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21 वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप है नई शिक्षा नीतिः प्रोफेसर वैशंपायन

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज में गुरुवार को नई शिक्षा नीति 2020 पर सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार के मुख्य अतिथि बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी के कुलपति प्रोफेसर जयंत विनायक वैशंपायन ने कहा कि नई शिक्षा नीति का उद्देश्य 21वीं शताब्दी की आवश्यकताओं के अनुरूप है। उसको लागू करने में जो समस्याएं हैं उनका समाधान करते हुए हमें आगे बढ़ना है। यह नीति तभी अच्छी तरह से लागू हो सकती है। प्रोफेसर वैशंपायन ने कहा कि इसकी प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए कि वर्तमान व्यवस्था को परिवर्तित किए बिना धीरे-धीरे इसे आगे बढ़ाया जाए। जिससे यह नीति सफलतापूर्वक लागू हो सके। उन्होंने कहा कि आज छात्र और शिक्षक के बीच की दूरी बढ़ गई है। न तो छात्र क्लास रूम में पढ़ना चाहते हैं और न ही शिक्षक पढ़ाना चाहते हैं। इस खाई को पाटना होगा।  शिक्षण कार्य एक पुरस्कार की तरह है। इसीलिए शिक्षकों को पढ़ाने में रुचि लेनी चाहिए।
अध्यक्षता करते हुए मुक्त विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर सीमा सिंह ने कहा कि नई शिक्षा नीति से शिक्षा जगत में नया बदलाव आएगा ।यह जहां विद्यार्थियों के लिए अत्यंत रुचिकर होगी, वहीं शिक्षकों को भी नए अवसर मिलेंगे। प्रोफेसर सिंह ने इस अवसर पर प्रोफेसर वैशंपायन एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती वैशंपायन का अंगवस्त्रम से स्वागत किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय तथा कानपुर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति  प्रोफेसर वैशंपायन ने मुक्त विश्वविद्यालय से जुड़े कई संस्मरण सुनाए। प्रारंभ में कुलसचिव डॉ अरुण कुमार गुप्ता ने मुख्य अतिथि प्रोफेसर वैशंपायन का स्वागत किया। इस अवसर पर प्रोफेसर ओम जी गुप्ता, प्रोफेसर पी पी दुबे, प्रोफेसर आशुतोष गुप्ता, प्रोफेसर पीके पांडे, प्रोफेसर एस कुमार, डॉ अरुण कुमार गुप्ता, वित्त अधिकारी अजय कुमार सिंह, परीक्षा नियंत्रक देवेंद्र प्रताप सिंह, डॉ देवेश रंजन त्रिपाठी, डॉ मीरा पाल, डॉ दिनेश सिंह, डॉ सतीश चंद जैसल, डॉ श्रुति, डॉ अनिल सिंह भदौरिया  आदि उपस्थित रहे।

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प्रयागराज। उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज में गुरुवार को नई शिक्षा नीति 2020 पर सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार के मुख्य अतिथि बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी के कुलपति प्रोफेसर जयंत विनायक वैशंपायन ने कहा कि नई शिक्षा नीति का उद्देश्य 21वीं शताब्दी की आवश्यकताओं के अनुरूप है। उसको लागू करने में जो समस्याएं हैं उनका समाधान करते हुए हमें आगे बढ़ना है। यह नीति तभी अच्छी तरह से लागू हो सकती है। प्रोफेसर वैशंपायन ने कहा कि इसकी प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए कि वर्तमान व्यवस्था को परिवर्तित किए बिना धीरे-धीरे इसे आगे बढ़ाया जाए। जिससे यह नीति सफलतापूर्वक लागू हो सके। उन्होंने कहा कि आज छात्र और शिक्षक के बीच की दूरी बढ़ गई है। न तो छात्र क्लास रूम में पढ़ना चाहते हैं और न ही शिक्षक पढ़ाना चाहते हैं। इस खाई को पाटना होगा।  शिक्षण कार्य एक पुरस्कार की तरह है। इसीलिए शिक्षकों को पढ़ाने में रुचि लेनी चाहिए।
अध्यक्षता करते हुए मुक्त विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर सीमा सिंह ने कहा कि नई शिक्षा नीति से शिक्षा जगत में नया बदलाव आएगा ।यह जहां विद्यार्थियों के लिए अत्यंत रुचिकर होगी, वहीं शिक्षकों को भी नए अवसर मिलेंगे। प्रोफेसर सिंह ने इस अवसर पर प्रोफेसर वैशंपायन एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती वैशंपायन का अंगवस्त्रम से स्वागत किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय तथा कानपुर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति  प्रोफेसर वैशंपायन ने मुक्त विश्वविद्यालय से जुड़े कई संस्मरण सुनाए। प्रारंभ में कुलसचिव डॉ अरुण कुमार गुप्ता ने मुख्य अतिथि प्रोफेसर वैशंपायन का स्वागत किया। इस अवसर पर प्रोफेसर ओम जी गुप्ता, प्रोफेसर पी पी दुबे, प्रोफेसर आशुतोष गुप्ता, प्रोफेसर पीके पांडे, प्रोफेसर एस कुमार, डॉ अरुण कुमार गुप्ता, वित्त अधिकारी अजय कुमार सिंह, परीक्षा नियंत्रक देवेंद्र प्रताप सिंह, डॉ देवेश रंजन त्रिपाठी, डॉ मीरा पाल, डॉ दिनेश सिंह, डॉ सतीश चंद जैसल, डॉ श्रुति, डॉ अनिल सिंह भदौरिया  आदि उपस्थित रहे।

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