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छठ पूजन आज, तैयारी में जुटी रही महिलाएं

पुत्रो के सुख की कामना से माताएं रखेंगी व्रत

प्रतापगढ़ (ब्यूरो)। पुत्रो के सुख व समृद्धि के लिए भादो माह में छठ माता के पूजन अर्चन की परम्परा प्राचीन काल से चली आ रही है। अपने जिगर के टुकड़ो को सभी बाधाओ से दूर रखने की कामना से माताएं कल शनिवार को छठ माता का व्रत रखेगी। साथ ही विधि विधान के साथ छठ माता की पूजा अर्चना करेंगी। बताते चले कि छठ माता के व्रत का पर्व वैसे तो लगभग हर प्रान्त में मनाया जाता है। वही उत्तर प्रदेश के निवासियो में इस त्योहार के प्रति लोगो में अधिक आस्था है। देखा जाय तो अन्य व्रतो की तरह इस व्रत में भी पूजन अर्चन किया जाता है। हालांकि इस व्रत के नियम व तरीके अलग है। पूजन के दिन जोते बोए स्थान पर जाने की मनाही होती है। व्रती महिलाएं इस दिन सिर्फ भैस के दूध तथा उससे बने पदार्थो का सेवन करती है। इस में गांय के दूध तथा जोते बोए पदार्थ का सेवन नहीं करती है। इस व्रत में महिलाएं फलाहार के रूप में तिन्नी के चावल का इस्तेमाल करती है। व्रत के दिन जोते बोए स्थान पर न जाने के कारण महिलाएं इसकी तैयारी एक दिन पहले ही पूरा कर लेती है। इसी के चलते ललही छठ की पूर्व संध्या पर बाजारो में महिलाओ की अधिक भीड़ दिखाई पड़ी। आज मिट्टी के बर्तन की दुकाने रोशन रही। छठ माता के पूजन में इस्तेमाल होने वाली सामग्री ढाक की टहनी, कुश, तिन्नी, का चावल सिंघाड़ा एवं कलश आदि की खूब खरीददारी की गई। व्रत में भुंजे दाने का भी इस्तेमाल होता है। इसलिए आज भार तथा दाना भूनने वालो के यहां भीड़ लगी रही। घरो में खुले स्थान पर गड्ढा खोदकर तथा उसमें पानी डालकर तालाब का स्वरूप दिया गया। उसे छठ माता का रूप मानकर कल शनिवार को पूजन किया जाएगा। पूजन के बाद गड्ढे के जल को बच्चो के ऊपर छिड़ककर उनके सुख व समृद्धि की कामना की जाएगी। महुआ, गुड़ व तिल से प्रसाद की तैयारी पहले से ही कर ली गई है। उसे पूजन के बाद घर के सदस्यो एवं पड़ोसियो को भी वितरित किया जाएगा।

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पुत्रो के सुख की कामना से माताएं रखेंगी व्रत

प्रतापगढ़ (ब्यूरो)। पुत्रो के सुख व समृद्धि के लिए भादो माह में छठ माता के पूजन अर्चन की परम्परा प्राचीन काल से चली आ रही है। अपने जिगर के टुकड़ो को सभी बाधाओ से दूर रखने की कामना से माताएं कल शनिवार को छठ माता का व्रत रखेगी। साथ ही विधि विधान के साथ छठ माता की पूजा अर्चना करेंगी। बताते चले कि छठ माता के व्रत का पर्व वैसे तो लगभग हर प्रान्त में मनाया जाता है। वही उत्तर प्रदेश के निवासियो में इस त्योहार के प्रति लोगो में अधिक आस्था है। देखा जाय तो अन्य व्रतो की तरह इस व्रत में भी पूजन अर्चन किया जाता है। हालांकि इस व्रत के नियम व तरीके अलग है। पूजन के दिन जोते बोए स्थान पर जाने की मनाही होती है। व्रती महिलाएं इस दिन सिर्फ भैस के दूध तथा उससे बने पदार्थो का सेवन करती है। इस में गांय के दूध तथा जोते बोए पदार्थ का सेवन नहीं करती है। इस व्रत में महिलाएं फलाहार के रूप में तिन्नी के चावल का इस्तेमाल करती है। व्रत के दिन जोते बोए स्थान पर न जाने के कारण महिलाएं इसकी तैयारी एक दिन पहले ही पूरा कर लेती है। इसी के चलते ललही छठ की पूर्व संध्या पर बाजारो में महिलाओ की अधिक भीड़ दिखाई पड़ी। आज मिट्टी के बर्तन की दुकाने रोशन रही। छठ माता के पूजन में इस्तेमाल होने वाली सामग्री ढाक की टहनी, कुश, तिन्नी, का चावल सिंघाड़ा एवं कलश आदि की खूब खरीददारी की गई। व्रत में भुंजे दाने का भी इस्तेमाल होता है। इसलिए आज भार तथा दाना भूनने वालो के यहां भीड़ लगी रही। घरो में खुले स्थान पर गड्ढा खोदकर तथा उसमें पानी डालकर तालाब का स्वरूप दिया गया। उसे छठ माता का रूप मानकर कल शनिवार को पूजन किया जाएगा। पूजन के बाद गड्ढे के जल को बच्चो के ऊपर छिड़ककर उनके सुख व समृद्धि की कामना की जाएगी। महुआ, गुड़ व तिल से प्रसाद की तैयारी पहले से ही कर ली गई है। उसे पूजन के बाद घर के सदस्यो एवं पड़ोसियो को भी वितरित किया जाएगा।

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