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कोविड के कारण भयहरणनाथ धाम में नागपंचमी पर नही होगा घुघुरी लोक उत्सव

सांकेतिक पूजन होगा, घुघुरी का चढ़ेगा प्रसाद
भयहरण नाथ धाम प्रतापगढ़ I प्रसिद्ध पांडव कालीन भयहरण नाथ धाम प्रतापगढ़ में इस वर्ष कोरोना के चलते नागपंचमी पर होने वाला घुघुरी लोक उत्सव आयोजित नही होगा। कोविड 19 के नियमो के अनुपालन में इस परम्परागत लोक उत्सव का आयोजन प्रबन्ध समिति ने स्थगित कर दिया है।  धाम के महासचिव समाज शेखर के संयोजन में गत 2010 से नागपंचमी को घुघुरी लोक उत्सव आयोजित होता रहा है। जो धीरे धीरे नवीन परम्परा का स्वरूप ग्रहण कर चुकी है। इस अवसर पर जहां क्षेत्रीय बच्चों और युवाओं को मंच दिया जाता रहा है वहीं नामी कलाकारों के माध्यम से उत्सव को बड़ा स्वरूप मिलता रहा है। आल्हा, लोक गीत, कजरी आदि का गायन को भी बढ़ावा दिया जाता रहा है। साथ ही 2 किमी की तेज दौड़ प्रतियोगिता में प्रयागराज व प्रतापगढ़ के समीपवर्ती 7 विकास खंडों के धावक भाग लेते रहे है।  महासचिव समाज शेखर ने बताया कि कोविड के नियमो को प्रशासन व स्थानीय समाज से राय लेकर प्रबन्ध समिति ने प्राथमिकता पर लेते हुए व्यापक जनहित में उक्त उत्सव को स्थगित कर दिया है। साथ ही प्राचीन परंपरा के दृष्टिगत भगवान भोलेनाथ को सांकेतिक रूप से पूजन किया जाएगा और घुघुरी प्रसाद रूप में चढ़ाया जाएगा। इस अवसर पर किसी भी प्रकार का कोई आयोजन नही किया जाएगा।

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सांकेतिक पूजन होगा, घुघुरी का चढ़ेगा प्रसाद
भयहरण नाथ धाम प्रतापगढ़ I प्रसिद्ध पांडव कालीन भयहरण नाथ धाम प्रतापगढ़ में इस वर्ष कोरोना के चलते नागपंचमी पर होने वाला घुघुरी लोक उत्सव आयोजित नही होगा। कोविड 19 के नियमो के अनुपालन में इस परम्परागत लोक उत्सव का आयोजन प्रबन्ध समिति ने स्थगित कर दिया है।  धाम के महासचिव समाज शेखर के संयोजन में गत 2010 से नागपंचमी को घुघुरी लोक उत्सव आयोजित होता रहा है। जो धीरे धीरे नवीन परम्परा का स्वरूप ग्रहण कर चुकी है। इस अवसर पर जहां क्षेत्रीय बच्चों और युवाओं को मंच दिया जाता रहा है वहीं नामी कलाकारों के माध्यम से उत्सव को बड़ा स्वरूप मिलता रहा है। आल्हा, लोक गीत, कजरी आदि का गायन को भी बढ़ावा दिया जाता रहा है। साथ ही 2 किमी की तेज दौड़ प्रतियोगिता में प्रयागराज व प्रतापगढ़ के समीपवर्ती 7 विकास खंडों के धावक भाग लेते रहे है।  महासचिव समाज शेखर ने बताया कि कोविड के नियमो को प्रशासन व स्थानीय समाज से राय लेकर प्रबन्ध समिति ने प्राथमिकता पर लेते हुए व्यापक जनहित में उक्त उत्सव को स्थगित कर दिया है। साथ ही प्राचीन परंपरा के दृष्टिगत भगवान भोलेनाथ को सांकेतिक रूप से पूजन किया जाएगा और घुघुरी प्रसाद रूप में चढ़ाया जाएगा। इस अवसर पर किसी भी प्रकार का कोई आयोजन नही किया जाएगा।

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