लालता प्रसाद हरिजन जनपद  के लाइन बाजार थाना क्षेत्र के पचहटिया गांव निवासी थे। रिटायर्ड होने के बाद पिछले कुछ दिनों से वह अस्वस्थ चल रहे थे। मंगलवार को उनका अंतिम संस्कार करने के लिए  लोग उनकी शव यात्रा निकालते हुए रामघाट   स्थित श्मशान घाट पर पहुंचे तो  साथ में मौजूद भारी भीड़  का यह दृश्य देख कर लोगोँ का मन भयभीत हो गया । आखिरकार कुछ लोगों ने कह दिया कि अभी भी इस संक्रमण को कुछ ना समझ लोग नही समझ पा रहे । ज्ञात हो कि कही मिट्टी उठाने के लिए चार कन्धे नही मिल रहे हैं, कहीं भारी भीड़। इससे साबित होता है कि  यह  ना समझ हैं अथवा जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रहे है।  मड़ियाहूं क्षेत्र निवासी एक दयाशंकर सिंह भी थे, जिनकी पत्नी के निधन पर गांव का कोई भी व्यक्ति कंधा देने नहीं आया। आखिर वह बुजुर्ग अपनी पत्नी की लाश को साइकिल पर लेकर पूरे गांव में घूमता रहा तब पुलिस ही मददगार बनी थी।

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