प्रतापगढ़ (ब्यूरो)। गर्मी का असर बढ़ने के साथ ही जहां तरह तरह की बीमारियों को प्रकोप शुरू हो गया है। वही ग्रामीण इलाके के लोग अभी से ही चिन्तित होने लगे है। इनकी सबसे बड़ी चिन्ता गर्मी से होने वाले रोगो को लेकर है। वही दूसरी चिन्ता यह है कि अब नीम हकीमो की भरमार हो जाएगी। उधर ग्रामीण क्षेत्रो की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह बदहाल है। इससे नीम हकीमो के हौसले बुलंद है।
गर्मी का प्रकोप बढ़ने के साथ ही संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। उधर ग्रामीण क्षेत्रो में नीम हकीमो की दुकाने अभी से ही सजने लगी है। हालांकि उनके पास कोई डिग्री भी नहीं होती। इसके बावजूद इनकी दुकान पर लम्बा चैड़ा बोर्ड लगा रहता है। इसमे कई रोगो का उपचार करने का भी जिक्र रहता है। गांव की गरीब जनता शहर के पचड़े में नहीं पड़ता चाहती। ऐसे में वह लोग इन्ही नीम हकीमो की शरण में पहुंच जाते है। जबकि सभी रोगो के लिए इनका उपचार एक जैसा ही होता है। ग्रामीणो का कहना है कि गर्मी पड़ने पर अधिकांश सीएचसी एवं पीएचसी में डाक्टर अनुपस्थित रहते हैं इससे ग्रामीणो की दिक्कत अधिक बढ़ जाती है। इसी मौके का फायदा ही नीम हकीम उठाते है। इस समय ग्रामीण क्षेत्रो की अधिकांश बाजारो में नीम हकीमो की दुकाने सज गई है। बताया जाता है कि कुछ नीम हकीम आयुर्वेद की डिग्री लेकर मरीजो को सभी प्रकार की दवाइयां देते है। हालांकि सरकारी महकमे की ओर से कभी कभी इनके खिलाफ अभियान भी चलाया जाता है। इसके बावजूद इन पर लगाम नहीं कसा जा सकता है। ग्रामीणो का आरोप है कि जांच के दौरान लेन देन करके कार्रवाई बंद कर दी जाती है। यदि इस पर कायदे से अमल हो तो नीम हकीमो पर अंकुश लग सकता है।
प्रतापगढ़ (ब्यूरो)। गर्मी का असर बढ़ने के साथ ही जहां तरह तरह की बीमारियों को प्रकोप शुरू हो गया है। वही ग्रामीण इलाके के लोग अभी से ही चिन्तित होने लगे है। इनकी सबसे बड़ी चिन्ता गर्मी से होने वाले रोगो को लेकर है। वही दूसरी चिन्ता यह है कि अब नीम हकीमो की भरमार हो जाएगी। उधर ग्रामीण क्षेत्रो की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह बदहाल है। इससे नीम हकीमो के हौसले बुलंद है।
गर्मी का प्रकोप बढ़ने के साथ ही संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। उधर ग्रामीण क्षेत्रो में नीम हकीमो की दुकाने अभी से ही सजने लगी है। हालांकि उनके पास कोई डिग्री भी नहीं होती। इसके बावजूद इनकी दुकान पर लम्बा चैड़ा बोर्ड लगा रहता है। इसमे कई रोगो का उपचार करने का भी जिक्र रहता है। गांव की गरीब जनता शहर के पचड़े में नहीं पड़ता चाहती। ऐसे में वह लोग इन्ही नीम हकीमो की शरण में पहुंच जाते है। जबकि सभी रोगो के लिए इनका उपचार एक जैसा ही होता है। ग्रामीणो का कहना है कि गर्मी पड़ने पर अधिकांश सीएचसी एवं पीएचसी में डाक्टर अनुपस्थित रहते हैं इससे ग्रामीणो की दिक्कत अधिक बढ़ जाती है। इसी मौके का फायदा ही नीम हकीम उठाते है। इस समय ग्रामीण क्षेत्रो की अधिकांश बाजारो में नीम हकीमो की दुकाने सज गई है। बताया जाता है कि कुछ नीम हकीम आयुर्वेद की डिग्री लेकर मरीजो को सभी प्रकार की दवाइयां देते है। हालांकि सरकारी महकमे की ओर से कभी कभी इनके खिलाफ अभियान भी चलाया जाता है। इसके बावजूद इन पर लगाम नहीं कसा जा सकता है। ग्रामीणो का आरोप है कि जांच के दौरान लेन देन करके कार्रवाई बंद कर दी जाती है। यदि इस पर कायदे से अमल हो तो नीम हकीमो पर अंकुश लग सकता है।



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