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होली नजदीक, खरीददारो से बाजारो की बढ़ी रौनक

गुझिया, गुलाल और रंग बिरंगी पिचकारी की धूम
प्रतापगढ़ (ब्यूरो)। दुश्मनी को दोस्ती में बदलने वाला रंगो का त्योहार होली अब नजदीक है। इससे शहरी व ग्रामीण अचंलो की बाजारो में रंग अबीर खोवा, मेवा के साथ ही रंग बिरंगी पिचकारियो की दुकाने सज गई है। इसके अलावा विभिन्न प्रकार के पापड़, चुर्री व कचरी की दुकाने भी सजी है। वही घरो में महिलाओ ने भी आलू के चिप्स व पापड़ आदि बना लिया है तथा गुझिया बनाने की तैयारी कर रही है। साथ ही घरो की साफ सफाई भी शुरू हो गई है। होली मनाने के सम्बंध में प्रचलित कथा के अनुसार ऋषि कश्यप का पुत्र हिरण्यकश्यप बहुत ही शक्तिशाली था। अपने तय बल से उसने भगवान इन्द्र को पराजित करके स्वर्गलोक में अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया था। उसे अपने बल का इतना अहंकार हो गया था कि वह स्वयं को ईश्वर मानते हुए जनता से अपनी पूजा करवाने लगा था। जो उसकी पूजा नहीं करता था उसे वह प्रताड़ित करता था। उसका पुत्र प्रहलाद नारायण भगवान का भक्त था। उससे कुपित हिरण्यकश्यप पुत्र प्रहलाद को तरह तरह की यातनाएं देता था। प्रहलाद की बुआ का नाम होलिका था। जिसे आग से नहीं जलने का वरदान मिला था। हिरण्यकश्यप की आज्ञा से फाल्गुन मास की पूर्णमासी की रात होलिका चिता सजाकर उसमें प्रहलाद को लेकर वह बैठ गई। नारायण हरि की कृपा से होलिका उसमें जलकर राख हो गई तथा भक्त प्रहलाद को कुछ नहीं हुआ। तभी से फागुन माह की पूर्णमासी पर होलिका दहन की परम्परा प्रचलित है। इसके दूसरे दिन लोग एक दूसरे को रंग अबीर लगाकर सारे गिले शिकवे भूलकर गले मिलते थे। साथ ही दोस्ती की ओर हाथ बढ़ाते थे। इसके अलावा एक दूसरे के घर गुझिया, पापड़ खाने के साथ ही ठंडाई पीते हैं फिल्मो के कुछ गीत भी यही दर्शाते है। होली के दिन खिल जाते है, रंगो में रंग मिल जाते है… रंग बरसे भीगे चुनर वाली… आदि गीतो से होली का स्वरूप स्वयं परिलक्षित होता है। अब होली का स्वरूप पूरी तरह बदल गया है। रंग अबीर का स्थान केमिकल युक्त रंग कांच युक्त अबीर, कीचड़ जला मोबिल आदि ने ले लिया है। इसे शरीर पर पड़ने से व्यक्ति तमाम तरह के त्वचा रोग से ग्रतिस हो जाता है। ठंडई का स्थान शराब ने ले लिया है। इससे होली का त्योहार कभी कभी बदरंग भी हो जाता है। वही होली का त्योहार नजदीक होने के कारण शहर व ग्रामीण क्षेत्रो के बाजारो में मिठाई की दुकानो में चहल पहल बढ़ गया है। वही विभिन्न सामग्रियो की दुकाने सज गई है।

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गुझिया, गुलाल और रंग बिरंगी पिचकारी की धूम
प्रतापगढ़ (ब्यूरो)। दुश्मनी को दोस्ती में बदलने वाला रंगो का त्योहार होली अब नजदीक है। इससे शहरी व ग्रामीण अचंलो की बाजारो में रंग अबीर खोवा, मेवा के साथ ही रंग बिरंगी पिचकारियो की दुकाने सज गई है। इसके अलावा विभिन्न प्रकार के पापड़, चुर्री व कचरी की दुकाने भी सजी है। वही घरो में महिलाओ ने भी आलू के चिप्स व पापड़ आदि बना लिया है तथा गुझिया बनाने की तैयारी कर रही है। साथ ही घरो की साफ सफाई भी शुरू हो गई है। होली मनाने के सम्बंध में प्रचलित कथा के अनुसार ऋषि कश्यप का पुत्र हिरण्यकश्यप बहुत ही शक्तिशाली था। अपने तय बल से उसने भगवान इन्द्र को पराजित करके स्वर्गलोक में अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया था। उसे अपने बल का इतना अहंकार हो गया था कि वह स्वयं को ईश्वर मानते हुए जनता से अपनी पूजा करवाने लगा था। जो उसकी पूजा नहीं करता था उसे वह प्रताड़ित करता था। उसका पुत्र प्रहलाद नारायण भगवान का भक्त था। उससे कुपित हिरण्यकश्यप पुत्र प्रहलाद को तरह तरह की यातनाएं देता था। प्रहलाद की बुआ का नाम होलिका था। जिसे आग से नहीं जलने का वरदान मिला था। हिरण्यकश्यप की आज्ञा से फाल्गुन मास की पूर्णमासी की रात होलिका चिता सजाकर उसमें प्रहलाद को लेकर वह बैठ गई। नारायण हरि की कृपा से होलिका उसमें जलकर राख हो गई तथा भक्त प्रहलाद को कुछ नहीं हुआ। तभी से फागुन माह की पूर्णमासी पर होलिका दहन की परम्परा प्रचलित है। इसके दूसरे दिन लोग एक दूसरे को रंग अबीर लगाकर सारे गिले शिकवे भूलकर गले मिलते थे। साथ ही दोस्ती की ओर हाथ बढ़ाते थे। इसके अलावा एक दूसरे के घर गुझिया, पापड़ खाने के साथ ही ठंडाई पीते हैं फिल्मो के कुछ गीत भी यही दर्शाते है। होली के दिन खिल जाते है, रंगो में रंग मिल जाते है… रंग बरसे भीगे चुनर वाली… आदि गीतो से होली का स्वरूप स्वयं परिलक्षित होता है। अब होली का स्वरूप पूरी तरह बदल गया है। रंग अबीर का स्थान केमिकल युक्त रंग कांच युक्त अबीर, कीचड़ जला मोबिल आदि ने ले लिया है। इसे शरीर पर पड़ने से व्यक्ति तमाम तरह के त्वचा रोग से ग्रतिस हो जाता है। ठंडई का स्थान शराब ने ले लिया है। इससे होली का त्योहार कभी कभी बदरंग भी हो जाता है। वही होली का त्योहार नजदीक होने के कारण शहर व ग्रामीण क्षेत्रो के बाजारो में मिठाई की दुकानो में चहल पहल बढ़ गया है। वही विभिन्न सामग्रियो की दुकाने सज गई है।

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