प्रतापगढ़ (ब्यूरो)। शनिवार के दिन आम तौर पर शनिदेव की ही पूजा करने की परंपरा है। वही अमल में यह दिन भगवान शिव का भी माना जाता है। ऐसे में सावन में शिवजी की पूजा शनिवार को करना फलदायी माना जाता है। ऐसा इसलिए क्योकि शनिदेव भगवान शिव के भक्त है। ब्रम्हनंद पुराण में इनकी पूजा का स्त्रोत दिया गया है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार नौ ग्रहो में शनिदेव भी एक है। उन्हे सबसे मजबूत और कड़क शिक्षक माना जाता है। जो भक्तो को धैर्य, क्षमता, उत्साह और परिश्रम जैसे गुण देते है। साथ ही भक्तो को उनके कर्मो का दण्ड भी देते है। असल में शनिदेव और भगवान शिव में कई समानताएं भी है। पं. सतीश शुक्ला का कहना है कि दोनो देवो का उग्र रूप तब सामने आता है। जब भक्तो को दण्ड देना हो। इससे अलग यह देव हमेशा सौम्यता का रूप धारण किए रहते है। शनिदेव तो हर राशि में भ्रमण करते है। साढ़े साती और ढैय्या के माध्यम से भक्तो को कष्ट देते है। परन्तु जो भक्त इनकी परीक्षा में सफल हो जाते है उन्हे शनिदेव की कृपा भी प्राप्त होती है।
प्रतापगढ़ (ब्यूरो)। शनिवार के दिन आम तौर पर शनिदेव की ही पूजा करने की परंपरा है। वही अमल में यह दिन भगवान शिव का भी माना जाता है। ऐसे में सावन में शिवजी की पूजा शनिवार को करना फलदायी माना जाता है। ऐसा इसलिए क्योकि शनिदेव भगवान शिव के भक्त है। ब्रम्हनंद पुराण में इनकी पूजा का स्त्रोत दिया गया है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार नौ ग्रहो में शनिदेव भी एक है। उन्हे सबसे मजबूत और कड़क शिक्षक माना जाता है। जो भक्तो को धैर्य, क्षमता, उत्साह और परिश्रम जैसे गुण देते है। साथ ही भक्तो को उनके कर्मो का दण्ड भी देते है। असल में शनिदेव और भगवान शिव में कई समानताएं भी है। पं. सतीश शुक्ला का कहना है कि दोनो देवो का उग्र रूप तब सामने आता है। जब भक्तो को दण्ड देना हो। इससे अलग यह देव हमेशा सौम्यता का रूप धारण किए रहते है। शनिदेव तो हर राशि में भ्रमण करते है। साढ़े साती और ढैय्या के माध्यम से भक्तो को कष्ट देते है। परन्तु जो भक्त इनकी परीक्षा में सफल हो जाते है उन्हे शनिदेव की कृपा भी प्राप्त होती है।



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