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रिक्त पदों को खत्म करने की कवायद रोकने की मांग की

प्रयागराज। केंद्र सरकार के अधीन सरकारी विभागों में डेढ़ साल में 10 लाख लोगों के रिक्रूटमेंट संबंधी प्रधानमंत्री के ऐलान पर युवा मंच ने पीएमओ को रिप्लाई ट्वीट कर कहा कि रिक्त पदों को खत्म करने की कवायद व निजीकरण की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की है। दरअसल रेलवे में 50 फीसद पदों को खत्म करने की कवायद चल रही है जिसके तहत हाल में 72 हजार पदों को अनुपयोगी बता खत्म किया गया। यही हाल बैंकिंग सेक्टर समेत अन्य तमाम विभागों का है।  प्रधानमंत्री मोदी के केंद्र में 10 लाख सरकारी नौकरी देने के ऐलान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए युवा मंच संयोजक राजेश सचान ने कहा कि अगर भयावह बेकारी के सवाल को हल करने के प्रति केंद्र सरकार जरा भी ईमानदार हैं तो  सरकारी विभागों में निजीकरण, आउटसोर्सिंग व रिक्त पदों को अनुपयोगी बता खत्म करने की कवायद को तत्काल रोका जाना चाहिए और उन नीतियों में बदलाव के लिए ब्लूप्रिंट पेश करना चाहिए जो कि बेकारी की भयावह स्थिति के लिए जिम्मेदार हैं। इसलिए केंद्र सरकार को चाहिए कि महज प्रोपेगेंडा के बजाय रोजगार हल के लिए ठोस कदम उठाने रूपरेखा पेश करना चाहिए। दरअसल इसी तरह का प्रचार उत्तर प्रदेश सरकार भी अनवरत कर रही है जबकि उत्तर प्रदेश में भी बेकारी की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है।  उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार में 10 लाख पद, राज्यों में 30 लाख पद, विभिन्न सार्वजनिक उपक्रमों व अनुदानित संस्थाओं आदि में देश भर में 60 लाख से ज्यादा रिक्त पदों को भरने के लिए प्रयागराज, पटना समेत तमाम शहरों में युवा आवाज उठाते रहे हैं।

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प्रयागराज। केंद्र सरकार के अधीन सरकारी विभागों में डेढ़ साल में 10 लाख लोगों के रिक्रूटमेंट संबंधी प्रधानमंत्री के ऐलान पर युवा मंच ने पीएमओ को रिप्लाई ट्वीट कर कहा कि रिक्त पदों को खत्म करने की कवायद व निजीकरण की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की है। दरअसल रेलवे में 50 फीसद पदों को खत्म करने की कवायद चल रही है जिसके तहत हाल में 72 हजार पदों को अनुपयोगी बता खत्म किया गया। यही हाल बैंकिंग सेक्टर समेत अन्य तमाम विभागों का है।  प्रधानमंत्री मोदी के केंद्र में 10 लाख सरकारी नौकरी देने के ऐलान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए युवा मंच संयोजक राजेश सचान ने कहा कि अगर भयावह बेकारी के सवाल को हल करने के प्रति केंद्र सरकार जरा भी ईमानदार हैं तो  सरकारी विभागों में निजीकरण, आउटसोर्सिंग व रिक्त पदों को अनुपयोगी बता खत्म करने की कवायद को तत्काल रोका जाना चाहिए और उन नीतियों में बदलाव के लिए ब्लूप्रिंट पेश करना चाहिए जो कि बेकारी की भयावह स्थिति के लिए जिम्मेदार हैं। इसलिए केंद्र सरकार को चाहिए कि महज प्रोपेगेंडा के बजाय रोजगार हल के लिए ठोस कदम उठाने रूपरेखा पेश करना चाहिए। दरअसल इसी तरह का प्रचार उत्तर प्रदेश सरकार भी अनवरत कर रही है जबकि उत्तर प्रदेश में भी बेकारी की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है।  उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार में 10 लाख पद, राज्यों में 30 लाख पद, विभिन्न सार्वजनिक उपक्रमों व अनुदानित संस्थाओं आदि में देश भर में 60 लाख से ज्यादा रिक्त पदों को भरने के लिए प्रयागराज, पटना समेत तमाम शहरों में युवा आवाज उठाते रहे हैं।

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