आगरा। सिकंदरा थाना क्षेत्र के रामी नगला गांव में रविवार सुबह एक ही परिवार की छह लड़कियों की यमुना में डूबने से मौत हो गई। इस दर्दनाक हादसे से न केवल पूरा गांव स्तब्ध है, बल्कि परिजन सदमे में हैं। मृत बच्चियां आपस में चचेरी बहनें थीं और एक ही परिवार के भाईयों की बेटियां थीं।
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पानी की गहराई का नहीं था अंदाज़ा
हादसा उस वक्त हुआ जब आठ लड़कियां यमुना किनारे नहाने गईं। उनमें से छह—दिव्या, मुस्कान, नैना, संध्या, सोनम और सुहानी—नदी में नहाते वक्त गहराई में चली गईं और डूब गईं। बाकी दो लड़कियों ने जब उन्हें डूबते देखा, तो तुरंत शोर मचाया, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।
ग्रामीणों और गोताखोरों ने निकाले शव
घटना के बाद गांव के लोग मौके पर पहुंच गए। कई लोग जिन्होंने तैरना जाना, उन्होंने नदी में छलांग भी लगाई, लेकिन कोई उन्हें बचा नहीं पाया। पुलिस और प्रशासन की मदद से स्थानीय गोताखोरों को बुलाया गया, जिन्होंने थोड़ी ही देर में सभी छह शवों को बाहर निकाल लिया।
गांव में मातम, हर आंख नम
मृत बालिकाओं की उम्र 10 से 18 वर्ष के बीच बताई जा रही है। जैसे ही शव गांव लाए गए, पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। हर गली, हर आंगन, हर कोना खामोश था। सभी लड़कियां एक ही परिवार की होने के कारण एक साथ छह शवों का दृश्य दिल दहला देने वाला था।
पुलिस ने शव भेजे पोस्टमार्टम के लिए
पुलिस ने सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है। शोक संतप्त परिवार को सांत्वना देने के लिए प्रशासनिक अधिकारी भी गांव पहुंचे। ग्रामीणों की मांग है कि पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता दी जाए।
निष्कर्ष:
इस हृदय विदारक हादसे ने एक बार फिर ये साबित कर दिया कि नदी, तालाब और अन्य जलस्रोतों के पास बच्चों को अकेले नहीं भेजना चाहिए। प्रशासन को चाहिए कि गर्मियों में जलस्त्रोतों के पास चेतावनी बोर्ड लगवाए जाएं और गश्त बढ़ाई जाए। यह हादसा न सिर्फ एक परिवार की, बल्कि पूरे समाज की चेतावनी है।



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