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लाक डाउन से गांव लौट रहे प्रवासी मजदूर

जौनपुर। कोरोना संक्रमण के चलते कुछ स्थानों में किए गए लॉकडाउन के बाद से प्रवासी मजदूरों का अपने गांव व घरों को लौटने का क्रम रुकने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार को भी कई प्रवासी बोरिया बिस्तर बांधकर अपने गांव व घरों को जाते दिखे। दिल्ली, सूरत, अहमदाबाद, गुजरात, महाराष्ट्र आदि स्थानों में जिले के अनेक लोग   अपने परिवार का भरण पोषण करने वाले मजदूरों को एक बार फिर से कोरोना संक्रमण के बीच किए गए लॉकडाउन का शिकार होना पड़ रहा है। दिल्ली में किए गए लॉकडाउन के बाद से वहां से मजदूरों के आने की सिलसिला लगातार जारी है। इसके अलावा सूरत, गुजरात से भी मजदूरों के आने का क्रम जारी है। इन मजदूरों की न तो कोई जांच की जा रही है और न ही इन्हें शेल्टर होम में पहुंचाया जा रहा है। जिससे कि यह लोग सुरक्षित होकर अपने गांव को जा सके। दिल्ली से आई महिला   ने बताया कि कोरोना ने सब कुछ चैपट कर दिया। वहीं शिवपाल ने बताया कि कोरोना की पहली मार से अभी उबर नही पाए थे कि दूसरे मार ने कमर तोड़ कर रख दी। परिवार के भरण पोषण के लिए घर छोड़ना पड़ा।

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जौनपुर। कोरोना संक्रमण के चलते कुछ स्थानों में किए गए लॉकडाउन के बाद से प्रवासी मजदूरों का अपने गांव व घरों को लौटने का क्रम रुकने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार को भी कई प्रवासी बोरिया बिस्तर बांधकर अपने गांव व घरों को जाते दिखे। दिल्ली, सूरत, अहमदाबाद, गुजरात, महाराष्ट्र आदि स्थानों में जिले के अनेक लोग   अपने परिवार का भरण पोषण करने वाले मजदूरों को एक बार फिर से कोरोना संक्रमण के बीच किए गए लॉकडाउन का शिकार होना पड़ रहा है। दिल्ली में किए गए लॉकडाउन के बाद से वहां से मजदूरों के आने की सिलसिला लगातार जारी है। इसके अलावा सूरत, गुजरात से भी मजदूरों के आने का क्रम जारी है। इन मजदूरों की न तो कोई जांच की जा रही है और न ही इन्हें शेल्टर होम में पहुंचाया जा रहा है। जिससे कि यह लोग सुरक्षित होकर अपने गांव को जा सके। दिल्ली से आई महिला   ने बताया कि कोरोना ने सब कुछ चैपट कर दिया। वहीं शिवपाल ने बताया कि कोरोना की पहली मार से अभी उबर नही पाए थे कि दूसरे मार ने कमर तोड़ कर रख दी। परिवार के भरण पोषण के लिए घर छोड़ना पड़ा।

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