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हादसे में तीनों मजदूरों की गृहस्थी बर्बाद

जौनपुर। वाराणसी-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग पर सिरकोनी बाजार में रविवार की रात कार की टक्कर से ई-रिक्शा सवार तीन मजदूरों की मौत से उनकी गृहस्थी उजड़ गई। उनकी पत्नी, बच्चों व परिवार वालों के करुण क्रंदन से जलालपुर थाना क्षेत्र के इजरी व सेहमलपुर गांव शोक की लहर में डूब गया है। ढांढ़स बंधाने वालों की आंखें आंसुओं से डबडबा जा रही हैं। दोनों गांवों के कई घरों में चूल्हे नहीं जले। ट्रक से बालू उतारने के बाद इजरी गांव निवासी 40 वर्षीय रवींद्र यादव ,41 वर्षीय राम प्रवेश यादव   व सेहमलपुर गांव के 35 वर्षीय सुभाष यादव  ई-रिक्शा से शहर से घर के लिए चले तो उन्हें क्या पता था कि रास्ते में   मौत उनका इंतजार कर रही है। रवींद्र के परिवार में पत्नी वंदना, चार बच्चे आयुष , आयुशी ईशा  व अतिथि   हैं। उन्हीं के पड़ोसी राम प्रवेश के परिवार में पत्नी अनीता यादव व दो बच्चे आर्यन व मानसी   हैं। सुभाष यादव के परिवार में पत्नी मीरा देवी, पुत्री रोली यादव पुत्र सूरज व सागर   हैं।   संवेदना जताने के लिए उनके घर पहुंचने वाले सगे-संबंधी व ग्रामीणों की आंखों से भी आंसुओं की धार फूट पड़ती है। छोटे बच्चों को तो अभी यह भी पता नहीं कि दिन भर मेहनत मजदूरी करने के बाद उन पर प्यार-दुलार लुटाकर पूरी थकान भूल जाने वाले उनके पिता अब उस दुनिया में चले गए है।

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जौनपुर। वाराणसी-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग पर सिरकोनी बाजार में रविवार की रात कार की टक्कर से ई-रिक्शा सवार तीन मजदूरों की मौत से उनकी गृहस्थी उजड़ गई। उनकी पत्नी, बच्चों व परिवार वालों के करुण क्रंदन से जलालपुर थाना क्षेत्र के इजरी व सेहमलपुर गांव शोक की लहर में डूब गया है। ढांढ़स बंधाने वालों की आंखें आंसुओं से डबडबा जा रही हैं। दोनों गांवों के कई घरों में चूल्हे नहीं जले। ट्रक से बालू उतारने के बाद इजरी गांव निवासी 40 वर्षीय रवींद्र यादव ,41 वर्षीय राम प्रवेश यादव   व सेहमलपुर गांव के 35 वर्षीय सुभाष यादव  ई-रिक्शा से शहर से घर के लिए चले तो उन्हें क्या पता था कि रास्ते में   मौत उनका इंतजार कर रही है। रवींद्र के परिवार में पत्नी वंदना, चार बच्चे आयुष , आयुशी ईशा  व अतिथि   हैं। उन्हीं के पड़ोसी राम प्रवेश के परिवार में पत्नी अनीता यादव व दो बच्चे आर्यन व मानसी   हैं। सुभाष यादव के परिवार में पत्नी मीरा देवी, पुत्री रोली यादव पुत्र सूरज व सागर   हैं।   संवेदना जताने के लिए उनके घर पहुंचने वाले सगे-संबंधी व ग्रामीणों की आंखों से भी आंसुओं की धार फूट पड़ती है। छोटे बच्चों को तो अभी यह भी पता नहीं कि दिन भर मेहनत मजदूरी करने के बाद उन पर प्यार-दुलार लुटाकर पूरी थकान भूल जाने वाले उनके पिता अब उस दुनिया में चले गए है।

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