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शुक्रवार को देश भर मे दिखेगा भारतीय संस्कृति का अनुठा संगमः अस्करी

प्रयागराज। आगामी शुक्रवार को जहाँ एक तरफ रंगों की बौछार से लोग सराबोर रहेंगे वहीं देर शाम से क़ब्रिस्तानों मे पुरखों की क़बरें मोमबत्ती की रौशनी की छटा बिखेरती नज़र आएँगी।यह अनुठा  संगम भारतीय संस्कृति की पहचान है। भारत मे जहाँ लोग एक दूसरे के पर्व मे बराबर से शरीक रहते हैं। ऐसे मे होली भी शुक्रवार को पड़ रही है और शबेबारात भी। बृहस्पतिवार को होलिका दहन के उपरान्त होली के पर्व को लेकर तरहा तरहा की पिचकारी और रंगों की खरीद फरोख्त ठर रहे हैं वही इसलामिक महिने शाबान की चौदह तारीख को मुस्लिम समुदाय अपने पुरखों की याद मनाने की तय्यारी मे मशग़ूल है। क़ब्रिस्तानों की साफ सफाई के साथ पुरखों की क़बरों पर मिट्टी चढ़वाने और टूटी क़बरों को दूरुस्त करवाने मे लगा हुआ है। धार्मिक व सामाजिक संस्था उम्मुल बनीन सोसाईटी के महासचिव सै०मो०अस्करी के अनुसार यह पहला अवसर है जब एक ही दिन रंगों का पर्व और शबेबारात एक साथ पड़ रही है।रंगो की फूवार बन्द होने के बाद लोग अपने हिन्दू भाईयो के घरो मे जहाँ गुझिया पापड़ खाने के साथ होली की बधाई देते दिखेंगे वहीं शाम होते ही घरों मे हलवे और खाने पर पुरखों की नज़रो नियाज़ कराने के बाद क़ब्रिस्तानों मे अपने मरहूमीन की मग़फिरत को हाँथ बलन्द कर दूआ भी मांगेगे। अस्करी ने शासन प्रशासन से निर्बाध पानी और बिजली की व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ मुस्लिम बहुल्य इलाक़ो की मस्जिदों इबादतगाहों इमामबाड़ों दरगाहों व क़ब्रिस्तानों के आस पास समुचित प्रकाश व्यवस्था साफ सफाई व चूने के छिड़काव की मांग की। चकिया क़ब्रिस्तान कमेटी के पूर्व सदस्य शाहिद अब्बास रिज़वी, हसनी हुसैनी फाउंडेशन के सद्र वज़ीर खान, शिया सुन्नी इत्तेहाद कमेटी के सद्र अधिवक्ता किताब अली सहित अनेको तन्ज़ीमों व अन्जुमनो के सदस्यों ने होली और शबेबारात के मौक़े पर सभी से गंगा जमुनी तहज़ीब और भारतीय संस्कृति की खातिर सौहार्द के साथ दोनो पर्वों को मनाने तथा आपसी भाईचारा क़ायम रखने की अपील की है।

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प्रयागराज। आगामी शुक्रवार को जहाँ एक तरफ रंगों की बौछार से लोग सराबोर रहेंगे वहीं देर शाम से क़ब्रिस्तानों मे पुरखों की क़बरें मोमबत्ती की रौशनी की छटा बिखेरती नज़र आएँगी।यह अनुठा  संगम भारतीय संस्कृति की पहचान है। भारत मे जहाँ लोग एक दूसरे के पर्व मे बराबर से शरीक रहते हैं। ऐसे मे होली भी शुक्रवार को पड़ रही है और शबेबारात भी। बृहस्पतिवार को होलिका दहन के उपरान्त होली के पर्व को लेकर तरहा तरहा की पिचकारी और रंगों की खरीद फरोख्त ठर रहे हैं वही इसलामिक महिने शाबान की चौदह तारीख को मुस्लिम समुदाय अपने पुरखों की याद मनाने की तय्यारी मे मशग़ूल है। क़ब्रिस्तानों की साफ सफाई के साथ पुरखों की क़बरों पर मिट्टी चढ़वाने और टूटी क़बरों को दूरुस्त करवाने मे लगा हुआ है। धार्मिक व सामाजिक संस्था उम्मुल बनीन सोसाईटी के महासचिव सै०मो०अस्करी के अनुसार यह पहला अवसर है जब एक ही दिन रंगों का पर्व और शबेबारात एक साथ पड़ रही है।रंगो की फूवार बन्द होने के बाद लोग अपने हिन्दू भाईयो के घरो मे जहाँ गुझिया पापड़ खाने के साथ होली की बधाई देते दिखेंगे वहीं शाम होते ही घरों मे हलवे और खाने पर पुरखों की नज़रो नियाज़ कराने के बाद क़ब्रिस्तानों मे अपने मरहूमीन की मग़फिरत को हाँथ बलन्द कर दूआ भी मांगेगे। अस्करी ने शासन प्रशासन से निर्बाध पानी और बिजली की व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ मुस्लिम बहुल्य इलाक़ो की मस्जिदों इबादतगाहों इमामबाड़ों दरगाहों व क़ब्रिस्तानों के आस पास समुचित प्रकाश व्यवस्था साफ सफाई व चूने के छिड़काव की मांग की। चकिया क़ब्रिस्तान कमेटी के पूर्व सदस्य शाहिद अब्बास रिज़वी, हसनी हुसैनी फाउंडेशन के सद्र वज़ीर खान, शिया सुन्नी इत्तेहाद कमेटी के सद्र अधिवक्ता किताब अली सहित अनेको तन्ज़ीमों व अन्जुमनो के सदस्यों ने होली और शबेबारात के मौक़े पर सभी से गंगा जमुनी तहज़ीब और भारतीय संस्कृति की खातिर सौहार्द के साथ दोनो पर्वों को मनाने तथा आपसी भाईचारा क़ायम रखने की अपील की है।

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