कौशांबी। जिले में प्राकृतिक खेती को गांव गांव और खेत खेत तक पहुंचाने की तैयारी शुरू हो गई है। जिले के किसानों को प्राकृतिक खेती के तरीके समझाने और उन्हें प्राकृतिक खेती से जोड़ने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र के और कृषि विभाग के अधिकारी पूरे जोर-शोर से इस कार्य को प्रत्येक गांव में और जागरूकता शिविर के माध्यम से कर रहे हैं। कार्यक्रम के तहत राजकीय कृषि प्रक्षेत्र कोखराज, पर आयोजितआज करीब 50 किसानों को कृषि विभाग व कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख व प्रशिक्षक ने प्राकृतिक खेती के बारे में जागरूक करते हुए उनको बीजामृत, जीवामृत व घन जीवामृत के बारे में बताया और बनाने का विधि किसानों से किसानों से सामने बनाकर प्रयोग दिखाया । कार्यक्रम का शुभारंभ कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख डॉ अजय ने इस तकनीक के बारे में बताते हुए कहा की आज की आवश्यकता और भविष्य को कृषि व खेती से जुड़े हुए कार्यक्रम का निर्वाह करते हुए किसान बंधु इसको अपनाने हेतु जागरुक किया। इसका प्रयोग शीघ्र अति शीघ्र अपने खेतों पर करें ताकि मट्टी के साथ-साथ स्वस्थ उत्पादन, स्वस्थ पर्यावरण के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य पर भी असर दिखे । उन्होंने प्राकृतिक खेती के माध्यम से किसानों को देसी गाय व बीज के प्रयोग पर जोर दिया। प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के संवादों को दोहराते हुए इस कार्यक्रम को छोटे से भाग पर अपनाते हुए पूरे खेत पर करने का आह्वान किया। इसी क्रम में केंद्र के पशुपालन वैज्ञानिक डॉ आशीष ने देशी पशुओं से गौमूत्र व गोबर इकट्ठा करने की तरीकों पर चर्चा की और देसी नस्ल हेतु प्राकृतिक कृषि पर जानवरों को पालने की हिदायत दी । इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि प्रसार विशेषज्ञ और और मास्टर ट्रेनर डॉ अमित कुमार केसरी ने अधिकारी व कर्मचारियों के साथ प्राकृतिक कृषि करने के लिए किसानों को प्रेरित किया उन्होंने प्रशिक्षण के माध्यम से प्राकृतिक कृषि के महत्व जैसे मिट्टी की उर्वरता का संरक्षण, खेती की लागत में कमी , सकल आय में वृद्धि, मानव स्वास्थ्य की सुरक्षा, मिट्टी की नमी धारण क्षमता में वृद्धि , भूमि में कटाव की कमी, भूमि के पीएच मान का संतुलन, पर्यावरण सुरक्षा सुरक्षा एवं वीजामृत, जीवामृत, घन जीवामृत , दशपर्णी अर्क आदि बनाने का बनाने की विधि किसानों के साथ मिलकर सजीव प्रदर्शन दिखाया । प्रशिक्षण में कृषि विभाग के उप कृषि निदेशक सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
कौशांबी। जिले में प्राकृतिक खेती को गांव गांव और खेत खेत तक पहुंचाने की तैयारी शुरू हो गई है। जिले के किसानों को प्राकृतिक खेती के तरीके समझाने और उन्हें प्राकृतिक खेती से जोड़ने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र के और कृषि विभाग के अधिकारी पूरे जोर-शोर से इस कार्य को प्रत्येक गांव में और जागरूकता शिविर के माध्यम से कर रहे हैं। कार्यक्रम के तहत राजकीय कृषि प्रक्षेत्र कोखराज, पर आयोजितआज करीब 50 किसानों को कृषि विभाग व कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख व प्रशिक्षक ने प्राकृतिक खेती के बारे में जागरूक करते हुए उनको बीजामृत, जीवामृत व घन जीवामृत के बारे में बताया और बनाने का विधि किसानों से किसानों से सामने बनाकर प्रयोग दिखाया । कार्यक्रम का शुभारंभ कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख डॉ अजय ने इस तकनीक के बारे में बताते हुए कहा की आज की आवश्यकता और भविष्य को कृषि व खेती से जुड़े हुए कार्यक्रम का निर्वाह करते हुए किसान बंधु इसको अपनाने हेतु जागरुक किया। इसका प्रयोग शीघ्र अति शीघ्र अपने खेतों पर करें ताकि मट्टी के साथ-साथ स्वस्थ उत्पादन, स्वस्थ पर्यावरण के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य पर भी असर दिखे । उन्होंने प्राकृतिक खेती के माध्यम से किसानों को देसी गाय व बीज के प्रयोग पर जोर दिया। प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के संवादों को दोहराते हुए इस कार्यक्रम को छोटे से भाग पर अपनाते हुए पूरे खेत पर करने का आह्वान किया। इसी क्रम में केंद्र के पशुपालन वैज्ञानिक डॉ आशीष ने देशी पशुओं से गौमूत्र व गोबर इकट्ठा करने की तरीकों पर चर्चा की और देसी नस्ल हेतु प्राकृतिक कृषि पर जानवरों को पालने की हिदायत दी । इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि प्रसार विशेषज्ञ और और मास्टर ट्रेनर डॉ अमित कुमार केसरी ने अधिकारी व कर्मचारियों के साथ प्राकृतिक कृषि करने के लिए किसानों को प्रेरित किया उन्होंने प्रशिक्षण के माध्यम से प्राकृतिक कृषि के महत्व जैसे मिट्टी की उर्वरता का संरक्षण, खेती की लागत में कमी , सकल आय में वृद्धि, मानव स्वास्थ्य की सुरक्षा, मिट्टी की नमी धारण क्षमता में वृद्धि , भूमि में कटाव की कमी, भूमि के पीएच मान का संतुलन, पर्यावरण सुरक्षा सुरक्षा एवं वीजामृत, जीवामृत, घन जीवामृत , दशपर्णी अर्क आदि बनाने का बनाने की विधि किसानों के साथ मिलकर सजीव प्रदर्शन दिखाया । प्रशिक्षण में कृषि विभाग के उप कृषि निदेशक सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।



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