1991 से लेकर 2012 तक भाजपा का लहराया परचम 2012 में तेज नारायण पांडेय ने भाजपा का किला ढहाया , फिर 2017 में हुई भाजपा की वापसी
योगी के प्रत्याशी होने की संभावना से उत्साह से लबरेज है अयोध्या
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अयोध्या। राम मंदिर आंदोलन के बाद से ‘ अयोध्या ‘ भाजपा का सुरक्षित गढ़ बन गयी है। अयोध्या विधानसभा क्षेत्र के अन्तर्गत रामजन्मभूमि शामिल है। इसके कारण इस सीट पर रामलला का भी खासा प्रभाव है। यह तथ्य बीते चुनावों के नतीजों से ही स्पष्ट है। मंदिर आंदोलन नब्बे के दशक में प्रभावी हुआ और इसके बाद 1991 में उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव हुआ। इस चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी लल्लू सिंह विजयी हुए। इसके बाद उनके पांव अंगद की तरह जम गये।लगातार पांच बार यहां से विधानसभा का प्रतिनिधित्व करते रहे। वर्ष 2012 में हुए चुनाव के दौरान भाजपा को पटखनी देने की योजना उच्च स्तर पर बनाई गयी। उन्होंने अलग-अलग कई गोपनीय मीटिंग की। इसके बाद निर्दल प्रत्याशी के रुप में गुलशन बिंदु को मैदान में उतारा। भाजपा विधायक लल्लू सिंह ने विपक्ष की इस योजना की जानकारी पार्टी नेतृत्व तक पहुंचाई भी लेकिन तब मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। सभी किन्नर प्रत्याशी को हल्का मानते रहे लेकिन परिणाम जब आया तो लोग भौच्चके थे। किन्नर प्रत्याशी को अयोध्या-फैजाबाद के जुड़वा शहर में करीब 20 हजार मत मिले। यही नहीं वह शहरी क्षेत्र के आधा दर्जन बूथों पर सबसे आगे भी दिखाई पड़ी। शहरी मतदाताओं के इन्हीं मत विभाजन के कारण सपा प्रत्याशी तेजनारायण पाण्डेय पवन करीब पांच हजार मतों से चुनाव जीत गये ।लेकिन उनके जीत की खुशी 2017 के चुनाव में कायम नहीं रह पायी। इस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी वेद प्रकाश गुप्त करीब सवा लाख मत पाकर जनपद के पाचों विधान सभा में अन्य जीते लोगों मे सबसे बड़े अंतराल से विजयी हुए। इसके पहले 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने पांच बार के विधायक लल्लू सिंह को प्रत्याशी बनाया और वह पांच लाख से अधिक मत पाकर विजयी हुए थे। वहीं 2019 के लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने विजयश्री हासिल की। पुन: विधानसभा के चुनाव घोषित हो गये है और यहां पांचवें चरण में 27 फरवरी को मतदान होना है । लेकिन समीकरण के नजरिए से देखें तो बहुत अंतर नहीं आया है। फिर युवा मतदाताओं की संख्या में खासा इजाफा हुआ। युवा मतदाताओं की बढ़ोत्तरी का लाभ कौन उठाएगा, यह तो आने वाला समय ही बता सकेगा। वैसे तो इस बार के चुनाव में सभी राजनीतिक पार्टियां ब्राह्मण वोटों को साथ लेकर अपनी जीत का हिसाब लगा रहें है इसपर भाजपा ने सभी पार्टियों को तगड़ा झटका उस समय दिया जब अयोध्या विधानसभा से स्वयं यूपी के निवर्तमान सीएम आदित्यनाथ योगी को प्रत्याशी उतार रहीं जिससे अब अन्य राजनीतिक पार्टियां यह नहीं समझ पा रही है कि अब वह किसे अयोध्या विधानसभा से प्रत्याशी बनाये जो योगी को टक्कर दे सके।फिलहाल मुख्यमंत्री योगी के प्रत्याशी बनने से भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह भर गया। तो वहीं विपक्षी पार्टी सपा को सोचने पर मजबूर होना पड़ रहा है कि योगी के विरूद्ध किस नेता को विधानसभा की बागडौर सौंपी जाये उधर सपा के पूर्व मंत्री व अखिलेश यादव के करीबी माने जानेवाले तेजनारायण पांडेय पवन पिछले पांच वर्षों से चुनाव की तैयारी में जुटे है।



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