अवैध खनन के नाम पर पुलिस भी लेती है हफ्ता,
कटरा गुलाब सिंह,प्रतापगढ़। गांव के श्रमिकों को सौ दिन का रोजगार देने वाली मनरेगा (योजना) अब क्षेत्र के जेसीबी ठेकेदारों को रोजगार देने की योजना बन कर रह गई है।इसमें भुगतान मजदूरों के बैंक खाते में होता है और ग्राम प्रधान व उसके विश्वसनीय मजदूरों को बिना काम किए पैसा मिल जाता है। इस तरह मनरेगा के अंतर्गत लाखों रुपए का सुनियोजित घोटाला किया जा रहा है जिसमें ग्राम प्रधान, पंचायत अधिकारी, जेई व ब्लाक के अन्य कर्मचारियों की हिस्सेदारी सुनिश्चित होती है। नई पंचायत के गठन के बाद विकासखंड मांधाता के कई गांवों में सिर्फ पैसे बनाने के लिए अनावश्यक कार्यों में जेसीबी लगाकर मनरेगा से भुगतान का खेल चल रहा है। जानकारी मिली है कि बकुलाही नदी के किनारे बसे गांव सराय देवराय, छतौना, गौरा व सराय भूपति आदि गांवों में नदी की सफाई के नाम पर मनरेगा के अंतर्गत जेसीबी से हफ्तों मिट्टी का काम कराया गया और जॉब कार्ड के जरिए ग्राम प्रधानों ने लाखों रुपए का भुगतान करा लिया। मनरेगा की आड़ में किए जा रहे सरकारी धन की बंदरबांट की शिकायत ग्रामीणों ने खंड विकास अधिकारी मांधाता से किया लेकिन अभी तक कार्रवाई तो दूर, कोई जांच करने तक नहीं आया। स्मरण रहे कि इन गांवों के पूर्व प्रधानों ने भी इसी नदी की सफाई के नाम पर पहले भी कई बार लाखों रुपए का भुगतान कराया हैं।इस प्रकार गॉव में अब जेसीबी मशीनों से मजदूरों के मानव दिवस सृजित किए जा रहे है और सरकार मनरेगा की सफलता का ढिंढोरा पीट रही है।



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