बाजारो में सजी राखी की दुकानो पर उमड़ी भीड़
प्रतापगढ़ (ब्यूरो)। भाई बहन का पवित्र पर्व रक्षाबंधन परसो रविवार को है। बहने अपने भाई के घर जाने की तैयारी में जुटी है। शहर, कस्बो एवं गांवो की बाजारो में राखी की दुकाने सजी हुई है। वहां पर दिन भर खरीददारो की भीड़ दिखाई पड़ी। इससे बाजारो में पर्व को लेकर चहल पहल बढ़ गई है।
सावन माह की पूर्णिमा को भाई बहन का महापर्व रक्षा बंधन का त्योहार मनाया जाता है। बहने अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनके दीर्घायु होने की कामना करती है। साथ ही अपने भाई से रक्षा का वचन भी मांगती है। भाई बहन के इस पवित्र त्योहार का जिक्र इतिहास में भी आता है। राजस्थान के उदयपुर राज्य की रानी कर्मवती के ऊपर एक राजा ने आक्रमण कर दिया। जब वह घोर संकट में घिर गई तो उन्होने अपने दूत से रक्षा सूत्र मुगल शासक हुमायूं के पास भेजकर उनसे मदद मांगी थी। इस्लाम धर्म का अनुयायी होते हुए भी राजा हुमायूं ने रक्षा बंधन भेज देने मात्र से कर्मवती को अपनी बहन मानकर भाई का फर्ज निभाते हुए युद्ध भूमि में पहुंच गया। परन्तु तब तक बहुत देर हो चुकी थी। रानी अपने पराजय व शत्रु के हाथ में पड़ने के पहले सती हो चुकी थी। रानी कर्मवती की मदद न कर पाने का पश्चाताप हुमायूं को जीवन के अंतिम समय तक रहा। इसी कारण आज व्यस्त दिनचर्या के बावजूद बहने अपना अमूल्य समय निकालकर रक्षा सूत्र बांधने अपने भाई के पास अवश्य पहंुचती है। जो नहीं पहुंच पाती उनके पास भाई स्वयं पहुंचने का प्रयास करता है। बहुत सी बहने ऐसी भी है जो सुदूर अन्य प्रदेश अथवा विदेश में निवास कर रही है। उनका रक्षा सूत्र भाई तक डाक विभाग के माध्यम से पहुंचता है। डाकघरो में इस समय रक्षा बंधन के लिफाफो की अधिकता देखी जा रही है। इस समय दुकाने रात के समय बिजली की रोशनी में और सज जाती है। उस समय उनका आकर्षण बढ़ जाता है। रक्षा बंधन का दिन नजदीक आने के कारण दुकानो पर रक्षा सूत्र खरीदने वाली महिलाओ की भीड़ बढ़ गई है। साथ ही मिठाई की दुकाने भी सज गई है। वहां भी खरीददारी शुरू हो गई है।
बाजारो में सजी राखी की दुकानो पर उमड़ी भीड़
प्रतापगढ़ (ब्यूरो)। भाई बहन का पवित्र पर्व रक्षाबंधन परसो रविवार को है। बहने अपने भाई के घर जाने की तैयारी में जुटी है। शहर, कस्बो एवं गांवो की बाजारो में राखी की दुकाने सजी हुई है। वहां पर दिन भर खरीददारो की भीड़ दिखाई पड़ी। इससे बाजारो में पर्व को लेकर चहल पहल बढ़ गई है।
सावन माह की पूर्णिमा को भाई बहन का महापर्व रक्षा बंधन का त्योहार मनाया जाता है। बहने अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनके दीर्घायु होने की कामना करती है। साथ ही अपने भाई से रक्षा का वचन भी मांगती है। भाई बहन के इस पवित्र त्योहार का जिक्र इतिहास में भी आता है। राजस्थान के उदयपुर राज्य की रानी कर्मवती के ऊपर एक राजा ने आक्रमण कर दिया। जब वह घोर संकट में घिर गई तो उन्होने अपने दूत से रक्षा सूत्र मुगल शासक हुमायूं के पास भेजकर उनसे मदद मांगी थी। इस्लाम धर्म का अनुयायी होते हुए भी राजा हुमायूं ने रक्षा बंधन भेज देने मात्र से कर्मवती को अपनी बहन मानकर भाई का फर्ज निभाते हुए युद्ध भूमि में पहुंच गया। परन्तु तब तक बहुत देर हो चुकी थी। रानी अपने पराजय व शत्रु के हाथ में पड़ने के पहले सती हो चुकी थी। रानी कर्मवती की मदद न कर पाने का पश्चाताप हुमायूं को जीवन के अंतिम समय तक रहा। इसी कारण आज व्यस्त दिनचर्या के बावजूद बहने अपना अमूल्य समय निकालकर रक्षा सूत्र बांधने अपने भाई के पास अवश्य पहंुचती है। जो नहीं पहुंच पाती उनके पास भाई स्वयं पहुंचने का प्रयास करता है। बहुत सी बहने ऐसी भी है जो सुदूर अन्य प्रदेश अथवा विदेश में निवास कर रही है। उनका रक्षा सूत्र भाई तक डाक विभाग के माध्यम से पहुंचता है। डाकघरो में इस समय रक्षा बंधन के लिफाफो की अधिकता देखी जा रही है। इस समय दुकाने रात के समय बिजली की रोशनी में और सज जाती है। उस समय उनका आकर्षण बढ़ जाता है। रक्षा बंधन का दिन नजदीक आने के कारण दुकानो पर रक्षा सूत्र खरीदने वाली महिलाओ की भीड़ बढ़ गई है। साथ ही मिठाई की दुकाने भी सज गई है। वहां भी खरीददारी शुरू हो गई है।



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