समस्याओं का निराकरण न होने से हैं नाराज
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट में आज अधिवक्ता हड़ताल पर रहे। मुकदमों के दाखिले के बाद कोर्ट में पेश करने में अनावश्यक देरी, नए मुकदमों, सप्लीमेंट्री और अनलिस्टेड मुकदमों के सूचीबद्ध न होने सहित विभिन्न समस्याओं को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं ने कड़ा विरोध जताया है। अधिवक्ताओं ने बुधवार को गेट नंबर 3 के बाहर एकत्र होकर नारेबाजी की। अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य नहीं किया और मुकदमों को सुनवाई नहीं हुई। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की बुधवार को हुई बैठक में बुधवार 24 अगस्त को न्यायिक कार्य बहिष्कार का प्रस्ताव पारित किया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता राधाकांत ओझा की अध्यक्षता में हुई कार्यकारिणी की बैठक में अधिवक्ताओं से जुड़ी समस्याओं पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक के बाद राधाकांत ओझा ने कहा कि अधिवक्ताओं की समस्याओं पर छह माह में कई बार चीफ जस्टिस व अन्य न्यायमूर्तियों के साथ वार्ता की गई पर समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। लिस्टिंग की पूरी प्रक्रिया ध्वस्त अध्यक्ष ने कहा कि मुकदमों के दाखिले में अनावश्यक रूप से 10 से 15 दिनों का समय लग रहा है। एनआईसी द्वारा संचालित लिस्टिंग की सभी प्रक्रियाएं बुरी तरह से ध्वस्त हैं। वकालतनामा, जवाबी हलफनामा भी तत्काल रिकॉर्ड पर नहीं आ पा रहा है। मुकदमों के मैसेज समय पर न आने की समस्या बनी हुई है। मुकद्दमे पैरवी न होने से खारिज हो रहे हैं। जजों के खाली पद भरने की मांग एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने न्यायमूर्तियों की घटती संख्या व खाली पदों को भरने में अनावश्यक देरी पर भी एतराज जताया। कहा कि इस समय 160 के मुकाबले 100 जस्टिस ही कार्य कर रहे हैं। पदाधिकारियों ने कहा कि खाली पदों पर तत्काल नियुक्ति की जाए। बार एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो प्रदेश व्यापी विरोध किया जाएगा। महासचिव सत्यधीर सिंह जादौन ने कहा कि समस्याओं का निदान अगर नहीं होता तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। बैठक में वरिष्ठ उपाध्यक्ष मनोज कुमार मिश्र, उपाध्यक्ष नीरज कुमार त्रिपाठी, धर्मेंद्र सिंह यादव, सत्यम पांडेय, श्यामा चरण त्रिपाठी, यादवेश यादव, आशुतोष त्रिपाठी, उष्मा मिश्रा आदि मौजूद रहे।



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