लोकमित्र ब्यूरो
फूलपुर (प्रयागराज)। फूलपुर क्षेत्र के मैलहन स्थित वरूणा नदी का आध्यात्मिक व पौराणिक परिक्षेत्र में बहुमूल्य महत्व है। इस झील में कई जिलो की नदिया आकर गंगा नदी में समा जाती है। बुद्धवार को दिल्ली यूनिवर्सिटी टीम के साथ शारदा सहायक खण्ड 39 के अभियंता पहंुच कर वरूणा नदी के कायाकल्प हेतु खाका तैयार में लगे रहे। इसके पूर्व वरूणा नदी के उद्धार हेतु श्री लंका व डेनमार्क की टीम भी आ चुकी है। इस समय सरकार की नजर भी वरूणा नदी के कायाकल्प की ओर पड़ चुकी है। जिसमें सी0ई0डी0एम0ई0 दिल्ली यूनिवर्सिटी के डॉ0 यासिर एवं डॉ0 ए0के0 सिंह के साथ शारदा सहायक खंड 39 के सहायक अभियंता बसंत लाल, अशोक कुमार मिश्र, जे0ई0 तथा राजस्व टीम के सदस्यगण कर्मियों समेत मैलहन झील के कायाकल्प करने की योजना बनाने लतीफपुर और सौरहा की तराई का निरीक्षण करते मैलहन झील पहुंचे। इस दौरान टीमें पूरे प्रोजेक्ट का खाका तैयार करने में लगी रहीं। बहरहाल अब वरूणा नदी की मैलहन झील के कायाकल्प का समय नजदीक आ चुका है।
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फूलपुर (प्रयागराज)। फूलपुर क्षेत्र के मैलहन स्थित वरूणा नदी का आध्यात्मिक व पौराणिक परिक्षेत्र में बहुमूल्य महत्व है। इस झील में कई जिलो की नदिया आकर गंगा नदी में समा जाती है। बुद्धवार को दिल्ली यूनिवर्सिटी टीम के साथ शारदा सहायक खण्ड 39 के अभियंता पहंुच कर वरूणा नदी के कायाकल्प हेतु खाका तैयार में लगे रहे। इसके पूर्व वरूणा नदी के उद्धार हेतु श्री लंका व डेनमार्क की टीम भी आ चुकी है। इस समय सरकार की नजर भी वरूणा नदी के कायाकल्प की ओर पड़ चुकी है। जिसमें सी0ई0डी0एम0ई0 दिल्ली यूनिवर्सिटी के डॉ0 यासिर एवं डॉ0 ए0के0 सिंह के साथ शारदा सहायक खंड 39 के सहायक अभियंता बसंत लाल, अशोक कुमार मिश्र, जे0ई0 तथा राजस्व टीम के सदस्यगण कर्मियों समेत मैलहन झील के कायाकल्प करने की योजना बनाने लतीफपुर और सौरहा की तराई का निरीक्षण करते मैलहन झील पहुंचे। इस दौरान टीमें पूरे प्रोजेक्ट का खाका तैयार करने में लगी रहीं। बहरहाल अब वरूणा नदी की मैलहन झील के कायाकल्प का समय नजदीक आ चुका है।



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