मैं रामायण हूँ दिल से मुझको पढ़ करो “
प्रतापगढ़ । भारतीय इतिहास संकलन समिति के संयुक्त तत्वावधान में एक सरस काव्य गोष्ठी का आयोजन शिशिर खरे के अष्टभुजा नगर स्थित आवास पर आयोजित किया गया। काव्य गोष्ठी में राजमूर्ती सिंह सौरभ मुख्य अतिथि थे तथा अध्यक्षता सुखदेव तिवारी ने की। कार्यक्रम का प्रारम्भ माँ सरस्वती की मूर्ति पर माल्यार्पण के उपरांत शिशिर खरे, संगीतज्ञ एवं समाजसेवी, अवकाश प्राप्त वरिष्ठ प्रबंधक बडौदा यू पी बैंक द्वारा स्वागत उदबोधन के साथ किया गया।
आमंत्रित कवियों में संस्कार भारती के संरक्षक सत्येंद्र नाथ मिश्र मृदुल ने माँ वीणा वादिनी तथा संस्कार गीत का सस्वर पाठ किया। श्याम शंकर शुक्ल श्याम ने ‘मैं रामायण हूँ दिल से मुझको पढ़ा करो’ जीवंत रचना पढ़ी। डा. राजेन्द्र राज की रचना ‘जब तलक तस्वीर बनती चेहरा बदलकर आ गया, देखकर इन्सान की फितरत आइना शरमा गया’ ने श्रोताओं को स्तब्ध किया। ओज के सिद्ध हस्त कवि अंजनी अमोघ की रचना ‘जिसकी कीर्ति गाथा गायी जाती विश्व में उनकी वंदना में शब्द फूल लेकर आये हैं’ ने राष्ट्र के प्रति समर्पित मसीहाओं को नमन किया। गोष्ठी के कुशल संचालक अनूप अनुपम की विभिन्न रचनाओं में ‘जमींदार के लरकन के हम पान लगावत देखे बाटी’ ने भरपूर तालियां बटोरी। नागेन्द्र अनुज की रचना ‘सच का साथ निभाये कौन कौन चले अंगारों पर, देख अकेला जुगनू भी भारी है अँधियारे पर’ ने गोष्ठी को एक मुकाम दिया। सुनील प्रभाकर की कविता ‘कहते कहते भी इतना कहना बाकी है, रहते रहते भी इतना रहना बाकी है’ ने जीवन के आध्यात्मिक पहलू से रुबरु कराया। प्रीति अनिल पांडेय की सस्वर प्रस्तुति ‘मनगढ़ सी हूँ अनगढ़, सई नदी का नीर हूँ, उन्मत्त सी हूँ ना लकीर की फकीर हूँ’ ने गोष्ठी में कृष्णावतार की अनुभूति करायी। सुरेश सम्भव की सृजनात्मक रचना ने गोष्ठी को यादगार बनाने में योगदान दिया। इस अवसर पर नवोदित कवि सत्यम शार्दूल, डा. गौरव त्रिपाठी, वेद व्यास मिश्र, शिवांग खरे को विशेष तालियाँ मिली। इस गोष्ठी में शहर के तमाम सम्मानित बुद्धिजीवी साहित्य प्रेमी सहित सन्तोष भगवन, शरद केसरवानी, पूनम अश्वनी केसरवानी, कविता केसरवानी, नलिनी थियोफिलस, डा. उषा त्रिपाठी, उदय भानु सिंह, राजेश पांडेय, इंजी. संजय सिंह, विनोद श्रीवास्तव, डी सी मिश्रा, सुनीता वीरेंद्र श्रीवास्तव, संजय खरे, जी एस पान्डे, गिरजा शंकर मिश्र, बीना सिंह, पूनम केसरवानी, रवि प्रताप सिंह, सन्तोष मिश्र, डा. बृज भानु सिंह जी, अनूप श्रीवास्तव, आनंद केसरवानी, सुनिधि राहुल खंडेलवाल, उत्कर्ष खरे, विनोद त्रिपाठी, विकास आनंद की उपस्थिति उल्लेखनीय थी। गोष्ठी के अंत में डा. पियूष कान्त शर्मा ने इस अवसर के प्रायोजक स्टार इंडिया फाऊंडेशन की निदेशक सुमन शिशिर खरे के प्रति आभार व्यक्त करते हुए सभी कवियों तथा श्रोताओं को साहित्य जगत के विस्तार में योगदान के प्रति धन्यवाद ज्ञपित किया।



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