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सत्यम ओझा ही रहेंगे शिवगढ़ के ब्लॉक प्रमुख

बैठक में कोरम पूरा, 38 क्षेत्र पंचायत सदस्यों के समर्थन से जीता विश्वास मत

पूर्व विधायक धीरज ओझा की कूटनीति के सामने सभी विरोधी चारों खाने चित

प्रतापगढ़। शिवगढ़ ब्लॉक में लंबे समय से चल रही खींचतान का आज अंत हो गया। सदस्यों की जोर आजमाइश में बाजी ब्लॉक प्रमुख सत्यम ओझा के ही हाथ लगी। पूर्व विधायक धीरज ओझा अपनी सूझबूझ और कूटनीति से भतीजे की कुर्सी पर मंडरा रहे खतरे को टालने में सफल रहे। 38 बीडीसी सदस्यों ने सत्यम ओझा के पक्ष में खड़े होकर विरोधियों के मंसूबों पर पानी फेर दिया।
शिवगढ़ ब्लॉक में प्रमुख की कुर्सी को लेकर समय से खींचतान चल रही थी। वहां पूर्व विधायक धीरज ओझा के भतीजे सत्यम ओझा प्रमुख चुने गए थे। उनको हटाने के लिए धीरज ओझा के विरोधी और पूर्व प्रमुख विनोद दुबे लंबे समय से लगे थे। इसको लेकर कई बार दोनों पक्षों में झड़प भी हुई। मगर कोरम के अभाव में कई बार बैठक स्थगित हो गई। शुक्रवार 18 अगस्त को फिर बैठक की तिथि निर्धारित थी। दोनों पक्ष एक दूसरे को पराजित करने के लिए दिन रात एक कर दिए थे। सपा से जुड़े पूर्व प्रमुख विनोद दुबे जहां ज्यादा से ज्यादा बीडीसी सदस्यों को अपने पाले में कर सत्यम ओझा को कुर्सी से उतारने के प्रयास में लगे थे वहीं सत्यम ओझा के समक्ष कुर्सी बचाना सबसे बड़ी चुनौती थी। विनोद दुबे को जहां विधायक डॉ. आर के वर्मा समेत पूर्व विधायक धीरज ओझा के पूरे विरोधियों का समर्थन प्राप्त था वहीं सत्यम ओझा की ओर से धीरज ओझा ने अकेले कमान संभाल रखी थी। जिला प्रशासन ने शुक्रवार को हुई बैठक के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर रखे थे। ब्लॉक परिसर से लेकर बाहर तक भरी संख्या में पुलिस बल तैनात थे। तनाव के बीच बैठक शुरू हुई। धीरे धीरे बैठक कक्ष में 38 बीडीसी सदस्य पहुंच गए। इससे न सिर्फ कोरम पूरा हुआ बल्कि सभी ने सत्यम ओझा का समर्थन कर यह भी संदेश दे दिया कि प्रमुख की कुर्सी पर वह भविष्य में भी बने रहेंगे। कोरम पूरा होने की घोषणा होते ही सत्यम ओझा के पक्ष में खुशी की लहर दौड़ गई जबकि विरोधी खेमे के लोग चुपचाप वहां से खिसक गए। लोगों ने विजय घोष करते हुए पूर्व विधायक धीरज ओझा और प्रमुख सत्यम ओझा को फूल मालाओं से लाद दिया।

बैठक में कोरम पूरा, 38 क्षेत्र पंचायत सदस्यों के समर्थन से जीता विश्वास मत

पूर्व विधायक धीरज ओझा की कूटनीति के सामने सभी विरोधी चारों खाने चित

प्रतापगढ़। शिवगढ़ ब्लॉक में लंबे समय से चल रही खींचतान का आज अंत हो गया। सदस्यों की जोर आजमाइश में बाजी ब्लॉक प्रमुख सत्यम ओझा के ही हाथ लगी। पूर्व विधायक धीरज ओझा अपनी सूझबूझ और कूटनीति से भतीजे की कुर्सी पर मंडरा रहे खतरे को टालने में सफल रहे। 38 बीडीसी सदस्यों ने सत्यम ओझा के पक्ष में खड़े होकर विरोधियों के मंसूबों पर पानी फेर दिया।
शिवगढ़ ब्लॉक में प्रमुख की कुर्सी को लेकर समय से खींचतान चल रही थी। वहां पूर्व विधायक धीरज ओझा के भतीजे सत्यम ओझा प्रमुख चुने गए थे। उनको हटाने के लिए धीरज ओझा के विरोधी और पूर्व प्रमुख विनोद दुबे लंबे समय से लगे थे। इसको लेकर कई बार दोनों पक्षों में झड़प भी हुई। मगर कोरम के अभाव में कई बार बैठक स्थगित हो गई। शुक्रवार 18 अगस्त को फिर बैठक की तिथि निर्धारित थी। दोनों पक्ष एक दूसरे को पराजित करने के लिए दिन रात एक कर दिए थे। सपा से जुड़े पूर्व प्रमुख विनोद दुबे जहां ज्यादा से ज्यादा बीडीसी सदस्यों को अपने पाले में कर सत्यम ओझा को कुर्सी से उतारने के प्रयास में लगे थे वहीं सत्यम ओझा के समक्ष कुर्सी बचाना सबसे बड़ी चुनौती थी। विनोद दुबे को जहां विधायक डॉ. आर के वर्मा समेत पूर्व विधायक धीरज ओझा के पूरे विरोधियों का समर्थन प्राप्त था वहीं सत्यम ओझा की ओर से धीरज ओझा ने अकेले कमान संभाल रखी थी। जिला प्रशासन ने शुक्रवार को हुई बैठक के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर रखे थे। ब्लॉक परिसर से लेकर बाहर तक भरी संख्या में पुलिस बल तैनात थे। तनाव के बीच बैठक शुरू हुई। धीरे धीरे बैठक कक्ष में 38 बीडीसी सदस्य पहुंच गए। इससे न सिर्फ कोरम पूरा हुआ बल्कि सभी ने सत्यम ओझा का समर्थन कर यह भी संदेश दे दिया कि प्रमुख की कुर्सी पर वह भविष्य में भी बने रहेंगे। कोरम पूरा होने की घोषणा होते ही सत्यम ओझा के पक्ष में खुशी की लहर दौड़ गई जबकि विरोधी खेमे के लोग चुपचाप वहां से खिसक गए। लोगों ने विजय घोष करते हुए पूर्व विधायक धीरज ओझा और प्रमुख सत्यम ओझा को फूल मालाओं से लाद दिया।

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