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रौद्र रूप धारण कर रहीं गंगा-यमुना

जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोतरी से बढ़ी चिंता
नौ वर्ष पूर्व आई बाढ़ के बारे में सोच कर लोग परेशान
प्रयागराज । प्रयागराज  में गंगा और यमुना नदियाँ उफान पर हैं। दोनों नदियाँ खतरे के निशान से ऊपर बह रहीं हैं। जलस्तर में जिस तरह दो सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से    बढ़ोतरी हो रही है, उससे यह संभावना भी जताई जाने लगी है कि अगले कुछ दिनों में कहीं वर्ष 2013 जैसा हाल न हो जाए, जब दोनों नदियों का जलस्तर 86 मीटर के पार न पहुंच गया था और निचले इलाकों करीब एक माह तक पानी भरा था। च॔बल, केन और बेतवा नदियों से जिस तरह यमुना में पानी आ रहा है, उससे 1978 में आई बाढ़ का भी डर लोगों को सताने लगा है। शहर में गंगा नदी से लगे निचले इलाकों बमरौली, द्रौपदी घाट, अशोक नगर, नेवादा, राजापुर, उंचवागड़ी, बेली गांव, म्योराबाद, नयापुरवा, मेंहदौरी, रसूलाबाद, शिवकुटी, चिल्ला, गोविंदपुर, सलोरी, बघाड़ा, दारागंज आदि और यमुना से लगे गौस नगर, शम्सनगर, हड्डी गोदाम, करेली, बलुआ घाट आदि में हजारों मकान जलमग्न हो गए हैं। दोनों नदियों का जलस्तर दो सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। सिंचाई और जल संसाधन विभाग के अफसरों की मानें तो उत्तराखंड से गंगा नदी में और मध्य प्रदेश से चंबल, केन और बेतवा नदियों से भारी मात्रा में आ रहे पानी के कारण अगले कुछ दिनों तक स्थिति काफी चिंताजनक रहने की संभावना है। मध्य प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश के कारण वहां से लाखों क्यूसेक पानी लगातार यमुना में आ रहा है।  वर्ष 2013 की बात करें तो उस दौरान बाढ़ ने शहरी इलाकों में भारी तबाही मचाई थी। गंगा और यमुना के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी के साथ बारिश भी जमकर हुई थी, जिसकी वजह से शहर के निचले इलाकों में करीब एक माह तक जलभराव की स्थिति थी। निचले इलाकों में लगातार पानी भरा रहने के कारण सैकड़ों मकान धराशायी हो गए थे। अब नौ वर्ष बाद जिस तरह दोनों नदियाँ रौद्र रूप धारण कर रहीं हैं, उससे निचले इलाकों में रहने वालों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि नौ वर्ष पूर्व आई बाढ़ के दौरान हजारों लोगों को लंबे समय तक अपना घर छोड़कर शिविरों में रहना पड़ा था।
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गंगा-यमुना का जलस्तर
फाफामऊ  85.47 मीटर
छतनाग     84.73 मीटर
नैनी          85.42 मीटर
(खतरे का निशान- 84.734 मीटर)
————–
वर्ष 2013 में नदियों का जलस्तर
फाफामऊ  86.82 मीटर
छतनाग     86.04 मीटर
नैनी          86.60 मीटर
——————
वर्ष 1978 में नदियों का जलस्तर
फाफामऊ  87.980 मीटर
छतनाग     88.030 मीटर
नैनी          87.990 मीटर

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जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोतरी से बढ़ी चिंता
नौ वर्ष पूर्व आई बाढ़ के बारे में सोच कर लोग परेशान
प्रयागराज । प्रयागराज  में गंगा और यमुना नदियाँ उफान पर हैं। दोनों नदियाँ खतरे के निशान से ऊपर बह रहीं हैं। जलस्तर में जिस तरह दो सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से    बढ़ोतरी हो रही है, उससे यह संभावना भी जताई जाने लगी है कि अगले कुछ दिनों में कहीं वर्ष 2013 जैसा हाल न हो जाए, जब दोनों नदियों का जलस्तर 86 मीटर के पार न पहुंच गया था और निचले इलाकों करीब एक माह तक पानी भरा था। च॔बल, केन और बेतवा नदियों से जिस तरह यमुना में पानी आ रहा है, उससे 1978 में आई बाढ़ का भी डर लोगों को सताने लगा है। शहर में गंगा नदी से लगे निचले इलाकों बमरौली, द्रौपदी घाट, अशोक नगर, नेवादा, राजापुर, उंचवागड़ी, बेली गांव, म्योराबाद, नयापुरवा, मेंहदौरी, रसूलाबाद, शिवकुटी, चिल्ला, गोविंदपुर, सलोरी, बघाड़ा, दारागंज आदि और यमुना से लगे गौस नगर, शम्सनगर, हड्डी गोदाम, करेली, बलुआ घाट आदि में हजारों मकान जलमग्न हो गए हैं। दोनों नदियों का जलस्तर दो सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। सिंचाई और जल संसाधन विभाग के अफसरों की मानें तो उत्तराखंड से गंगा नदी में और मध्य प्रदेश से चंबल, केन और बेतवा नदियों से भारी मात्रा में आ रहे पानी के कारण अगले कुछ दिनों तक स्थिति काफी चिंताजनक रहने की संभावना है। मध्य प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश के कारण वहां से लाखों क्यूसेक पानी लगातार यमुना में आ रहा है।  वर्ष 2013 की बात करें तो उस दौरान बाढ़ ने शहरी इलाकों में भारी तबाही मचाई थी। गंगा और यमुना के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी के साथ बारिश भी जमकर हुई थी, जिसकी वजह से शहर के निचले इलाकों में करीब एक माह तक जलभराव की स्थिति थी। निचले इलाकों में लगातार पानी भरा रहने के कारण सैकड़ों मकान धराशायी हो गए थे। अब नौ वर्ष बाद जिस तरह दोनों नदियाँ रौद्र रूप धारण कर रहीं हैं, उससे निचले इलाकों में रहने वालों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि नौ वर्ष पूर्व आई बाढ़ के दौरान हजारों लोगों को लंबे समय तक अपना घर छोड़कर शिविरों में रहना पड़ा था।
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गंगा-यमुना का जलस्तर
फाफामऊ  85.47 मीटर
छतनाग     84.73 मीटर
नैनी          85.42 मीटर
(खतरे का निशान- 84.734 मीटर)
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वर्ष 2013 में नदियों का जलस्तर
फाफामऊ  86.82 मीटर
छतनाग     86.04 मीटर
नैनी          86.60 मीटर
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वर्ष 1978 में नदियों का जलस्तर
फाफामऊ  87.980 मीटर
छतनाग     88.030 मीटर
नैनी          87.990 मीटर

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