कौशाम्बी। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मंत्री व कौशाम्बी सांसद विनोद सोनकर ने लोकसभा के प्रश्नकाल के दौरान किसानों द्वारा उपयोग किये जा रहे कीटनाशक दवाओं के सम्बन्ध में सदन में बोलते हुये कहा कि किसान जानकारी के आभाव में अत्याधिक कीटनाशक दवाओं का उपयोग करता है जबकि कीटनाशक अत्याधिक महॅगेे होते है जिससे कृषि उपज की लागत भी बढ़ती है तथा बड़ी मात्रा में भूमि बंजर होती है और इसके उपयोग से भूगर्भजल भी प्रदूषित होता है। उन्होने कहा कि हम सौभाग्यशाली है जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 2014 में सरकार बनी तो प्रधानमंत्री ने किसानों की कृषि लागत घटाने व जमीन की उर्वरा शक्ति बनी रहे तथा भूगर्भ जल दूषित न हो इसके लिये 2014-15 में किसान श्वैल हेल्थ कार्ड योजना की शुरूआत हुई जिसमें 10 करोड़ 50 लाख से अधिक किसान हेल्थ कार्ड बनाये गये। इससें हमें यह जानकारी प्राप्त हो सकती है कि किसान की कृषि भूमि पर किस कीटनाशक की कितनी आवश्यकता है या आवश्यकता नही है और कितना उत्पादन हो सकता है, कि क्या किसान हेल्थ कार्ड बनने के बाद कृषि उपयोग में कीटनाशको की कमी लाई गयी है। सांसद विनोद सोनकर ने सदन के माध्यम से केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री भारत सरकार से पूछा। जिस पर केन्द्रीय राज्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री द्वारा आजादी के बाद पहली बार किसान श्वैल हेल्थ कार्ड बनाये गये। जिसमें प्रथम चरण में 11 करोड़ व द्वितीय चरण में 11 करोड़ 75 लाख हेल्थ कार्ड बने। इसका फायदा यह हुआ कि देश के किसानों के पास कैसी जमीन है तथा इस पर सरकार ने लगभग 13 सौ 26 करोड़ रूपये खर्च किये तथा एक अध्ययन आइ0सी0आर0 के द्वारा यह ज्ञात हुआ कि यदि किसान श्वैल हेल्थ कार्ड के आधार पर कृषि भूमि पर किस मात्रा में कीटनाशक का उपयोग किया जाये। इससे कृषि उत्पादन 30-40 प्रतिशत बढ़ेगा। कृषि भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी। कीटनाशक का उपयोग कम होगा और देश का किसान अपनी कृषि भूमि की जॉच किसी भी जिले के कृषि भवन में जाकर परीक्षण करवा सकते है और उक्त जॉच से कृषि उत्पादन बढ़ा है। निश्चित रूप से श्वैल हेल्थ कार्ड से किसानों को लाभ हुआ है।
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सदन में उठा कीट नाशक दवाओं के उपयोग का मुद्दा
कौशाम्बी। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मंत्री व कौशाम्बी सांसद विनोद सोनकर ने लोकसभा के प्रश्नकाल के दौरान किसानों द्वारा उपयोग किये जा रहे कीटनाशक दवाओं के सम्बन्ध में सदन में बोलते हुये कहा कि किसान जानकारी के आभाव में अत्याधिक कीटनाशक दवाओं का उपयोग करता है जबकि कीटनाशक अत्याधिक महॅगेे होते है जिससे कृषि उपज की लागत भी बढ़ती है तथा बड़ी मात्रा में भूमि बंजर होती है और इसके उपयोग से भूगर्भजल भी प्रदूषित होता है। उन्होने कहा कि हम सौभाग्यशाली है जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 2014 में सरकार बनी तो प्रधानमंत्री ने किसानों की कृषि लागत घटाने व जमीन की उर्वरा शक्ति बनी रहे तथा भूगर्भ जल दूषित न हो इसके लिये 2014-15 में किसान श्वैल हेल्थ कार्ड योजना की शुरूआत हुई जिसमें 10 करोड़ 50 लाख से अधिक किसान हेल्थ कार्ड बनाये गये। इससें हमें यह जानकारी प्राप्त हो सकती है कि किसान की कृषि भूमि पर किस कीटनाशक की कितनी आवश्यकता है या आवश्यकता नही है और कितना उत्पादन हो सकता है, कि क्या किसान हेल्थ कार्ड बनने के बाद कृषि उपयोग में कीटनाशको की कमी लाई गयी है। सांसद विनोद सोनकर ने सदन के माध्यम से केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री भारत सरकार से पूछा। जिस पर केन्द्रीय राज्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री द्वारा आजादी के बाद पहली बार किसान श्वैल हेल्थ कार्ड बनाये गये। जिसमें प्रथम चरण में 11 करोड़ व द्वितीय चरण में 11 करोड़ 75 लाख हेल्थ कार्ड बने। इसका फायदा यह हुआ कि देश के किसानों के पास कैसी जमीन है तथा इस पर सरकार ने लगभग 13 सौ 26 करोड़ रूपये खर्च किये तथा एक अध्ययन आइ0सी0आर0 के द्वारा यह ज्ञात हुआ कि यदि किसान श्वैल हेल्थ कार्ड के आधार पर कृषि भूमि पर किस मात्रा में कीटनाशक का उपयोग किया जाये। इससे कृषि उत्पादन 30-40 प्रतिशत बढ़ेगा। कृषि भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी। कीटनाशक का उपयोग कम होगा और देश का किसान अपनी कृषि भूमि की जॉच किसी भी जिले के कृषि भवन में जाकर परीक्षण करवा सकते है और उक्त जॉच से कृषि उत्पादन बढ़ा है। निश्चित रूप से श्वैल हेल्थ कार्ड से किसानों को लाभ हुआ है।



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