दूध, लावा, फूल व माला के साथ होगी पूजा
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प्रतापगढ़ (ब्यूरो)। भगवान शिव एवं शेषनाग के उपासना का केन्द्र मानी जानी वाली नागपंचमी का पर्व कल शुक्रवार को मनाया जाएगा। महिलाएं विधि विधान के साथ दूध, लावा, फूल, माला आदि से नागदेवता का पूजन करके परिवार के खुशहाली की कामना करेगी। इसके लिए शिवालयो में भी साफ सफाई व तैयारी की गई है। शिवालयो एवं मंदिरो में भगवान शिव के रूद्राभिषेक के साथ ही शेषनाग की विशेष पूजा की जाएगी। प्रकृति के उत्सव के पूरक मानी जाने वाली नागपंचमी पर जहां एक ओर झलो, मेहंदी, उपवास और मेलो के आयोजनो की परम्परागत खुशबू का खुमार रहेगा। वही दंगल आदि का आयोजन भी सम्पन्न किया जाएगा। बताते चले कि नागपंचमी पर सुबह महिलाएं भगवान सूर्य को अध्र्य देकर स्नान ध्यान करती है। इसके बाद पीपल के पेड़ के पास कटोरे में दूध, लावा, पुष्प माला चढ़ाकर परिवार की खुशहाली के लिए नागदेवता से आशीर्वाद मांगती है। पुराणो के अनुसार ऐसी मान्यता है कि पृथ्वी शेषनाग के फन पर टिकी हुई है। इस कारण ही ब्रम्हाण्ड में दिन व रात निहित है। वही दूसरी ओर यह भी मान्यता है कि नागदेव घर परिवार की रक्षा के लिए अप्रत्यक्ष रूप से मकान में निवास करते है। यही कारण है कि मकान बनने के बाद गृहप्रवेश के लिए िवधि विधान के साथ पूजन में इनका भी स्थान निहित है। इसीलिए जिस प्रकार समय समय पर पड़ने वाले हिन्दू संस्कृति में मान्यता पूर्ण त्योहारो में भिन्न भिन्न देवी देवताओ को पूजते है। ठीक उसी प्रकार से नागपंचमी के इस पावन त्योहार पर महिलाएं परिवार की खुशहाली एवं सलामती के लिए नागदेवता का पूजन करती है। बेल्हा जनपद में भी इस त्योहार को लोग बड़ी धूमधाम के साथ मनाते है। इस दिन घरो में घुघुरी का प्रयोग खूब होता है। यह नागदेवता के चढ़ाने में भी प्रयोग होता है। वही कुछ लोग इसे वेसे ही ग्रहण करते है। शाम को महिलाएं व कुंवारी लड़कियां हाथो से बनी गुड़िया लेकर नदी व तालाब के पास जाती है। वहां पर बच्चे इस गुडिया को डण्डे आदि से पीटते है। जो कि कुरीतियो का प्रतीक मानी जाती है। नागपंचमी का त्योहार मनाने के पीछे हमारी भारतीय संस्कृति में कई कहानियां है। जो इस त्योहार को मनाने का उद्देश्य बताती है।



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