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सौर ऊर्जा के प्रयोग से आर्थिक समृद्धि और पर्यावरण की सुरक्षा

प्रयागराज  I से जारी हुआ सौर ऊर्जा के लिए जन घोषणापत्र, सभी राजनीतिक दलों से समर्थन की अपील
सौर ऊर्जा उपयोग पर सब्सिडी से दूर करें प्रदेश में रोजगार और पर्यावरण का संकट, सूरज से समृद्ध अभियान की मांग
प्रयागराज। सौर ऊर्जा के इस्तेमाल से न सिर्फ पर्यावरण सुरक्षित होगा बल्कि आर्थिक रूप से भी बहुत लाभ पहुंचेगा। यह बातें इलाहाबाद उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता एडवोकेट के के रॉय, सामाजिक कार्यकर्ता एवं कवि अंशु मालवीय, क्लाइमेट एजेंडा के प्रतिनिधि रवि शेखर और उम्मीद संस्था के अध्यक्ष रवि कुमार लेखक ने संयुक्त रूप से प्रेसवार्ता में कहीं। इस अवसर पर अभियान की ओर से उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 के लिए सौर ऊर्जा के विषय पर लाखों लोगों के समर्थन से तैयार हुए जन घोषणा पत्र को जारी किया गया। सौर ऊर्जा के अधिकतम संभव उपयोग को सुलभ बनाये जाने के सन्दर्भ में जारी इस जन घोषणा पत्र के प्रमुख बिन्दुओं के बारे में बताते हुए अभियान के प्रतिनिधिगणों ने बताया कि यह जन घोषणा पत्र प्रयागराज समेत यूपी के चार अन्य सोलर शहरों में योजना के कुशल और समयबद्ध अनुपालन की मांग करता है। साथ ही, प्रदेश की भौगोलिक और सांस्कृतिक संरचना के आधार पर योजना के विस्तार की मांग और वर्तमान में सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी को न्यूनतम 50 फीसदी तक बढाने की मांग भी घोषणा पत्र में प्रमुखता से उठाई गयी है। यह जन घोषणा पत्र प्रयागराज समेत उत्तर प्रदेश के तीर्थ, पर्यटन, उद्योग, पर्यावरण को समृद्ध करने और नौजवानों के लिए सौर ऊर्जा क्षेत्र में रोजगार की संभावना को मजबूत करने के लिए इसके अधिकतम उपयोग को बढ़ावा देने पर केन्द्रित है। घोषणापत्र के बारे में जानकारी देते हुए अभियान प्रतिनिधियों ने कहा कि भौगोलिक दृष्टी से उत्तर प्रदेश देश में सूर्य का सर्वाधिक प्रकाश हासिल करने वाला राज्य है। यह प्रकाश राज्य में रहने वाले नागरिकों को बिना भेदभाव के, प्राकृतिक तौर पर बराबर मात्रा में हासिल होता है। जबकि, राज्य सरकार द्वारा घोषित सोलर सिटी योजना में राज्य के चुनिन्दा शहरों में उपयोग को प्रोत्साहन देना राज्य के सम्मुख सभी के संवैधानिक और नैसर्गिक रूप से एक समान होने की संकल्पना के विपरीत है। उन्होंने जन घोषणा पत्र में यह प्रमुखता से उल्लेखित है कि प्रदेश के हर वर्ग, समुदाय को राज्य द्वारा सौर ऊर्जा उपयोग हेतु प्रोत्साहन मिलना चाहिए ताकि आने वाले समय में यह हमारे लिए ऊर्जा के मुख्य श्रोत के रूप में प्रतिष्ठित हो सके। अगर ऐसा हुआ तो यकीनन हमारे समाज में सौर ऊर्जा के प्रति व्याप्त सारे मिथक टूट जायेंगे और व्यापक पैमाने पर इसके इस्तेमाल से पर्यावरण की बेहतरी और नौजवानों के रोजगार का रास्ता भी खुलेगा”। प्रतिनिधियों ने सभी राजनीतिक दलों से सौर ऊर्जा पर जन घोषणा पत्र को अगले विधानसभा चुनाव के लिए अपने राजनीतिक घोषणापत्र में शामिल करने की अपील की। ज्ञात हो कि 25 जून 2020 को, उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा सोलर शहर योजना की घोषणा की गयी थी, जिसमे प्रदेश के चार अन्य शहरों अयोध्या, वाराणसी,  गोरखपुर, मथुरा के साथ साथ प्रयागराज को भी शामिल किया गया था. अभियान की यह मांग है कि कम से कम। 4 अन्य शहरों, कानपुर, लखनऊ, आगरा और मेरठ को भी इस योजना का हिस्सा बनाया जाए।

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प्रयागराज  I से जारी हुआ सौर ऊर्जा के लिए जन घोषणापत्र, सभी राजनीतिक दलों से समर्थन की अपील
सौर ऊर्जा उपयोग पर सब्सिडी से दूर करें प्रदेश में रोजगार और पर्यावरण का संकट, सूरज से समृद्ध अभियान की मांग
प्रयागराज। सौर ऊर्जा के इस्तेमाल से न सिर्फ पर्यावरण सुरक्षित होगा बल्कि आर्थिक रूप से भी बहुत लाभ पहुंचेगा। यह बातें इलाहाबाद उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता एडवोकेट के के रॉय, सामाजिक कार्यकर्ता एवं कवि अंशु मालवीय, क्लाइमेट एजेंडा के प्रतिनिधि रवि शेखर और उम्मीद संस्था के अध्यक्ष रवि कुमार लेखक ने संयुक्त रूप से प्रेसवार्ता में कहीं। इस अवसर पर अभियान की ओर से उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 के लिए सौर ऊर्जा के विषय पर लाखों लोगों के समर्थन से तैयार हुए जन घोषणा पत्र को जारी किया गया। सौर ऊर्जा के अधिकतम संभव उपयोग को सुलभ बनाये जाने के सन्दर्भ में जारी इस जन घोषणा पत्र के प्रमुख बिन्दुओं के बारे में बताते हुए अभियान के प्रतिनिधिगणों ने बताया कि यह जन घोषणा पत्र प्रयागराज समेत यूपी के चार अन्य सोलर शहरों में योजना के कुशल और समयबद्ध अनुपालन की मांग करता है। साथ ही, प्रदेश की भौगोलिक और सांस्कृतिक संरचना के आधार पर योजना के विस्तार की मांग और वर्तमान में सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी को न्यूनतम 50 फीसदी तक बढाने की मांग भी घोषणा पत्र में प्रमुखता से उठाई गयी है। यह जन घोषणा पत्र प्रयागराज समेत उत्तर प्रदेश के तीर्थ, पर्यटन, उद्योग, पर्यावरण को समृद्ध करने और नौजवानों के लिए सौर ऊर्जा क्षेत्र में रोजगार की संभावना को मजबूत करने के लिए इसके अधिकतम उपयोग को बढ़ावा देने पर केन्द्रित है। घोषणापत्र के बारे में जानकारी देते हुए अभियान प्रतिनिधियों ने कहा कि भौगोलिक दृष्टी से उत्तर प्रदेश देश में सूर्य का सर्वाधिक प्रकाश हासिल करने वाला राज्य है। यह प्रकाश राज्य में रहने वाले नागरिकों को बिना भेदभाव के, प्राकृतिक तौर पर बराबर मात्रा में हासिल होता है। जबकि, राज्य सरकार द्वारा घोषित सोलर सिटी योजना में राज्य के चुनिन्दा शहरों में उपयोग को प्रोत्साहन देना राज्य के सम्मुख सभी के संवैधानिक और नैसर्गिक रूप से एक समान होने की संकल्पना के विपरीत है। उन्होंने जन घोषणा पत्र में यह प्रमुखता से उल्लेखित है कि प्रदेश के हर वर्ग, समुदाय को राज्य द्वारा सौर ऊर्जा उपयोग हेतु प्रोत्साहन मिलना चाहिए ताकि आने वाले समय में यह हमारे लिए ऊर्जा के मुख्य श्रोत के रूप में प्रतिष्ठित हो सके। अगर ऐसा हुआ तो यकीनन हमारे समाज में सौर ऊर्जा के प्रति व्याप्त सारे मिथक टूट जायेंगे और व्यापक पैमाने पर इसके इस्तेमाल से पर्यावरण की बेहतरी और नौजवानों के रोजगार का रास्ता भी खुलेगा”। प्रतिनिधियों ने सभी राजनीतिक दलों से सौर ऊर्जा पर जन घोषणा पत्र को अगले विधानसभा चुनाव के लिए अपने राजनीतिक घोषणापत्र में शामिल करने की अपील की। ज्ञात हो कि 25 जून 2020 को, उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा सोलर शहर योजना की घोषणा की गयी थी, जिसमे प्रदेश के चार अन्य शहरों अयोध्या, वाराणसी,  गोरखपुर, मथुरा के साथ साथ प्रयागराज को भी शामिल किया गया था. अभियान की यह मांग है कि कम से कम। 4 अन्य शहरों, कानपुर, लखनऊ, आगरा और मेरठ को भी इस योजना का हिस्सा बनाया जाए।

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