अयोध्या । क्या कभी आपने सोचा है कि नश्वर शरीर भी आपको अमर कर सकता है। जीवनभर प्रमुख पर्वो व अनुष्ठानों पर किए गए दानों में महादान होता है देह का दान। सांस थमने के बाद शरीर का दान करने वाला ही दुनिया की नजरों में महान बनता है। साकेत डिग्री कालेज के हिंदी विभाग की प्रोफेसर डॉ मंजूषा मिश्र के पिता गोण्डा जनपद के निवासी 80 वर्षीय पं0 आनंद मोहन मिश्रा ने ऐसी ही मिशाल पेश की है। उन्होंने चिकित्सा शिक्षा के लिए देहदान कर दूसरों को भी वैसा करने के लिए प्रेरित किया। विजयादशमी के महापर्व पर उनका नश्वर शरीर इहलोक गमन किया तो परिजनों ने उनकी इच्छा के अनरूप उनकी देह अयोध्या के राजर्षि दशरथ मेडिकल कालेज के एनाटमी विभाग को तत्काल सूचना देकर सौंप कर उनकी अंतिम इच्छा को पूर्ण कर दिया। बता दे कि 2019 में अयोध्या के राजर्षि दशरथ मेडिकल कालेज में संचालित एनाटमी विभाग में अब तक हुए कुल 18 पंजीकरण में श्री मिश्र का प्रथम देहदान रिकार्ड किया गया है। स्व0 मिश्र की पुत्री प्रो0 मंजूषा मिश्र ने बताया कि उनके पिता स्व0 आनन्द मोहन मिश्र ने वर्ष 2019 में अपनी इच्छा से देहदान का पंजीकरण कराया था। 15 अक्टूबर विजयादशमी को साढ़े 6 के आसपास जब उनका शरीर छूटा तो परिजनों ने इसकी सूचना मेडिकल कालेज के एनाटॉमी की हेड प्रो0 अलका सिंह को दिया। जिसके बाद उनके आवास पर पहुंची मेडिकल टीम को रामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास का इलाज कर रहे चिकित्सक डॉ आलोक कुमार त्रिपाठी ने बॉडी को प्रमाणित कर एनोटॉमी विभाग के सुपुर्द किया।
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विजयादशमी को आनंद मोहन मिश्र के देह के रुप मे अयोध्या के राजर्षि दशरथ मेडिकल कालेज को मिला पहला देहदान
अयोध्या । क्या कभी आपने सोचा है कि नश्वर शरीर भी आपको अमर कर सकता है। जीवनभर प्रमुख पर्वो व अनुष्ठानों पर किए गए दानों में महादान होता है देह का दान। सांस थमने के बाद शरीर का दान करने वाला ही दुनिया की नजरों में महान बनता है। साकेत डिग्री कालेज के हिंदी विभाग की प्रोफेसर डॉ मंजूषा मिश्र के पिता गोण्डा जनपद के निवासी 80 वर्षीय पं0 आनंद मोहन मिश्रा ने ऐसी ही मिशाल पेश की है। उन्होंने चिकित्सा शिक्षा के लिए देहदान कर दूसरों को भी वैसा करने के लिए प्रेरित किया। विजयादशमी के महापर्व पर उनका नश्वर शरीर इहलोक गमन किया तो परिजनों ने उनकी इच्छा के अनरूप उनकी देह अयोध्या के राजर्षि दशरथ मेडिकल कालेज के एनाटमी विभाग को तत्काल सूचना देकर सौंप कर उनकी अंतिम इच्छा को पूर्ण कर दिया। बता दे कि 2019 में अयोध्या के राजर्षि दशरथ मेडिकल कालेज में संचालित एनाटमी विभाग में अब तक हुए कुल 18 पंजीकरण में श्री मिश्र का प्रथम देहदान रिकार्ड किया गया है। स्व0 मिश्र की पुत्री प्रो0 मंजूषा मिश्र ने बताया कि उनके पिता स्व0 आनन्द मोहन मिश्र ने वर्ष 2019 में अपनी इच्छा से देहदान का पंजीकरण कराया था। 15 अक्टूबर विजयादशमी को साढ़े 6 के आसपास जब उनका शरीर छूटा तो परिजनों ने इसकी सूचना मेडिकल कालेज के एनाटॉमी की हेड प्रो0 अलका सिंह को दिया। जिसके बाद उनके आवास पर पहुंची मेडिकल टीम को रामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास का इलाज कर रहे चिकित्सक डॉ आलोक कुमार त्रिपाठी ने बॉडी को प्रमाणित कर एनोटॉमी विभाग के सुपुर्द किया।



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