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कलयुगी भाई ने भाई को दिया धोखा

लोकमित्र ब्यूरो
झूंसी (प्रयागराज)। मुंबई से लौटे दुर्घटना में घायल भाई को रेलवे प्लेट उसका कोई भी भाई लेने नही आया। जिससे वह लाचार हालत में दिन भर प्लेट फार्म पर कराहते पड़ा रहा। जिसे सूचना पर पहंुची 108 एंबुलेंस के जरिये इलाज हेतु अस्पताल में भर्ती कराया गया। बताया जाता है कि झंूसी के योजना तीन निवासी प्रशांत सिंह 50 वर्ष पुत्र स्व0 तिलकधारी सिंह मुम्बई में एक प्राइवेट बैंक में नौकरी करता था। दो माह पूर्व मुम्बई में ही एक सड़क दुर्घटना में उसके बाएं पैर में गंभीर रूप चोट लग जाने से इलाज के दौरान पैर में सड़न पैदा हो गयी। जिससे डॉक्टरों ने उसका पैर घुटने के नीचे से काट दिया और उसका आधाअधूरा इलाज करके घर जाकर इलाज कराने का हवाला देकर अपना पल्ला झाड़ लिया। प्रशांत के रूम पार्ट्नर ने मुंबई से प्रयागराज जंक्शन पर मंगलवार को उतार कर नौ बजे रफू चक्कर हो गया। वह प्लेटफार्म नंबर नौ दस पर दिन भर पड़ा रहा। किसी ने 108 एम्बुलेंस को सूचित किया तो सूचना पर 108 एम्बुलेंस के ईएमटी संतोष भारतीया व पायलट इंद्रजीत मौके पर पहुँचे। घायल प्रशांत ने अपने भाई का मोबाइल नंबर संतोष को दिया। संतोष ने भाई से बात किया तो प्रशांत के भाई ने कहा कि मैं आकर तुम्हे पैसे देता हॅू तुम बनारस चले जाओ, तुम्हे घर आने की जरूरत नहीं है। इतना कह कर उसने अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर लिया और आया भी नहीं। संतोष ने झूंसी के हल्का दारोगा नवीन सिंह से पूरी बात बताई। दारोगा जी ने बिना देरी किये बताए गए पते पर पहुचे किंतु पता सही नहीं बता पाने के कारण घर नहीं मिला। संतोष ने जीआरपी विनोद वर्मा के साथ घायल प्रशांत को काल्विन अस्पताल में भर्ती कराया। जहाँ प्रशांत का इलाज चल रहा है। प्रशंात अपने भाइयों के करतूत से बहुत दुःखी हुआ और रोने लगा। उसने बताया कि मेरे दो भाई हाई कोर्ट प्रयागराज में वकील हैं। माता पिता की मौत हो चुकी है। वह चार भाइयों में तीसरे नंबर का है। मैंने अपनी सारी कमाई अपने भाइयों को देता रहा, आज वही भाई मेरे बुरे वक्त में मेरा साथ छोड़ दिया है। मेरे भाई मुझे इस तरह से छोड़ देंगे ऐसा मैंने सपने में भी नहीं सोचा था।
 

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लोकमित्र ब्यूरो
झूंसी (प्रयागराज)। मुंबई से लौटे दुर्घटना में घायल भाई को रेलवे प्लेट उसका कोई भी भाई लेने नही आया। जिससे वह लाचार हालत में दिन भर प्लेट फार्म पर कराहते पड़ा रहा। जिसे सूचना पर पहंुची 108 एंबुलेंस के जरिये इलाज हेतु अस्पताल में भर्ती कराया गया। बताया जाता है कि झंूसी के योजना तीन निवासी प्रशांत सिंह 50 वर्ष पुत्र स्व0 तिलकधारी सिंह मुम्बई में एक प्राइवेट बैंक में नौकरी करता था। दो माह पूर्व मुम्बई में ही एक सड़क दुर्घटना में उसके बाएं पैर में गंभीर रूप चोट लग जाने से इलाज के दौरान पैर में सड़न पैदा हो गयी। जिससे डॉक्टरों ने उसका पैर घुटने के नीचे से काट दिया और उसका आधाअधूरा इलाज करके घर जाकर इलाज कराने का हवाला देकर अपना पल्ला झाड़ लिया। प्रशांत के रूम पार्ट्नर ने मुंबई से प्रयागराज जंक्शन पर मंगलवार को उतार कर नौ बजे रफू चक्कर हो गया। वह प्लेटफार्म नंबर नौ दस पर दिन भर पड़ा रहा। किसी ने 108 एम्बुलेंस को सूचित किया तो सूचना पर 108 एम्बुलेंस के ईएमटी संतोष भारतीया व पायलट इंद्रजीत मौके पर पहुँचे। घायल प्रशांत ने अपने भाई का मोबाइल नंबर संतोष को दिया। संतोष ने भाई से बात किया तो प्रशांत के भाई ने कहा कि मैं आकर तुम्हे पैसे देता हॅू तुम बनारस चले जाओ, तुम्हे घर आने की जरूरत नहीं है। इतना कह कर उसने अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर लिया और आया भी नहीं। संतोष ने झूंसी के हल्का दारोगा नवीन सिंह से पूरी बात बताई। दारोगा जी ने बिना देरी किये बताए गए पते पर पहुचे किंतु पता सही नहीं बता पाने के कारण घर नहीं मिला। संतोष ने जीआरपी विनोद वर्मा के साथ घायल प्रशांत को काल्विन अस्पताल में भर्ती कराया। जहाँ प्रशांत का इलाज चल रहा है। प्रशंात अपने भाइयों के करतूत से बहुत दुःखी हुआ और रोने लगा। उसने बताया कि मेरे दो भाई हाई कोर्ट प्रयागराज में वकील हैं। माता पिता की मौत हो चुकी है। वह चार भाइयों में तीसरे नंबर का है। मैंने अपनी सारी कमाई अपने भाइयों को देता रहा, आज वही भाई मेरे बुरे वक्त में मेरा साथ छोड़ दिया है। मेरे भाई मुझे इस तरह से छोड़ देंगे ऐसा मैंने सपने में भी नहीं सोचा था।
 

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