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लायंस क्लब प्रतापगढ़ गौरव के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला का समापन कानपुर से आए हुये लॉयन गोपाल तुल्सियान द्वारा

प्रतापगढ़। लायंस क्लब प्रतापगढ़ गौरव के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला का समापन कानपुर से आए हुये लॉयन गोपाल तुल्सियान द्वारा किया गया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि जयपुरिया विद्यालय की प्रधानाचार्य  परमजीत कौर भी उपस्थित रहीं। कार्यशाला में समापन सत्र को संबोधित करते हुए कानपुर से आए हुए क्वेस्ट के ब्रांड एंबेसडर गोपाल तुलसियान ने कहा कि बालकों को भावनात्मक सहयोग की आवश्यकता इसलिए होती है, क्योंकि उस समय बालकों का संज्ञानात्मक विकास परिपक्व नहीं होता। बालक उस समय सीखने की प्रक्रिया में होते हैं उनमें सही और गलत का भेद करने की क्षमता विकसित नहीं होती, वे सही और गलत के अंतर को भेद करने में असमर्थ होते हैं।
कार्यशाला में क्वेस्ट की अंतर्राष्ट्रीय शिक्षिका डॉ. अल्पना वर्मा ने इस कार्यशाला की उपयोगिता से अवगत कराते हुए कहा कि आज सामाजिक अलगाव, शून्य शरीर की गतिविधियां, खराब रूटीन ने बच्चों में तनाव, निराशा, भय, चिंता और अवसाद को जन्म दिया है। उनके मिजाज में बदलाव, भावनात्मक परिवर्तन और गुस्सैल होना डिप्रेशन का लक्षण है। यह अवगुण बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित करते हैं, ऐसे में माता-पिता की यह जिम्मेवारी बनती है कि वह अपने बच्चों को शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक स्वास्थ्य का भी पूरा-पूरा ध्यान रखें। क्वेस्ट चेयर पर्सन मनोज रमनानी ने ऐसे कार्यक्रमों को सभी विद्यालयों में होने की आवश्यकता पर बल देते हुये उपस्थित प्रशिक्षणार्थियों से कहा कि परिवार के सदस्यों, स्वजनों, मित्रों/ सहेलियों के साथ समय बिताना, हंसना-खेलना और अपनी चिंता/ तनाव के बारे में बात या विमर्श करना बहुत जरूरी है। अध्यक्ष शिशिर खरे ने कहा कि जब बच्चा कुछ समझने लायक होता है तो दादा-दादी, नाना-नानी उसे कहानियां सुनाना शुरू कर देते हैं, बच्चा उन्हे बड़े चाव से सुनता है। इन कहानियों का आधार लालित्य और माधुर्य होता है। जिस भावनात्मक वातावरण और स्नेह के साथ ये कहानियां कही जाती हैं, यही इनका महत्वपूर्ण पहलू है। किन्तु, आज इसको ही सबसे कम महत्व दिया जाता है। जबकि बच्चों में भावनात्मक विकास का आधार इसी  तरीके से तैयार किया जा सकता है और इसी आधार पर बालक आगे मिलने वाले ज्ञान को ग्रहण कर अपने संस्कार अर्जित करता है।  कार्यशाला का संचालन करते हुए प्रोफेसर डॉ. पीयूष कांत शर्मा ने शिक्षार्थियों से कहा कि जिस बच्चे के पास भावनात्मक आधार नहीं है, वह जीवन के संघर्ष नहीं झेल सकता। पढ़ाई में अच्छा हो सकता है, बड़ा व्यवसायी या अधिकारी भी बन सकता है किन्तु उसके भावनात्मक संस्कार का धरातल निर्बल ही रहेगा। पूरा पाश्चात्य समाज इसका ज्वलन्त उदाहरण है।इस दो दिवसीय प्रशिक्षण सत्र में श्रीराम बालिका इंटर कॉलेज के सभी शिक्षकों एवं अन्य परीक्षार्थियों में उत्साह का वातावरण बना रहा। प्रशिक्षिका डॉ.अल्पना वर्मा ने विभिन्न प्रकार के उपक्रमों, गेम्स, मनोवैज्ञानिक तरीकों से बच्चों के शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक अनुभूतियों को कैसे पहचाने और उनका किस प्रकार सही पोषण करें, इससे संबंधित विभिन्न चार्ट, मॉडल्स बनवाया और प्रशिक्षणार्थियों को ही मौका दिया कि वह किस प्रकार भावी जीवन में अपने विद्यार्थियों के भावनात्मक स्वरूप से समझते हुए उन्हें शिक्षा प्रदान करेंगे, जिससे सभी बच्चे राष्ट्र के निर्माण में, समाज के विकास में अपनी सार्थक भूमिका का निर्वहन उचित रूप से कर सकेंगे। इस कार्यक्रम में संस्थान के निदेशक आनंद केसरवानी ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए अतिथियों के प्रति अपना आभार व्यक्त किया। प्रधानाचार्य डोली केसरवानी ने सभी आगंतुकों और विभिन्न विद्यालयों के अन्य प्रबंधन के प्रति अपना आभार व्यक्त किया और शिक्षकों से आगे अपील की कि वे अपने आगे के शिक्षण प्रशिक्षण में इस कार्यशाला में बताई गई शिक्षा को जरूर कार्यान्वित करेंगे। इस अवसर पर लायंस प्रतापगढ़ गौरव के सचिव अमोलक सिंह, पंकज मिश्रा सहित कविता केसरवानी, पारुल केसरवानी, लालमणि पटेल, प्रगति खंडेलवाल, अनिल वर्मा, प्रवीण मौर्या, हरिकृष्ण, धर्मेन्द्र प्रजापति, शिवदुलारी सेन, अंजना दुबे, पूजा शुक्ला, सुरेखा सरोज, मिथलेश सिंह, शिव शंकर, विशाल कुमार सरोज आदि उपस्थित रहे। उपस्थिति उल्लेखनीय रही। कार्यशाला समापन के उपरांत सभी प्रशिक्षणार्थियों को लायंस इंटरनेशनल का प्रमाण पत्र दिया गया, साथ ही आयोजन को सफल बनाने के लिये  गवर्नर सौरभ कांत द्वारा संतोष भगवन, मनीष केसरवानी, क्षितिज श्रीवास्तव को भी प्रमाण पत्र दिया गया। अध्यक्ष शिशिर खरे, डॉ. पीयूष कांत शर्मा, अमोलक सिंह, डॉली केसरवानी तथा आनंद केसरवानी को लायंस इंटरनेशनल का प्रमाण पत्र हस्तगत कराया गया।

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प्रतापगढ़। लायंस क्लब प्रतापगढ़ गौरव के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला का समापन कानपुर से आए हुये लॉयन गोपाल तुल्सियान द्वारा किया गया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि जयपुरिया विद्यालय की प्रधानाचार्य  परमजीत कौर भी उपस्थित रहीं। कार्यशाला में समापन सत्र को संबोधित करते हुए कानपुर से आए हुए क्वेस्ट के ब्रांड एंबेसडर गोपाल तुलसियान ने कहा कि बालकों को भावनात्मक सहयोग की आवश्यकता इसलिए होती है, क्योंकि उस समय बालकों का संज्ञानात्मक विकास परिपक्व नहीं होता। बालक उस समय सीखने की प्रक्रिया में होते हैं उनमें सही और गलत का भेद करने की क्षमता विकसित नहीं होती, वे सही और गलत के अंतर को भेद करने में असमर्थ होते हैं।
कार्यशाला में क्वेस्ट की अंतर्राष्ट्रीय शिक्षिका डॉ. अल्पना वर्मा ने इस कार्यशाला की उपयोगिता से अवगत कराते हुए कहा कि आज सामाजिक अलगाव, शून्य शरीर की गतिविधियां, खराब रूटीन ने बच्चों में तनाव, निराशा, भय, चिंता और अवसाद को जन्म दिया है। उनके मिजाज में बदलाव, भावनात्मक परिवर्तन और गुस्सैल होना डिप्रेशन का लक्षण है। यह अवगुण बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित करते हैं, ऐसे में माता-पिता की यह जिम्मेवारी बनती है कि वह अपने बच्चों को शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक स्वास्थ्य का भी पूरा-पूरा ध्यान रखें। क्वेस्ट चेयर पर्सन मनोज रमनानी ने ऐसे कार्यक्रमों को सभी विद्यालयों में होने की आवश्यकता पर बल देते हुये उपस्थित प्रशिक्षणार्थियों से कहा कि परिवार के सदस्यों, स्वजनों, मित्रों/ सहेलियों के साथ समय बिताना, हंसना-खेलना और अपनी चिंता/ तनाव के बारे में बात या विमर्श करना बहुत जरूरी है। अध्यक्ष शिशिर खरे ने कहा कि जब बच्चा कुछ समझने लायक होता है तो दादा-दादी, नाना-नानी उसे कहानियां सुनाना शुरू कर देते हैं, बच्चा उन्हे बड़े चाव से सुनता है। इन कहानियों का आधार लालित्य और माधुर्य होता है। जिस भावनात्मक वातावरण और स्नेह के साथ ये कहानियां कही जाती हैं, यही इनका महत्वपूर्ण पहलू है। किन्तु, आज इसको ही सबसे कम महत्व दिया जाता है। जबकि बच्चों में भावनात्मक विकास का आधार इसी  तरीके से तैयार किया जा सकता है और इसी आधार पर बालक आगे मिलने वाले ज्ञान को ग्रहण कर अपने संस्कार अर्जित करता है।  कार्यशाला का संचालन करते हुए प्रोफेसर डॉ. पीयूष कांत शर्मा ने शिक्षार्थियों से कहा कि जिस बच्चे के पास भावनात्मक आधार नहीं है, वह जीवन के संघर्ष नहीं झेल सकता। पढ़ाई में अच्छा हो सकता है, बड़ा व्यवसायी या अधिकारी भी बन सकता है किन्तु उसके भावनात्मक संस्कार का धरातल निर्बल ही रहेगा। पूरा पाश्चात्य समाज इसका ज्वलन्त उदाहरण है।इस दो दिवसीय प्रशिक्षण सत्र में श्रीराम बालिका इंटर कॉलेज के सभी शिक्षकों एवं अन्य परीक्षार्थियों में उत्साह का वातावरण बना रहा। प्रशिक्षिका डॉ.अल्पना वर्मा ने विभिन्न प्रकार के उपक्रमों, गेम्स, मनोवैज्ञानिक तरीकों से बच्चों के शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक अनुभूतियों को कैसे पहचाने और उनका किस प्रकार सही पोषण करें, इससे संबंधित विभिन्न चार्ट, मॉडल्स बनवाया और प्रशिक्षणार्थियों को ही मौका दिया कि वह किस प्रकार भावी जीवन में अपने विद्यार्थियों के भावनात्मक स्वरूप से समझते हुए उन्हें शिक्षा प्रदान करेंगे, जिससे सभी बच्चे राष्ट्र के निर्माण में, समाज के विकास में अपनी सार्थक भूमिका का निर्वहन उचित रूप से कर सकेंगे। इस कार्यक्रम में संस्थान के निदेशक आनंद केसरवानी ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए अतिथियों के प्रति अपना आभार व्यक्त किया। प्रधानाचार्य डोली केसरवानी ने सभी आगंतुकों और विभिन्न विद्यालयों के अन्य प्रबंधन के प्रति अपना आभार व्यक्त किया और शिक्षकों से आगे अपील की कि वे अपने आगे के शिक्षण प्रशिक्षण में इस कार्यशाला में बताई गई शिक्षा को जरूर कार्यान्वित करेंगे। इस अवसर पर लायंस प्रतापगढ़ गौरव के सचिव अमोलक सिंह, पंकज मिश्रा सहित कविता केसरवानी, पारुल केसरवानी, लालमणि पटेल, प्रगति खंडेलवाल, अनिल वर्मा, प्रवीण मौर्या, हरिकृष्ण, धर्मेन्द्र प्रजापति, शिवदुलारी सेन, अंजना दुबे, पूजा शुक्ला, सुरेखा सरोज, मिथलेश सिंह, शिव शंकर, विशाल कुमार सरोज आदि उपस्थित रहे। उपस्थिति उल्लेखनीय रही। कार्यशाला समापन के उपरांत सभी प्रशिक्षणार्थियों को लायंस इंटरनेशनल का प्रमाण पत्र दिया गया, साथ ही आयोजन को सफल बनाने के लिये  गवर्नर सौरभ कांत द्वारा संतोष भगवन, मनीष केसरवानी, क्षितिज श्रीवास्तव को भी प्रमाण पत्र दिया गया। अध्यक्ष शिशिर खरे, डॉ. पीयूष कांत शर्मा, अमोलक सिंह, डॉली केसरवानी तथा आनंद केसरवानी को लायंस इंटरनेशनल का प्रमाण पत्र हस्तगत कराया गया।

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