प्रतापगढ़। प्रतापगढ़ स्थित विक्रम पट्टी में भागवत कथा के द्वितीय दिवस की कथा में कथावाचक पं. शेषधर मिश्र ‘अनुरागी’ ने कहा की भागवत की कथा भक्ति ज्ञान वैराग्य की त्रिवेणी संगम है, जो इसमें स्नान करता है वह जन्म मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है। माता पार्वती को भगवान भोलेनाथ कैलाश पर्वत पर अमरकथा सुना रहे थे, तभी शुक (तोता) ने कथा छिप कर सुनी तो भगवान शंकर को क्रोध आया देख तोता व्यास पत्नी के मुख से उदर में प्रवेश कर गया, वही तोता ने शुकदेव के रुप में जन्म लिया और राजा परीक्षित को जब ऋषि पुत्र ने सातवें दिन तक्षक द्वारा काटने का श्राप दिया तब इन्हीं शुकदेवजी ने भागवत कथा सुनाई थी । प्रतापगढ़ स्थित विक्रम पट्टी में भागवत कथा के दूसरे दिन की कथा में कथाव्यास पं. शेषधर मिश्र ‘अनुरागी’ ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि भीष्म पितामह ने महाराज युधिष्ठिर को दान धर्म का उपदेश दिया।धन की सार्थकता दान करने में है। राजधर्म, स्त्री धर्म, भगवत धर्म का उपदेश दिया बाद में भीष्म पितामह ने भगवान की ओर देखा और प्रभु को निहारते-निहारते अपने प्राणों का परित्याग कर दिया। कथा वाचक ने कहा कि हमें भूल कर भी किसी पापी का साथ नहीं देना चाहिए, क्योंकि पापी का साथ देना पाप करने के बराबर ही होता है । भीष्म पितामह ने कौरवों की सभा में द्रोपती को दुशासन के द्वारा अपमानित किए जाने पर विरोध नहीं किया। यही उनका पाप था, जिसके फलस्वरूप उन्हें सर सैया पर सोना पड़ा। कथा में भजनों की प्रस्तुतियाँ श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर रही है।
🔥 ट्रेंडिंग
- उत्तरप्रदेश:प्रतापगढ़ महुली हादसा: जर्जर मकान गिरा, एक ही परिवार के 6 लोगों की मौत; 1 घायल
- टॉप न्यूज़:संभल हिंसा पर न्यायिक आयोग की रिपोर्ट विधानसभा में पेश, पूर्व नियोजित साजिश का दावा
- दिल्ली:RBI ने रेपो रेट 5.25% पर रखी बरकरार, नहीं बदलेगी मौजूदा EMI; विकास दर का अनुमान बढ़ा
- उत्तरप्रदेश:यूपी रोडवेज बसों में 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को मिलेगी मुफ्त यात्रा
- उत्तरप्रदेश:सपा का प्रतापगढ़ में धरना-प्रदर्शन: महंगाई, बेरोजगारी और बिजली संकट समेत 5 सूत्रीय मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन
- education:UP TGT PGT EXAM DATE 2026: इस दिन जारी हो सकते हैं एडमिट कार्ड
- education:UP Board 10th& 12th Result 2026: इंतजार खत्म होगा इस दिन जारी हो सकते हैं नतीजे
- आगरा:आगरा में अवैध मतांतरण मामला: विदेशी सरगना दाऊद अहमद की संपत्ति कुर्क करने की तैयारी
- उत्तरप्रदेश:प्रतापगढ़ में यातायात जागरूकता अभियान, गुलाब व माला पहनाकर लोगों को नियमों के प्रति किया गया प्रेरित
- उत्तरप्रदेश:रानीगंज पुलिस की बड़ी कार्रवाई: शादी का झूठा वादा कर दुष्कर्म का आरोपी गिरफ्तार | प्रतापगढ़ न्यूज़
- उत्तरप्रदेश:प्रतापगढ़ महुली हादसा: जर्जर मकान गिरा, एक ही परिवार के 6 लोगों की मौत; 1 घायल
- टॉप न्यूज़:संभल हिंसा पर न्यायिक आयोग की रिपोर्ट विधानसभा में पेश, पूर्व नियोजित साजिश का दावा
- दिल्ली:RBI ने रेपो रेट 5.25% पर रखी बरकरार, नहीं बदलेगी मौजूदा EMI; विकास दर का अनुमान बढ़ा
- उत्तरप्रदेश:यूपी रोडवेज बसों में 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को मिलेगी मुफ्त यात्रा
- उत्तरप्रदेश:सपा का प्रतापगढ़ में धरना-प्रदर्शन: महंगाई, बेरोजगारी और बिजली संकट समेत 5 सूत्रीय मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन
- education:UP TGT PGT EXAM DATE 2026: इस दिन जारी हो सकते हैं एडमिट कार्ड
- education:UP Board 10th& 12th Result 2026: इंतजार खत्म होगा इस दिन जारी हो सकते हैं नतीजे
- आगरा:आगरा में अवैध मतांतरण मामला: विदेशी सरगना दाऊद अहमद की संपत्ति कुर्क करने की तैयारी
- उत्तरप्रदेश:प्रतापगढ़ में यातायात जागरूकता अभियान, गुलाब व माला पहनाकर लोगों को नियमों के प्रति किया गया प्रेरित
- उत्तरप्रदेश:रानीगंज पुलिस की बड़ी कार्रवाई: शादी का झूठा वादा कर दुष्कर्म का आरोपी गिरफ्तार | प्रतापगढ़ न्यूज़
जन्म मरण के वन्धन से मुक्त कराती है भागवत
प्रतापगढ़। प्रतापगढ़ स्थित विक्रम पट्टी में भागवत कथा के द्वितीय दिवस की कथा में कथावाचक पं. शेषधर मिश्र ‘अनुरागी’ ने कहा की भागवत की कथा भक्ति ज्ञान वैराग्य की त्रिवेणी संगम है, जो इसमें स्नान करता है वह जन्म मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है। माता पार्वती को भगवान भोलेनाथ कैलाश पर्वत पर अमरकथा सुना रहे थे, तभी शुक (तोता) ने कथा छिप कर सुनी तो भगवान शंकर को क्रोध आया देख तोता व्यास पत्नी के मुख से उदर में प्रवेश कर गया, वही तोता ने शुकदेव के रुप में जन्म लिया और राजा परीक्षित को जब ऋषि पुत्र ने सातवें दिन तक्षक द्वारा काटने का श्राप दिया तब इन्हीं शुकदेवजी ने भागवत कथा सुनाई थी । प्रतापगढ़ स्थित विक्रम पट्टी में भागवत कथा के दूसरे दिन की कथा में कथाव्यास पं. शेषधर मिश्र ‘अनुरागी’ ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि भीष्म पितामह ने महाराज युधिष्ठिर को दान धर्म का उपदेश दिया।धन की सार्थकता दान करने में है। राजधर्म, स्त्री धर्म, भगवत धर्म का उपदेश दिया बाद में भीष्म पितामह ने भगवान की ओर देखा और प्रभु को निहारते-निहारते अपने प्राणों का परित्याग कर दिया। कथा वाचक ने कहा कि हमें भूल कर भी किसी पापी का साथ नहीं देना चाहिए, क्योंकि पापी का साथ देना पाप करने के बराबर ही होता है । भीष्म पितामह ने कौरवों की सभा में द्रोपती को दुशासन के द्वारा अपमानित किए जाने पर विरोध नहीं किया। यही उनका पाप था, जिसके फलस्वरूप उन्हें सर सैया पर सोना पड़ा। कथा में भजनों की प्रस्तुतियाँ श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर रही है।



उत्तरप्रदेश








शेयर करें













































































