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मतगणना नजदीक, हार-जीत पर अटकी चुनावी बयार हर प्रत्याशी अपनी जीत का कर रहा दावा

प्रतापगढ़ (ब्यूरो)। पंचायत चनाव की बयार अब हार जीत पर अटकी है। मतगणना की तिथि अब नजदीकी है। इससे प्रत्याशियों एवं समर्थको की बेचैनी बढ़ गई है। हार जीत की चुनावी गणित में प्रत्याशी व समर्थक उलझेे है। हर प्रत्याशी व समर्थक अपनी जीत को लेकर आश्वस्त है त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का मतदान 19 अप्रैल को सम्पन्न होने के बाद से प्रत्याशी व समर्थक हर जीत को लेकर चुनावी गणित में उलझे है। साथ ही प्रत्याशी व समर्थक अपनी जीत का दावा करते दिखाई देते है। अपनी बात को ऊंचा करने के लिए वे अपना चुनावी गणित भी सामने रखकर अपने पक्ष में ही मतदान होने की बात कर रहे है। फिलहाल चुनावी परिणाम 2 मई को मतगणना के बाद आएगा। लेकिन इसे लेकर हर कोई चुनावी गणित में उलझा है। मतगणना की तिथि नजदीक आने के कारण प्रत्याशी तथा समर्थको की बेचैनी भी बढ़ गई है। पंचायत चुनाव की बयार अब हार जीत पर आकर अटक गई है। वही हारजीत का कयास अब भी जारी है। लगभग सभी विकास खण्ड क्षेत्रो में गांवो में हार जीत को लेकर गुणा गणित लगाई जा रही है। प्रधान पद के लिए जहां एक एक वोट के लिए मारा मारी रही। वही जिपं सदस्य के लिए अपनी अपनी ग्राम पंचायतो में प्रत्याशियों को एक तरफा समर्थन मिला है। इससे जिला पंचायत सदस्य पद पर ऊंट किस करवट बैठेगा यह अभी कह पाना मुश्किल है। प्रधान व बीडीसी के पदो पर तो गांव में कांटे की लड़ाई रही। हालांकि जिला पंचायत सदस्य के पदो पर देखा गया कि जो जिस ग्राम पंचायत का रहा वहां आसपास के गांव में सभी प्रधान व बीडीसी के प्रत्याशी मिलकर गांव के जिला पंचायत सदस्य को वोट दिलाए है। ऐसे में जिला पंचायत सदस्य की लड़ाई रोमांचक हो गई है। फिलहाल चुनाव बीतने के बाद से ही गांव के चाय पान की दुकानो व चबूतरो पर चुनाव में हार जीत का गुणा गणित लगाया जा रहा है। पड़े मतो में जातिगत आंकड़ा निकाल कर महिला व पुरूष मतदाताओं को अलग करके अपने पक्ष में समीकरण बता रहे है। हालांकि चुनावी चर्चा के दौरान सभी प्रत्याशी व समर्थक अपनी ही जीत का दावा कर रहे है। अब देखना यह है कि 2 मई को बैलेट बाक्स में किस प्रत्याशी का टेम्पो हाई रहता हे। या फिर कौन मतगणना स्थल छोटे गेट से चुपके से बाहर निकलकर घर वापस चला जाता है।

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प्रतापगढ़ (ब्यूरो)। पंचायत चनाव की बयार अब हार जीत पर अटकी है। मतगणना की तिथि अब नजदीकी है। इससे प्रत्याशियों एवं समर्थको की बेचैनी बढ़ गई है। हार जीत की चुनावी गणित में प्रत्याशी व समर्थक उलझेे है। हर प्रत्याशी व समर्थक अपनी जीत को लेकर आश्वस्त है त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का मतदान 19 अप्रैल को सम्पन्न होने के बाद से प्रत्याशी व समर्थक हर जीत को लेकर चुनावी गणित में उलझे है। साथ ही प्रत्याशी व समर्थक अपनी जीत का दावा करते दिखाई देते है। अपनी बात को ऊंचा करने के लिए वे अपना चुनावी गणित भी सामने रखकर अपने पक्ष में ही मतदान होने की बात कर रहे है। फिलहाल चुनावी परिणाम 2 मई को मतगणना के बाद आएगा। लेकिन इसे लेकर हर कोई चुनावी गणित में उलझा है। मतगणना की तिथि नजदीक आने के कारण प्रत्याशी तथा समर्थको की बेचैनी भी बढ़ गई है। पंचायत चुनाव की बयार अब हार जीत पर आकर अटक गई है। वही हारजीत का कयास अब भी जारी है। लगभग सभी विकास खण्ड क्षेत्रो में गांवो में हार जीत को लेकर गुणा गणित लगाई जा रही है। प्रधान पद के लिए जहां एक एक वोट के लिए मारा मारी रही। वही जिपं सदस्य के लिए अपनी अपनी ग्राम पंचायतो में प्रत्याशियों को एक तरफा समर्थन मिला है। इससे जिला पंचायत सदस्य पद पर ऊंट किस करवट बैठेगा यह अभी कह पाना मुश्किल है। प्रधान व बीडीसी के पदो पर तो गांव में कांटे की लड़ाई रही। हालांकि जिला पंचायत सदस्य के पदो पर देखा गया कि जो जिस ग्राम पंचायत का रहा वहां आसपास के गांव में सभी प्रधान व बीडीसी के प्रत्याशी मिलकर गांव के जिला पंचायत सदस्य को वोट दिलाए है। ऐसे में जिला पंचायत सदस्य की लड़ाई रोमांचक हो गई है। फिलहाल चुनाव बीतने के बाद से ही गांव के चाय पान की दुकानो व चबूतरो पर चुनाव में हार जीत का गुणा गणित लगाया जा रहा है। पड़े मतो में जातिगत आंकड़ा निकाल कर महिला व पुरूष मतदाताओं को अलग करके अपने पक्ष में समीकरण बता रहे है। हालांकि चुनावी चर्चा के दौरान सभी प्रत्याशी व समर्थक अपनी ही जीत का दावा कर रहे है। अब देखना यह है कि 2 मई को बैलेट बाक्स में किस प्रत्याशी का टेम्पो हाई रहता हे। या फिर कौन मतगणना स्थल छोटे गेट से चुपके से बाहर निकलकर घर वापस चला जाता है।

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