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सूर्य का अदभुत नजारा देख लोग हैरतजदा

मऊआइमा(प्रयागराज)। शुक्रवार को लगभग ग्यारह बजे से चांद के चारों छल्ला देख लोग हैरजदा हो गए। सभी सडकों, छतों पर चढ कर अदभुत नजारा देखने में लग गए। चारों तरफ चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। जितने लोग उतनी किस्मत की बातें होने लगी। शुक्रवार सूर्य का अजब गजब नजारा देखते ही लोग चकित हो गए।कोई  सूर्य के बीचों बीच चक्र जैसी आकृति कोई इन्द्र धनुष ,किसी ने उलका पिंड किसी ने विष्णु चक्र किसी अनहोनी की बात कह रहे हैं। जबकि कि वैज्ञानिकों के जानकार बताते हैं कि इन छल्लों को हलो कहा जाता है, ये चन्द्रमा और सूर्य दोनों अथवा चारों ओर विकसित होता है।  वैज्ञानिक इन्हें 22डिग्री हेलो कहते हैं क्योंकि वे सूर्य अथवा चन्द्रमा के केन्द्रों से 22 डिग्री है। बताते हैं कि चन्द्र प्रभामंडल हमेशा एक पूर्ण चक्र होते हैं। यदि बादल आंशिक रूप से आपके दृश्य को बाधित करते हैं तो इस तरह नहीं देख सकते हैं। यह कोई अनहोनी नहीं है।यह मात्र संयोग है।

मऊआइमा(प्रयागराज)। शुक्रवार को लगभग ग्यारह बजे से चांद के चारों छल्ला देख लोग हैरजदा हो गए। सभी सडकों, छतों पर चढ कर अदभुत नजारा देखने में लग गए। चारों तरफ चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। जितने लोग उतनी किस्मत की बातें होने लगी। शुक्रवार सूर्य का अजब गजब नजारा देखते ही लोग चकित हो गए।कोई  सूर्य के बीचों बीच चक्र जैसी आकृति कोई इन्द्र धनुष ,किसी ने उलका पिंड किसी ने विष्णु चक्र किसी अनहोनी की बात कह रहे हैं। जबकि कि वैज्ञानिकों के जानकार बताते हैं कि इन छल्लों को हलो कहा जाता है, ये चन्द्रमा और सूर्य दोनों अथवा चारों ओर विकसित होता है।  वैज्ञानिक इन्हें 22डिग्री हेलो कहते हैं क्योंकि वे सूर्य अथवा चन्द्रमा के केन्द्रों से 22 डिग्री है। बताते हैं कि चन्द्र प्रभामंडल हमेशा एक पूर्ण चक्र होते हैं। यदि बादल आंशिक रूप से आपके दृश्य को बाधित करते हैं तो इस तरह नहीं देख सकते हैं। यह कोई अनहोनी नहीं है।यह मात्र संयोग है।

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