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महिनों से कार्यालय में नहीं बैठे विपणन निरीक्षक, किसान किससे कहे अपनी बात

कौन करेगा किसानों के नुकसान की भरपाई, उच्चाधिकारी भी समस्या पर नहीं दिख रहे गंभीर
कोरांव प्रयागराज। विपणन कार्यालय पर किसानों के सवालों से बचने के लिए महिनों से विपणन निरीक्षक पंकज सिंह अपनी कुर्सी पर बैठे ही नहीं दिखे। बताते चलें कि जब धान खरीद शुरू हुई उसके कुछ ही दिनों तक वह कार्यालय में आते जाते रहे किंतु जैसे जैसे किसानों का धान खरीद हेतु गुजारिशें बढ़ती गई वैसे ही उनका अपने कार्यालय में बैठना भी बंद हो गया। किसानों की समस्याओं को दूर करने के बजाय उक्त विपणन निरीक्षक जिले में अपने आवास व कमरे पर रहकर विपणन कार्यालय में तैनात बाबू विष्णु सिंह को फोन पर कुछ खास लोगों एवं मिलरों का अंगूठा ज्यादा से ज्यादा लगवाने के लिए इंगित किया जाता रहा। उक्त विपणन निरीक्षक एवं बाबू मिलकर पैसा कमाने के चक्कर में मिलरों का तो अंगूठा खूब लगवाया गया किन्तु किसान कार्यालय पर आते और उनके न मिलने पर बैरंग वापस लौट जाते। जब किसान अपने अंगूठा लगाए जाने की बात वहां पर मौजूद बाबू से करते तो वह बड़े रोबदार शब्दों में जबाब देता कि वह कुछ नहीं जानता एम आई से बात करो। ऐसे में किसान विपणन निरीक्षक को जब फोन करते तो उनका फोन ही नहीं उठता है। इतना ही नहीं सैकड़ों किसानों की समस्याओं का निस्तारण उच्चाधिकारियों तक जाने के बावजूद भी उनके कान में जूं तक नहीं रेंगता दिख रहा। किसानों ने जिलाधिकारी का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराते हुए उनकी मेहनत की पैदा हुई फसल और उसकी किमत दोनों की बर्बादी करने वाले विपणन निरीक्षक पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।

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कौन करेगा किसानों के नुकसान की भरपाई, उच्चाधिकारी भी समस्या पर नहीं दिख रहे गंभीर
कोरांव प्रयागराज। विपणन कार्यालय पर किसानों के सवालों से बचने के लिए महिनों से विपणन निरीक्षक पंकज सिंह अपनी कुर्सी पर बैठे ही नहीं दिखे। बताते चलें कि जब धान खरीद शुरू हुई उसके कुछ ही दिनों तक वह कार्यालय में आते जाते रहे किंतु जैसे जैसे किसानों का धान खरीद हेतु गुजारिशें बढ़ती गई वैसे ही उनका अपने कार्यालय में बैठना भी बंद हो गया। किसानों की समस्याओं को दूर करने के बजाय उक्त विपणन निरीक्षक जिले में अपने आवास व कमरे पर रहकर विपणन कार्यालय में तैनात बाबू विष्णु सिंह को फोन पर कुछ खास लोगों एवं मिलरों का अंगूठा ज्यादा से ज्यादा लगवाने के लिए इंगित किया जाता रहा। उक्त विपणन निरीक्षक एवं बाबू मिलकर पैसा कमाने के चक्कर में मिलरों का तो अंगूठा खूब लगवाया गया किन्तु किसान कार्यालय पर आते और उनके न मिलने पर बैरंग वापस लौट जाते। जब किसान अपने अंगूठा लगाए जाने की बात वहां पर मौजूद बाबू से करते तो वह बड़े रोबदार शब्दों में जबाब देता कि वह कुछ नहीं जानता एम आई से बात करो। ऐसे में किसान विपणन निरीक्षक को जब फोन करते तो उनका फोन ही नहीं उठता है। इतना ही नहीं सैकड़ों किसानों की समस्याओं का निस्तारण उच्चाधिकारियों तक जाने के बावजूद भी उनके कान में जूं तक नहीं रेंगता दिख रहा। किसानों ने जिलाधिकारी का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराते हुए उनकी मेहनत की पैदा हुई फसल और उसकी किमत दोनों की बर्बादी करने वाले विपणन निरीक्षक पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।

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