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चार बुखार से बचाएगी एक सावधानी एक मच्छरदानी : उपेन्द्रमणि त्रिपाठी

मच्छरों से होने वाले बुखार- डेंगू, चिकनगुनिया, जापानीज इंसेफेलाइटिस और मलेरिया
अयोध्या। सरकारी जागरूकता के प्रयासों के बावजूद स्वच्छता के प्रति हमारी लापरवाही जीवन के लिए संकट की स्थिति पैदा कर सकती है इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है पिछले कुछ वर्षों में मच्छरों से फैलने वाले भयंकर महामारी का रूप लिए बुखार के कई प्रकार।   मानवता पर एक मच्छर , ड्रोन हेलीकाप्टर  की तरह बारूद (रोगकारकों) को सीधे अपने दुश्मन (मनुष्य के रक्त) पर लांच कर देता है।
ज्यादा खतरा कब –
डॉ उपेन्द्र मणि त्रिपाठी के अनुसार  जुलाई-अगस्त से अक्टूबर तक बरसात के समय व उसके बाद हमारे घरों में पुराने गड्ढे, नाली, कूलर, टँकी, या अन्य पड़े सामानों, घर के आस पास एकत्र पानी व गंदगी  मच्छरों के प्रजनन व पनपने की सबसे मुफीद जगह होती हैं।
कैसे फैलता है रोग –
डॉ उपेन्द्र मणि त्रिपाठी ने बताया मनुष्यो को मादा ही काटती हैं किन्तु  रोग केवल संक्रमित मच्छर से ही फैलता है। इनकी आंत में रोगाणुओं ,जीवाणुओ, विषाणुओं ,परजीवियों को पनपने की जगह मिल जाती है और  हमारा रक्त चूसते समय उसकी लार के साथ यह रोगकारक मनुष्य के रक्त में मिल कर पहले अपने लिए उचित जगह (प्रमुख रूप से लिवर कोशिकाओं  ) बनाते हैं, फिर अपनी संख्या बढ़ाते हैं तब कई दिनों बाद रोग के लक्षण पैदा करते है। काटे जाने से लेकर रोग लक्षण दिखने  के बीच इस समय को इन्क्यूबेशन पीरियड कहा जाता है।
कैसे पहचानें रोग
डॉ उपेन्द्र मणि त्रिपाठी ने कहा रोग से ग्रसित व्यक्ति में शुरुआत में लगभग एक समान लक्षण प्रकट होने से बुखार के प्रकार को समझ पाना आमजन के लिए आसान नही होता। व्यक्ति को सामान्यतः तेज बुखार (102-105 डिग्री फारेनहाइट तक), सिरदर्द,पूरे शरीर में दर्द, जी मिचलाना, उल्टी, भूख कम लगना, कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई पड़ते हैं। ऐसे समय बिना चिकित्सक को दिखाए केवल बुखार उतरने की दवा खाने से उचित  नही होगा।
इसी प्रकार तराई इलाकों में जहां धान की खेती अधिक होती है वहां पनपने वाले मच्छर क्यूलेक्स विश्नोई के जरिये जैपनीज इंसेफ्लाईटिस का विषाणु बहुधा 5-15 वर्ष के बच्चों को संक्रमित कर सकता है। इससे प्रभावित रोगी बुखार के बताये गए लक्षणों के साथ गर्दन में ऐंठन व अकड़न का विशेष लक्षण पाया जाता है।
क्या बरतें सावधानी-
अपने घर व आस पास स्वच्छता का विशेष ध्यान दें, नमी गन्दगी व पानी न एकत्र होने दें, नालियों में कीटनाशक या मिटटी के तेल का छिड़काव कराएं। रात में मच्छरदानी में ही सोएं व दिन में व शाम के समय मच्छरों से बचने के लिए पूरी आस्तीन के कपड़े पहने, क्रीम ,जेल या नीम तेल का प्रयोग कर सकते है। पौष्टिक आहार लें।
मच्छरों से सुरक्षा का सबसे कारगर उपाय है मच्छरदानी, सोते समय अवश्य प्रयोग करना चाहिए।
क्या करें घरेलू  उपाय-
अजवायन किशमिश तुलसी और नीम की पत्तियो को उबाल कर पेय को दिन में 3-4 बार ले सकते हैं।पपीते की पत्ती का जूस प्लेटलेट्स की संख्या को नियंत्रित करने के लिए जाना जाता है इसका भी सेवन कर सकते हैं। स्नान करते समय गर्म पानी में नीम की पत्ती व सेंधा नमक डालकर इसे पानी में मिलाकर नहाएं।

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मच्छरों से होने वाले बुखार- डेंगू, चिकनगुनिया, जापानीज इंसेफेलाइटिस और मलेरिया
अयोध्या। सरकारी जागरूकता के प्रयासों के बावजूद स्वच्छता के प्रति हमारी लापरवाही जीवन के लिए संकट की स्थिति पैदा कर सकती है इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है पिछले कुछ वर्षों में मच्छरों से फैलने वाले भयंकर महामारी का रूप लिए बुखार के कई प्रकार।   मानवता पर एक मच्छर , ड्रोन हेलीकाप्टर  की तरह बारूद (रोगकारकों) को सीधे अपने दुश्मन (मनुष्य के रक्त) पर लांच कर देता है।
ज्यादा खतरा कब –
डॉ उपेन्द्र मणि त्रिपाठी के अनुसार  जुलाई-अगस्त से अक्टूबर तक बरसात के समय व उसके बाद हमारे घरों में पुराने गड्ढे, नाली, कूलर, टँकी, या अन्य पड़े सामानों, घर के आस पास एकत्र पानी व गंदगी  मच्छरों के प्रजनन व पनपने की सबसे मुफीद जगह होती हैं।
कैसे फैलता है रोग –
डॉ उपेन्द्र मणि त्रिपाठी ने बताया मनुष्यो को मादा ही काटती हैं किन्तु  रोग केवल संक्रमित मच्छर से ही फैलता है। इनकी आंत में रोगाणुओं ,जीवाणुओ, विषाणुओं ,परजीवियों को पनपने की जगह मिल जाती है और  हमारा रक्त चूसते समय उसकी लार के साथ यह रोगकारक मनुष्य के रक्त में मिल कर पहले अपने लिए उचित जगह (प्रमुख रूप से लिवर कोशिकाओं  ) बनाते हैं, फिर अपनी संख्या बढ़ाते हैं तब कई दिनों बाद रोग के लक्षण पैदा करते है। काटे जाने से लेकर रोग लक्षण दिखने  के बीच इस समय को इन्क्यूबेशन पीरियड कहा जाता है।
कैसे पहचानें रोग
डॉ उपेन्द्र मणि त्रिपाठी ने कहा रोग से ग्रसित व्यक्ति में शुरुआत में लगभग एक समान लक्षण प्रकट होने से बुखार के प्रकार को समझ पाना आमजन के लिए आसान नही होता। व्यक्ति को सामान्यतः तेज बुखार (102-105 डिग्री फारेनहाइट तक), सिरदर्द,पूरे शरीर में दर्द, जी मिचलाना, उल्टी, भूख कम लगना, कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई पड़ते हैं। ऐसे समय बिना चिकित्सक को दिखाए केवल बुखार उतरने की दवा खाने से उचित  नही होगा।
इसी प्रकार तराई इलाकों में जहां धान की खेती अधिक होती है वहां पनपने वाले मच्छर क्यूलेक्स विश्नोई के जरिये जैपनीज इंसेफ्लाईटिस का विषाणु बहुधा 5-15 वर्ष के बच्चों को संक्रमित कर सकता है। इससे प्रभावित रोगी बुखार के बताये गए लक्षणों के साथ गर्दन में ऐंठन व अकड़न का विशेष लक्षण पाया जाता है।
क्या बरतें सावधानी-
अपने घर व आस पास स्वच्छता का विशेष ध्यान दें, नमी गन्दगी व पानी न एकत्र होने दें, नालियों में कीटनाशक या मिटटी के तेल का छिड़काव कराएं। रात में मच्छरदानी में ही सोएं व दिन में व शाम के समय मच्छरों से बचने के लिए पूरी आस्तीन के कपड़े पहने, क्रीम ,जेल या नीम तेल का प्रयोग कर सकते है। पौष्टिक आहार लें।
मच्छरों से सुरक्षा का सबसे कारगर उपाय है मच्छरदानी, सोते समय अवश्य प्रयोग करना चाहिए।
क्या करें घरेलू  उपाय-
अजवायन किशमिश तुलसी और नीम की पत्तियो को उबाल कर पेय को दिन में 3-4 बार ले सकते हैं।पपीते की पत्ती का जूस प्लेटलेट्स की संख्या को नियंत्रित करने के लिए जाना जाता है इसका भी सेवन कर सकते हैं। स्नान करते समय गर्म पानी में नीम की पत्ती व सेंधा नमक डालकर इसे पानी में मिलाकर नहाएं।

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