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श्री श्याम शंकर सिंह-अध्यक्ष श्री रामलीला समिति प्रतापगढ़

प्रतापगढ़ की पहचान, नगर का ऐतिहासिक सचल रामलीला व भरत मिलाप का अस्तित्व खतरे में
आर यस यस ने श्रीराम लीला समिति कार्यालय का ताला तोड़ किया कब्जा कैसे होगा भरत मिलाप?
 प्रतापगढ़। हिन्दुत्व की रक्षा व प्रभु श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के अगुआ होने का दंभ भरने वाला संगठन “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ” ही प्रतापगढ़ के ऐतिहासिक रामलीला व भरत मिलाप के लिए ग्रहण बन गया। जनपद प्रतापगढ़ का सैकड़ों वर्ष पुराना सबसे बड़ा सांस्कृतिक व धार्मिक आयोजन जिससे प्रतापगढ़ की ख्याति दूर-दूर तक फैली वह है बेल्हा प्रतापगढ़ का भरत मिलाप। श्री रामलीला समिति, प्रतापगढ़ के बैनर तले होने वाले इस ऐतिहासिक भरत मिलाप पर कई बार तमाम तरह की बाधाएं आयीं। परन्तु यह भरत मिलाप प्रतिवर्ष शहर में मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम के अलौकिक आभा से आम जनमानस को भक्तिभाव में आह्लादित करता रहा है। किन्तु पिछले कुछ वर्षों से एक हिन्दूवादी संगठन की कुदृष्टि इस पर पड़ गई। जिसकी वजह से यह ऐतिहासिक भरत मिलाप अब इतिहास के पन्ने में सिमटने की ओर बढ़ रहा है। और वह हिन्दूवादी संगठन है “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ” जिस संगठन पर हर हिन्दू गर्व महसूस करता है। भगवान राम के नाम पर सत्ता प्राप्त करने वाली भाजपा की जन्मदात्री संस्था आर यस यस भगवान राम के कार्य में ही बाधा पहुंचाए यह कितना शर्मनाक व निंदनीय है। शहर के प्रसिद्ध गोपाल मंदिर परिसर में मंदिर के बगल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्यालय है इसी परिसर में गोपाल मंदिर व संघ कार्यालय के सामने शहर में सैकड़ों वर्ष से ऐतिहासिक रामलीला व भरत मिलाप सम्पन्न कराने वाली संस्था श्रीराम लीला समिति का कार्यालय व गोपाल मंदिर के दाहिने तरफ गायत्री मंदिर है। यह समस्त भूमि राजा प्रतापगढ़ ने गोपाल मंदिर, संघ व श्रीराम लीला समिति को दान में दी थी। गायत्री मंदिर बहुत बाद में बना। उस जमाने में धर्म के लिए दान में दी गई की जमीन का बैनामा कराने में अक्सर लोग चूक जाते थे क्योंकि तब जमीन की इतनी कीमत नहीं होती थी। अतैव गोपाल मंदिर, संघ व श्रीराम लीला समिति के कार्यालय का भी बैनामा नहीं हुआ था। किन्तु आर यस यस वालों की विस्तारवादी सोच के कारण रामलीला समिति कार्यालय पर कब्जा करने की कुदृष्टि वर्षों से गढ़ी रही और सत्ता में आते ही राजनीतिक षड्यंत्र कर राजा अनिल प्रताप सिंह से इस पूरे परिसर का बैनामा करा लिया। बैनामे में कुत्सित मंसूबों के तहत चौहद्दी में उत्तर दिशा में स्थित पीपल का वृक्ष, हैंडपंप व रामलीला समिति कार्यालय दर्शाया ही नही गया बल्कि उत्तर दिशा में 20 फिट रास्ता व सड़क की ओर बनी दुकानों को छद्म तरीके से दर्शाया गया। इसके बाद इसी जनवरी माह में आर यस यस के प्रमुख पदाधिकारीयों ने भाजपा के पूर्व विधायक हरिप्रताप सिंह व अन्य की मौजूदगी में श्री रामलीला समिति कार्यालय का ताला तोड़कर उस पर कब्जा कर लिया और समिति कार्यालय का नाम मिटाकर अपना फ्लैक्स बोर्ड उस पर लगा दिया। जब रामलीला समिति के पदाधिकारियों ने इस मामले में बात करना चाहा तो संघ वाले धमकी भरा झूठा आश्वासन देते रहे कि आप लोगों को दूसरा कार्यालय दिया जाएगा, जो कि आज तक नही मिला। चूंकि श्री रामलीला समिति व्यापारियों की संस्था है इसलिए सत्ता का भय दिखाकर इन्हें चुप करा दिया गया यंहा तक कि समिति के लोग कोई कानूनी कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं कर सके। इस मामले में मुखरता से आवाज उठाने वाले समिति के संरक्षक व पूर्व कोषाध्यक्ष संजय झालानी की संघ के पदाधिकारियों से काफी बहस हुई। किन्तु समिति पदाधिकारियों का अपेक्षित सहयोग न मिलने के कारण झालानी जी भी शांत हो गए। झालानी जी का कहना है कि जब समिति के पदाधिकारी इस लड़ाई में एक कदम भी आगे नहीं बढ़ रहे हैं तो मैं अकेला क्या कर सकता हूं। इस मामले में श्रीराम लीला समिति के अध्यक्ष श्याम शंकर सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि संघ वालों ने दुसरा कार्यालय देने को कहा है। जब पूछा गया कि कब देंगे तो वह चुप रह गए। अब जनपद की पहचान यह ऐतिहासिक रामलीला व भरत मिलाप कैसे सम्पन्न होगा यह प्रभु श्रीराम ही जाने।

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प्रतापगढ़ की पहचान, नगर का ऐतिहासिक सचल रामलीला व भरत मिलाप का अस्तित्व खतरे में
आर यस यस ने श्रीराम लीला समिति कार्यालय का ताला तोड़ किया कब्जा कैसे होगा भरत मिलाप?
 प्रतापगढ़। हिन्दुत्व की रक्षा व प्रभु श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के अगुआ होने का दंभ भरने वाला संगठन “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ” ही प्रतापगढ़ के ऐतिहासिक रामलीला व भरत मिलाप के लिए ग्रहण बन गया। जनपद प्रतापगढ़ का सैकड़ों वर्ष पुराना सबसे बड़ा सांस्कृतिक व धार्मिक आयोजन जिससे प्रतापगढ़ की ख्याति दूर-दूर तक फैली वह है बेल्हा प्रतापगढ़ का भरत मिलाप। श्री रामलीला समिति, प्रतापगढ़ के बैनर तले होने वाले इस ऐतिहासिक भरत मिलाप पर कई बार तमाम तरह की बाधाएं आयीं। परन्तु यह भरत मिलाप प्रतिवर्ष शहर में मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम के अलौकिक आभा से आम जनमानस को भक्तिभाव में आह्लादित करता रहा है। किन्तु पिछले कुछ वर्षों से एक हिन्दूवादी संगठन की कुदृष्टि इस पर पड़ गई। जिसकी वजह से यह ऐतिहासिक भरत मिलाप अब इतिहास के पन्ने में सिमटने की ओर बढ़ रहा है। और वह हिन्दूवादी संगठन है “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ” जिस संगठन पर हर हिन्दू गर्व महसूस करता है। भगवान राम के नाम पर सत्ता प्राप्त करने वाली भाजपा की जन्मदात्री संस्था आर यस यस भगवान राम के कार्य में ही बाधा पहुंचाए यह कितना शर्मनाक व निंदनीय है। शहर के प्रसिद्ध गोपाल मंदिर परिसर में मंदिर के बगल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्यालय है इसी परिसर में गोपाल मंदिर व संघ कार्यालय के सामने शहर में सैकड़ों वर्ष से ऐतिहासिक रामलीला व भरत मिलाप सम्पन्न कराने वाली संस्था श्रीराम लीला समिति का कार्यालय व गोपाल मंदिर के दाहिने तरफ गायत्री मंदिर है। यह समस्त भूमि राजा प्रतापगढ़ ने गोपाल मंदिर, संघ व श्रीराम लीला समिति को दान में दी थी। गायत्री मंदिर बहुत बाद में बना। उस जमाने में धर्म के लिए दान में दी गई की जमीन का बैनामा कराने में अक्सर लोग चूक जाते थे क्योंकि तब जमीन की इतनी कीमत नहीं होती थी। अतैव गोपाल मंदिर, संघ व श्रीराम लीला समिति के कार्यालय का भी बैनामा नहीं हुआ था। किन्तु आर यस यस वालों की विस्तारवादी सोच के कारण रामलीला समिति कार्यालय पर कब्जा करने की कुदृष्टि वर्षों से गढ़ी रही और सत्ता में आते ही राजनीतिक षड्यंत्र कर राजा अनिल प्रताप सिंह से इस पूरे परिसर का बैनामा करा लिया। बैनामे में कुत्सित मंसूबों के तहत चौहद्दी में उत्तर दिशा में स्थित पीपल का वृक्ष, हैंडपंप व रामलीला समिति कार्यालय दर्शाया ही नही गया बल्कि उत्तर दिशा में 20 फिट रास्ता व सड़क की ओर बनी दुकानों को छद्म तरीके से दर्शाया गया। इसके बाद इसी जनवरी माह में आर यस यस के प्रमुख पदाधिकारीयों ने भाजपा के पूर्व विधायक हरिप्रताप सिंह व अन्य की मौजूदगी में श्री रामलीला समिति कार्यालय का ताला तोड़कर उस पर कब्जा कर लिया और समिति कार्यालय का नाम मिटाकर अपना फ्लैक्स बोर्ड उस पर लगा दिया। जब रामलीला समिति के पदाधिकारियों ने इस मामले में बात करना चाहा तो संघ वाले धमकी भरा झूठा आश्वासन देते रहे कि आप लोगों को दूसरा कार्यालय दिया जाएगा, जो कि आज तक नही मिला। चूंकि श्री रामलीला समिति व्यापारियों की संस्था है इसलिए सत्ता का भय दिखाकर इन्हें चुप करा दिया गया यंहा तक कि समिति के लोग कोई कानूनी कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं कर सके। इस मामले में मुखरता से आवाज उठाने वाले समिति के संरक्षक व पूर्व कोषाध्यक्ष संजय झालानी की संघ के पदाधिकारियों से काफी बहस हुई। किन्तु समिति पदाधिकारियों का अपेक्षित सहयोग न मिलने के कारण झालानी जी भी शांत हो गए। झालानी जी का कहना है कि जब समिति के पदाधिकारी इस लड़ाई में एक कदम भी आगे नहीं बढ़ रहे हैं तो मैं अकेला क्या कर सकता हूं। इस मामले में श्रीराम लीला समिति के अध्यक्ष श्याम शंकर सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि संघ वालों ने दुसरा कार्यालय देने को कहा है। जब पूछा गया कि कब देंगे तो वह चुप रह गए। अब जनपद की पहचान यह ऐतिहासिक रामलीला व भरत मिलाप कैसे सम्पन्न होगा यह प्रभु श्रीराम ही जाने।

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