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1 जनवरी से नहीं मिलेगी प्रोविज़नल इनपुट टैक्स क्रेडिट

प्रयागराज। कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र गोयल ने बताया कि 21 दिसम्बर को एक नोटिफिकेशन के माध्यम से जीएसटी के अंदर मिलने वाली 5% के प्रोविशनल इनपुट टैक्स क्रेडिट 1 जनवरी से  समाप्त कर दिया है। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं कस्टम विभाग द्वारा फाइनेंस अधिनियम 2021 में संशोधन करते हुए धारा 108, 109, तथा 113 से 122 को १ जनवरी से लागू कर दिया है।  साथ ही सीजीएसटी अधिनियम की धारा 16 में संशोधन करते उपनियम ए के स्थान पर एए कर दिया गया है।
अभी तक व्यापारी को खरीदे माल पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ जीएसटीआर 2बी के आधार पर मिलता था।  यदि किसी सप्लायर (विक्रेता) ने अपना जीएसटीआर 1 दाखिल ना किया हो तो  जीएसटीआर 2 बी में दिखने वाली आईटीसी के 5% को प्रोविशन आईटीसी के रूप में वह ले सकता था।  किन्तु ने बदलाव में अब केवल जीएसटीआर 2बी में दिखने वाली आईटीसी का लाभ ही मिलेगा।  यदि किसी सप्लायर (विक्रेता) ने अपना बिल अपलोड नहीं किया है तो उस बिल के टैक्स का इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिलेगा, यह इनपुट टैक्स क्रेडिट तभी मिलेगा जब सप्लायर (विक्रेता) अपना बिल पोर्टल पर अपलोड कर देता है। प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र गोयल ने कहा कि यह न्याय के नैसर्गिक सिद्धांत के विरुद्ध है। यदि कोई सप्लायर (विक्रेता) अपना बिल पोर्टल पर अपलोड ना करे तो उसका दंड खरीददार को दिया जाना एकदम गलत है।  विभाग के पास हर व्यापारी के बैंक आदि की डिटेल है तो फिर खरीददार को दंड देना एकदम गलत है।  उन्होंने कहाकि जब व्यापारी विभाग को ऐसे खरीद का टैक्स जमा कर देगा और अगले माह सप्लायर (विक्रेता) ने बिल पोर्टल पर अपलोड कर दिया तो क्या विभाग उस टैक्स को क्रेडिट लेजर से समायोजित करने की जगह  व्यापारी के बैंक खाते में हस्तांतरित करेगा।  उन्होंने आगे कहा कि जब यह नियम आया था तब 20% प्रोविशनल इनपुट टैक्स लेने को कहा गया था बाद में इसे 10% और 5% कर दिया गया।  महेन्द्र गोयल ने कहाकि तब भी इसका उन्होंने हर सरकारी और गैर सरकारी मंचों पर विरोध किया था और कहा था कि आने वाले समय में सरकार इस प्रोविजनल इनपुट टैक्स क्रेडिट को समाप्त कर देगी, और वही हुआ।

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प्रयागराज। कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र गोयल ने बताया कि 21 दिसम्बर को एक नोटिफिकेशन के माध्यम से जीएसटी के अंदर मिलने वाली 5% के प्रोविशनल इनपुट टैक्स क्रेडिट 1 जनवरी से  समाप्त कर दिया है। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं कस्टम विभाग द्वारा फाइनेंस अधिनियम 2021 में संशोधन करते हुए धारा 108, 109, तथा 113 से 122 को १ जनवरी से लागू कर दिया है।  साथ ही सीजीएसटी अधिनियम की धारा 16 में संशोधन करते उपनियम ए के स्थान पर एए कर दिया गया है।
अभी तक व्यापारी को खरीदे माल पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ जीएसटीआर 2बी के आधार पर मिलता था।  यदि किसी सप्लायर (विक्रेता) ने अपना जीएसटीआर 1 दाखिल ना किया हो तो  जीएसटीआर 2 बी में दिखने वाली आईटीसी के 5% को प्रोविशन आईटीसी के रूप में वह ले सकता था।  किन्तु ने बदलाव में अब केवल जीएसटीआर 2बी में दिखने वाली आईटीसी का लाभ ही मिलेगा।  यदि किसी सप्लायर (विक्रेता) ने अपना बिल अपलोड नहीं किया है तो उस बिल के टैक्स का इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिलेगा, यह इनपुट टैक्स क्रेडिट तभी मिलेगा जब सप्लायर (विक्रेता) अपना बिल पोर्टल पर अपलोड कर देता है। प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र गोयल ने कहा कि यह न्याय के नैसर्गिक सिद्धांत के विरुद्ध है। यदि कोई सप्लायर (विक्रेता) अपना बिल पोर्टल पर अपलोड ना करे तो उसका दंड खरीददार को दिया जाना एकदम गलत है।  विभाग के पास हर व्यापारी के बैंक आदि की डिटेल है तो फिर खरीददार को दंड देना एकदम गलत है।  उन्होंने कहाकि जब व्यापारी विभाग को ऐसे खरीद का टैक्स जमा कर देगा और अगले माह सप्लायर (विक्रेता) ने बिल पोर्टल पर अपलोड कर दिया तो क्या विभाग उस टैक्स को क्रेडिट लेजर से समायोजित करने की जगह  व्यापारी के बैंक खाते में हस्तांतरित करेगा।  उन्होंने आगे कहा कि जब यह नियम आया था तब 20% प्रोविशनल इनपुट टैक्स लेने को कहा गया था बाद में इसे 10% और 5% कर दिया गया।  महेन्द्र गोयल ने कहाकि तब भी इसका उन्होंने हर सरकारी और गैर सरकारी मंचों पर विरोध किया था और कहा था कि आने वाले समय में सरकार इस प्रोविजनल इनपुट टैक्स क्रेडिट को समाप्त कर देगी, और वही हुआ।

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