मां भद्रकाली धाम बाबागंज में चल रही श्रीराम कथा में उमड़ रही श्रोताओं की भीड़
कुंडा-प्रतापगढ़। मां भद्रकाली धाम बाबागंज में चल रही श्रीराम कथा के सातवें दिन प्रभु श्री राम व माता जानकी के विवाहोत्सव के अवसर पर कथा व्यास श्रीयुत श्री अतुल जी महाराज के अमृतमई वाणी से श्रोता मंत्रमुग्ध होकर पंडाल में प्रभु श्री राम तथा माता जानकी के जयकारे के बीच जमकर थिरके। इसके पूर्व छठे दिन कथावाचक ने धनुष यज्ञ का बहुत ही मार्मिक ढंग से वर्णन करते हुए कहा कि बड़े-बड़े राजा महाराजा धनुष तोड़ने के लिए आए थे, लेकिन जैसे ही गुरु विश्वामित्र का आदेश पाते ही प्रभु श्री राम ने पलक झपते धनुष को तोड़ा तो स्वर्ग से देवताओं ने पुष्प वर्षा किया। जनकपुर को तोरण द्वार व फूलों से प्रभु श्रीराम व बारातियों के लिए के स्वागत में खूब सजाया गया था। जहां धूमधाम से विवाह उत्सव संपन्न हुआ कथा के सातवें दिन कथा स्थल पर हजारों की संख्या में श्रोताओं की भीड़ उमड़ पड़ी थी। कथा के अंत में प्रभु श्री राम माता जानकी की आरती के बाद कथा का समापन हुआ।
मां भद्रकाली धाम बाबागंज में चल रही श्रीराम कथा में उमड़ रही श्रोताओं की भीड़
कुंडा-प्रतापगढ़। मां भद्रकाली धाम बाबागंज में चल रही श्रीराम कथा के सातवें दिन प्रभु श्री राम व माता जानकी के विवाहोत्सव के अवसर पर कथा व्यास श्रीयुत श्री अतुल जी महाराज के अमृतमई वाणी से श्रोता मंत्रमुग्ध होकर पंडाल में प्रभु श्री राम तथा माता जानकी के जयकारे के बीच जमकर थिरके। इसके पूर्व छठे दिन कथावाचक ने धनुष यज्ञ का बहुत ही मार्मिक ढंग से वर्णन करते हुए कहा कि बड़े-बड़े राजा महाराजा धनुष तोड़ने के लिए आए थे, लेकिन जैसे ही गुरु विश्वामित्र का आदेश पाते ही प्रभु श्री राम ने पलक झपते धनुष को तोड़ा तो स्वर्ग से देवताओं ने पुष्प वर्षा किया। जनकपुर को तोरण द्वार व फूलों से प्रभु श्रीराम व बारातियों के लिए के स्वागत में खूब सजाया गया था। जहां धूमधाम से विवाह उत्सव संपन्न हुआ कथा के सातवें दिन कथा स्थल पर हजारों की संख्या में श्रोताओं की भीड़ उमड़ पड़ी थी। कथा के अंत में प्रभु श्री राम माता जानकी की आरती के बाद कथा का समापन हुआ।



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