प्रतापगढ़ (ब्यूरो)। सम्राट अशोक महान ने अपने विचार तथा निर्देशो को अधिकांश शिलालेखो पर पाली भाषा में लिखवाएं है। इस लिपि को धम लिपि का नाम दिया जो अहरौरा के शिलालेख इयं धमं लिपि के रूप में अंकित है। इसे अशोकन या ब्राम्ही लिपि भी कहा जाता है। यह शिलालेख ब्रिटिश म्यूजियम में संरक्षित है।
सम्राट अशोक महान पुस्तकालय पर 9 अगस्त से 15 अगस्त तक ब्राम्ही लिपि प्रशिक्षण कार्यशाला सम्पन्न हुई। इसमें प्रतिभागियो ने इस लिपि को पढ़ना व लिखना सीखा। रविवार को सांय 4.30 बजे से परीक्षा के उपरान्त समापन समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से अलंकृत डा. राधेश्याम मौर्य सम्मिलित हुए। उन्होने बताया कि पाली भाषा उ.प्र. माध्यमिक शिक्षा परिषद के हाईस्कूल तथा इंटरमीडिएट कोर्स में है तथा कोई भी इसे पढ़ सकता है। इसे पढ़ कर हम अपनी प्राचीन संस्कृति से सुपरिचित हो सकते है।
प्रतापगढ़ (ब्यूरो)। सम्राट अशोक महान ने अपने विचार तथा निर्देशो को अधिकांश शिलालेखो पर पाली भाषा में लिखवाएं है। इस लिपि को धम लिपि का नाम दिया जो अहरौरा के शिलालेख इयं धमं लिपि के रूप में अंकित है। इसे अशोकन या ब्राम्ही लिपि भी कहा जाता है। यह शिलालेख ब्रिटिश म्यूजियम में संरक्षित है।
सम्राट अशोक महान पुस्तकालय पर 9 अगस्त से 15 अगस्त तक ब्राम्ही लिपि प्रशिक्षण कार्यशाला सम्पन्न हुई। इसमें प्रतिभागियो ने इस लिपि को पढ़ना व लिखना सीखा। रविवार को सांय 4.30 बजे से परीक्षा के उपरान्त समापन समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से अलंकृत डा. राधेश्याम मौर्य सम्मिलित हुए। उन्होने बताया कि पाली भाषा उ.प्र. माध्यमिक शिक्षा परिषद के हाईस्कूल तथा इंटरमीडिएट कोर्स में है तथा कोई भी इसे पढ़ सकता है। इसे पढ़ कर हम अपनी प्राचीन संस्कृति से सुपरिचित हो सकते है।



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