मोक्षदा एकादशी की शुभकामनाएँ। 1 दिसंबर 2025, सोमवार को मोक्षदा एकादशी का पावन पर्व मनाया जाएगा। धर्माचार्य ओमप्रकाश पांडे (अनिरुद्ध रामानुज दास) बताते हैं कि मोक्षदा एकादशी का महात्म्य पढ़ने और सुनने मात्र से वाजपेय यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है।
भगवान श्रीकृष्ण द्वारा वर्णित एकादशी का महत्व
धर्मराज युधिष्ठिर को भगवान श्रीकृष्ण स्वयं बताते हैं—मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोक्षदा एकादशी कहा जाता है। इस व्रत के श्रवण मात्र से वाजपेय यज्ञ का फल प्राप्त होता है। इस दिन तुलसी की मंजरी, धूप, दीप, नैवेद्य से भगवान दामोदर का पूजन किया जाए तो बड़े से बड़े पाप भी नष्ट होते हैं।
रात को भगवन्नाम संकीर्तन, भजन, स्तुति और जागरण करना अत्यंत शुभ माना गया है। जो व्यक्ति इस व्रत का पुण्य अपने पितरों को अर्पित करता है—उनका उद्धार निश्चित होता है।
वैखानस राजा की कथा — पितरों का उद्धार
पूर्वकाल में चंपक नगर में वैखानस नाम के राजा रहते थे। एक रात्रि उन्होंने स्वप्न में अपने पिता को नरक में कष्ट भोगते देखा। अत्यंत चिंतित होकर उन्होंने ब्राह्मणों से उपाय पूछा, जिन्होंने पर्वत मुनि से मिलने की सलाह दी।
राजा पर्वत मुनि के आश्रम पहुँचे और नरक में पड़े पितरों के उद्धार का उपाय पूछा। मुनि बोले—
“तुम मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी (मोक्षदा एकादशी) का व्रत करो और उसका पुण्य अपने पितरों को अर्पित कर दो। इससे उनका उद्धार हो जाएगा।”
राजा ने व्रत का पालन कर सारा पुण्य अपने पितरों को समर्पित कर दिया। उसी क्षण आकाश से पुष्पवर्षा हुई और राजा के पिता स्वर्ग के लिए प्रस्थान कर गए।
मोक्ष प्राप्ति का द्वार है यह एकादशी
जो व्यक्ति मोक्षदा एकादशी का व्रत श्रद्धापूर्वक करता है, उसके पाप नष्ट होते हैं। मृत्यु के उपरांत वह मोक्ष को प्राप्त करता है। यह एकादशी मनुष्य जीवन के लिए चिंतामणि समान—सभी कामनाओं को पूर्ण करने वाली मानी गई है।
इसकी कथा का पाठ और श्रवण वाजपेय यज्ञ के समान पुण्य प्रदान करता है।
वक्ता:
धर्माचार्य ओमप्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुज दास
रामानुज आश्रम, संत रामानुज मार्ग, प्रतापगढ़ (उत्तर प्रदेश)
कृपा पात्र:
श्री श्री 1008 स्वामी श्री इंदिरा रमणाचार्य
पीठाधीश्वर, श्री जियर स्वामी मठ, जगन्नाथ पुरी
श्री नैमिषनाथ भगवान, रामानुज कोट, अष्टम भू वैकुंठ, नैमिषारण्य
नोट: पारणा समय — प्रातः 8:42 तक
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मोक्षदा एकादशी 2025: व्रत करने व कथा सुनने से वाजपेय यज्ञ के समान फल मिलता है। पितरों का उद्धार होता है और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग खुलता है।
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मोक्षदा एकादशी मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष में मनाई जाती है। इस व्रत के पढ़ने-सुनने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है और पितरों को मोक्ष।
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