आगरा। उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की हालिया आगरा यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक उजागर हुई है। एक जून को अहिल्याबाई होल्कर जयंती समारोह में शामिल होने आए उप राष्ट्रपति के आगरा एयरफोर्स स्टेशन स्थित टेक्निकल एरिया में तीन भाजपा नेताओं ने बिना अनुमति प्रवेश कर लिया और उनका स्वागत किया।उप राष्ट्रपति की सुरक्षा में गंभीर चूक, भाजपाइयों ने एयरफोर्स एरिया में लगाई सेंध
यह संवेदनशील चूक अब उप राष्ट्रपति सचिवालय तक पहुंच चुकी है, जिसने आगरा जिला प्रशासन से स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही, एयरफोर्स के सुरक्षा अधिकारी से तत्काल जांच रिपोर्ट तलब की गई है।
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बिना अनुमति एयरफोर्स एरिया में कैसे पहुंचे भाजपा नेता?
प्रोटोकॉल के अनुसार, उप राष्ट्रपति के आगमन और विदाई के दौरान एयरफोर्स टेक्निकल एरिया में केवल उन्हीं लोगों को प्रवेश की अनुमति थी, जिनके नाम प्रमाणित सूची में शामिल थे। लेकिन इसके बावजूद संजय अरोड़ा, रोहित कत्याल और सोनू कक्कड़ नामक भाजपा कार्यकर्ता वहां पहुंच ग
पहले ही दी गई थी सख्त चेतावनी
एडीएम प्रोटोकॉल की ओर से 1 जून को ही एयरफोर्स अधिकारियों को दूरभाष पर निर्देश दिया गया था कि बिना सूची वाले किसी भी व्यक्ति को अंदर न जाने दिया जाए। इसके बावजूद सुरक्षा में चूक हुई, जिससे यह जाहिर होता है कि प्रोटोकॉल को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया।
अब CCTV जांच और रिपोर्ट की मांग
एडीएम प्रोटोकॉल द्वारा भेजे गए पत्र में कहा गया है कि:
पूरे घटनाक्रम की CCTV फुटेज जांच की जाए
ड्यूटी स्टाफ की जवाबदेही तय की जाए
आंतरिक रिपोर्ट तत्काल तैयार कर उप राष्ट्रपति सचिवालय को सौंपी जाए
भाजपा संगठन पर भी उठे सवाल
चूंकि अनधिकृत रूप से प्रवेश करने वाले तीनों व्यक्ति भाजपा से जुड़े हैं, इसलिए यह मामला अब केवल प्रशासन तक सीमित नहीं है। एडीएम ने इस मामले की जानकारी भाजपा के महानगर अध्यक्ष और जिलाध्यक्ष को भी भेज दी है। यह सवाल भी उठ रहा है कि पार्टी स्तर पर ऐसे कार्यकर्ताओं को किसने भेजा।
राष्ट्रीय सुरक्षा में सेंध
एयरफोर्स स्टेशन जैसे संवेदनशील क्षेत्र में बिना अनुमति किसी का भी प्रवेश करना राष्ट्रीय सुरक्षा में सेंध माना जाता है। यह घटना प्रशासन और सुरक्षा बलों की गंभीर लापरवाही को उजागर करती है।
निष्कर्ष:
यह घटना केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय स्तर की सुरक्षा चुनौती है। ऐसे मामलों से स्पष्ट होता है कि जब वीवीआईपी सुरक्षा प्रोटोकॉल में ढिलाई बरती जाती है, तो गंभीर खतरे उत्पन्न हो सकते हैं। अब देखने वाली बात यह है कि उप राष्ट्रपति सचिवालय इस मामले में कितनी गंभीरता से कार्रवाई करता है और दोषियों पर क्या दंडात्मक कार्रवाई की जाती है।



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