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यूक्रेन से लौटे छात्र ने कहा-भारतीय ध्वज किसी सुरक्षा कवच से कम नहीं

सलोन रायबरेली।  यूक्रेन से सलोन लौटे अंशदीप ने बताया कि इस वक्त के हालातों में भारतीय ध्वज किसी सुरक्षा कवच से कम नही है।ऐसे में चाहे पाकिस्तान के छात्र हो या फिर कोई और देश, वह तिरंगे की छांव में अपने मुल्क लौटने की कोशिश में लगा हुआ है।सलोन नगर के व्यापारी गुरुचरण सिंह उर्फ राजू सरदार का लड़का अंशदीप सिंह को भारत सरकार ने सचिवालय की गाड़ी से उसके घर छोड़ा है।वही अपने बेटे को सुरक्षित पाकर परिजन खुशी से झूम रहे है।अंशदीप ने मीडिया को बताया कि इस समय यूक्रेन के हालत बहुत खराब है।लेकिन सबसे अच्छी बात है की पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के साथ अन्य मुल्क के मेडिकल छात्र भारतीय ध्वज लेकर यूक्रेन से अलग अलग बार्डर पहुँचकर अपने आप को इंडियन बता रहे है।अंशदीप मेडिकल की पढ़ाई के लिए यूक्रेन के लवीव नेशनल मेडिकल यूनिवसिर्टी में पढ़ाई करने गया था।यूक्रेन और रूस में युद्ध शुरू हुआ तो अंशदीप ने लवीव से बस लेकर उजहगोरोड पहुचे।और एक दिन रुक कर हंग्री बार्डर पहुँचे।यहां से एयर इंडिया के विमान से अंशदीप मुम्बई पहुँचा।और फिर यूपी गवर्मेंट की सहायता से लखनऊ पहुँचा।योगी सरकार के कर्मचारियों ने खाना खिलाने के बाद सचिवालय की गाड़ी से उसे शुक्रवार की रात्रि बारह बजकर पचास मिनट पर घर छोड़ा है।अंशदीप  ने बताया कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वजह से वह आज सही सलामत अपने माता पिता के पास मौजूद है।उन्ही की वजह से हंग्री से लेकर उसके घर तक उसे निशुल्क सारी सुविधा मिल सकी।अंशदीप की माँ दलजीत कौर और पिता गुरुचरण सिंह ने मोदी सरकार को धन्यवाद दिया है।दलजीत ने कहा कि टीवी पर युद्ध की भयावह तश्वीर देखकर बेटे के लिए मन व्याकुल हो उठता था।लेकिन भारत सरकार की विदेश कूटनीति से आज उनका बेटा हस्ते मुस्कुराते अपने घर पहुँच गया है।

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सलोन रायबरेली।  यूक्रेन से सलोन लौटे अंशदीप ने बताया कि इस वक्त के हालातों में भारतीय ध्वज किसी सुरक्षा कवच से कम नही है।ऐसे में चाहे पाकिस्तान के छात्र हो या फिर कोई और देश, वह तिरंगे की छांव में अपने मुल्क लौटने की कोशिश में लगा हुआ है।सलोन नगर के व्यापारी गुरुचरण सिंह उर्फ राजू सरदार का लड़का अंशदीप सिंह को भारत सरकार ने सचिवालय की गाड़ी से उसके घर छोड़ा है।वही अपने बेटे को सुरक्षित पाकर परिजन खुशी से झूम रहे है।अंशदीप ने मीडिया को बताया कि इस समय यूक्रेन के हालत बहुत खराब है।लेकिन सबसे अच्छी बात है की पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के साथ अन्य मुल्क के मेडिकल छात्र भारतीय ध्वज लेकर यूक्रेन से अलग अलग बार्डर पहुँचकर अपने आप को इंडियन बता रहे है।अंशदीप मेडिकल की पढ़ाई के लिए यूक्रेन के लवीव नेशनल मेडिकल यूनिवसिर्टी में पढ़ाई करने गया था।यूक्रेन और रूस में युद्ध शुरू हुआ तो अंशदीप ने लवीव से बस लेकर उजहगोरोड पहुचे।और एक दिन रुक कर हंग्री बार्डर पहुँचे।यहां से एयर इंडिया के विमान से अंशदीप मुम्बई पहुँचा।और फिर यूपी गवर्मेंट की सहायता से लखनऊ पहुँचा।योगी सरकार के कर्मचारियों ने खाना खिलाने के बाद सचिवालय की गाड़ी से उसे शुक्रवार की रात्रि बारह बजकर पचास मिनट पर घर छोड़ा है।अंशदीप  ने बताया कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वजह से वह आज सही सलामत अपने माता पिता के पास मौजूद है।उन्ही की वजह से हंग्री से लेकर उसके घर तक उसे निशुल्क सारी सुविधा मिल सकी।अंशदीप की माँ दलजीत कौर और पिता गुरुचरण सिंह ने मोदी सरकार को धन्यवाद दिया है।दलजीत ने कहा कि टीवी पर युद्ध की भयावह तश्वीर देखकर बेटे के लिए मन व्याकुल हो उठता था।लेकिन भारत सरकार की विदेश कूटनीति से आज उनका बेटा हस्ते मुस्कुराते अपने घर पहुँच गया है।

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