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कल्पवृक्ष के समान है श्रीमद्भागवत कथा। ब्रह्मचारी आनंद स्वरूप जी

भगवान श्रीकृष्ण और रुकमणी के विवाह के प्रसंग की अमृत वर्षा
कुंडा प्रतापगढ़। श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य की सभी इच्छाओं को पूरा करती है। यह कल्पवृक्ष के समान है। आवश्यक है कि मनुष्य इसे निर्मल भाव से सुनें और सत्य धर्म के मार्ग का पालन करें। यह उद्गार प्रतापगढ़ जिले के विकास खण्ड कालाकाकर के वाजिदपुर गांव के जगन्नाथ त्रिपाठी के यहां चल रही श्रीमद्भागवत कथा में बताई।  श्रीमद्भागवद कथा के छठवें दिन श्रीमद् दंडी स्वामी आनंद आश्रम जी महाराज ने श्रीकृष्ण-रुकमणी विवाह का प्रसंग सुनाया गया। इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण के भजनोें पर श्रद्धालु झूमते रहे।महिलाओं ने रुक्मिणी का कन्यादान की रस्म अदा की। कथा व्यास ने भागवत कथा का वर्णन करते हुए श्रीकृष्ण की महिमा का बखान किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पूजा अर्चना करवाई जिसके फलस्वरूप सभी ब्रजवासियों को इंद्र देव के क्रोध को देखना पड़ा। इंद्र देव ने मेघों को भारी बारिश का आदेश दिया तब कन्हैया ने संपूर्ण ब्रजवासियों एवं समस्त जीवों की रक्षा के लिए अपनी कनिष्ठ उंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठाकर बृजवासियों की रक्षा की। कथा में मुख्य रूप से ग्राम प्रधान वाजिदपुर प्रकाश चंद्र त्रिपाठी, बीडीसी वाजिदपुर अजय त्रिपाठी प्रधान ब्रहमौली मनोज कुमार त्रिपाठी, महेश त्रिपाठी एवम समस्त परिवारीजन एवम बहुत से श्रोता गण उपस्थित रहे।

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भगवान श्रीकृष्ण और रुकमणी के विवाह के प्रसंग की अमृत वर्षा
कुंडा प्रतापगढ़। श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य की सभी इच्छाओं को पूरा करती है। यह कल्पवृक्ष के समान है। आवश्यक है कि मनुष्य इसे निर्मल भाव से सुनें और सत्य धर्म के मार्ग का पालन करें। यह उद्गार प्रतापगढ़ जिले के विकास खण्ड कालाकाकर के वाजिदपुर गांव के जगन्नाथ त्रिपाठी के यहां चल रही श्रीमद्भागवत कथा में बताई।  श्रीमद्भागवद कथा के छठवें दिन श्रीमद् दंडी स्वामी आनंद आश्रम जी महाराज ने श्रीकृष्ण-रुकमणी विवाह का प्रसंग सुनाया गया। इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण के भजनोें पर श्रद्धालु झूमते रहे।महिलाओं ने रुक्मिणी का कन्यादान की रस्म अदा की। कथा व्यास ने भागवत कथा का वर्णन करते हुए श्रीकृष्ण की महिमा का बखान किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पूजा अर्चना करवाई जिसके फलस्वरूप सभी ब्रजवासियों को इंद्र देव के क्रोध को देखना पड़ा। इंद्र देव ने मेघों को भारी बारिश का आदेश दिया तब कन्हैया ने संपूर्ण ब्रजवासियों एवं समस्त जीवों की रक्षा के लिए अपनी कनिष्ठ उंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठाकर बृजवासियों की रक्षा की। कथा में मुख्य रूप से ग्राम प्रधान वाजिदपुर प्रकाश चंद्र त्रिपाठी, बीडीसी वाजिदपुर अजय त्रिपाठी प्रधान ब्रहमौली मनोज कुमार त्रिपाठी, महेश त्रिपाठी एवम समस्त परिवारीजन एवम बहुत से श्रोता गण उपस्थित रहे।

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