कड़ाके की ठंड में वीपी ट्रेन पकड़ने आए यात्री लौटे निराश
मुसाफिरों की समस्या से रेल प्रशासन का कोई लेना देना नहीं
प्रतापगढ़। बनारस रूट पर चलने वाली दोनों वीपी और वीएल पैसेंजरों को कैंसिल किए जाने से डेली मुसाफिरों के सामने दिक्कत आ गई है। कड़ाके की ठंड में सुबह बनारस जाने के लिए यात्री वीपी पकड़ने गए तो पता चला कि कैंसिल है। इससे यात्रियों को निराश होकर लौटना पड़ा। उनका आरोप है कि कम से कम वीपी ट्रेन को तो नहीं बंद करना था। इससे यह जाहिर होता है कि रेल प्रशासन को उनकी कोई चिंता नहीं है। यात्रियों ने ट्रेन के संचालन की मांग की है। बता दें कि प्रतापगढ़ से दो पैसेंजर ट्रेन वीपी और वीएल डेली बनारस के लिए चलती है। इससे यात्रियों को काफ़ी सहूलियत मिलती है। रेलवे ने दोनो को 28 फरवरी तक डेढ़ महीने के लिए रद्द कर दिया है। इससे इन ट्रेनों के सहारे बनारस तक का सफर करने वाले सैकड़ों यात्रियों के सामने बड़ी समस्या आ गई है। क्योंकि इनके अलावा और कोई पैसेंजर ट्रेन की सुविधा रेल प्रशासन ने नहीं दी है। बनारस में नौकरी कर रहे भीम सिंह का कहना है कि वीपी पैसेंजर उन जैसे डेली जाने वाले सैकड़ों यात्रियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। बिजनेस मैन रवि प्रकाश का कहना है कि ट्रेन छोटे बड़े सभी स्टेशन पर रुकती थी। इसका लाभ बहुतों को मिलता है। इस बारे में एसएस का कहना है कि ये फैसला रेलवे बोर्ड का है। वे कुछ कर भी नहीं सकते हैं।
कड़ाके की ठंड में वीपी ट्रेन पकड़ने आए यात्री लौटे निराश
मुसाफिरों की समस्या से रेल प्रशासन का कोई लेना देना नहीं
प्रतापगढ़। बनारस रूट पर चलने वाली दोनों वीपी और वीएल पैसेंजरों को कैंसिल किए जाने से डेली मुसाफिरों के सामने दिक्कत आ गई है। कड़ाके की ठंड में सुबह बनारस जाने के लिए यात्री वीपी पकड़ने गए तो पता चला कि कैंसिल है। इससे यात्रियों को निराश होकर लौटना पड़ा। उनका आरोप है कि कम से कम वीपी ट्रेन को तो नहीं बंद करना था। इससे यह जाहिर होता है कि रेल प्रशासन को उनकी कोई चिंता नहीं है। यात्रियों ने ट्रेन के संचालन की मांग की है। बता दें कि प्रतापगढ़ से दो पैसेंजर ट्रेन वीपी और वीएल डेली बनारस के लिए चलती है। इससे यात्रियों को काफ़ी सहूलियत मिलती है। रेलवे ने दोनो को 28 फरवरी तक डेढ़ महीने के लिए रद्द कर दिया है। इससे इन ट्रेनों के सहारे बनारस तक का सफर करने वाले सैकड़ों यात्रियों के सामने बड़ी समस्या आ गई है। क्योंकि इनके अलावा और कोई पैसेंजर ट्रेन की सुविधा रेल प्रशासन ने नहीं दी है। बनारस में नौकरी कर रहे भीम सिंह का कहना है कि वीपी पैसेंजर उन जैसे डेली जाने वाले सैकड़ों यात्रियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। बिजनेस मैन रवि प्रकाश का कहना है कि ट्रेन छोटे बड़े सभी स्टेशन पर रुकती थी। इसका लाभ बहुतों को मिलता है। इस बारे में एसएस का कहना है कि ये फैसला रेलवे बोर्ड का है। वे कुछ कर भी नहीं सकते हैं।



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