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लोगों से संवाद का माध्यम है भित्ति चित्र

प्रयागराज। देश की विभिन्न संस्कृतियों की कलाकृतियों को अभी तक आपने चित्रों के माध्यम से संग्रहलयों में देखा होगा, लेकिन यदि इस तरह के भित्ति चित्र सांस्कृतिक केंद्र में नजर आएं और जनमानस को शिक्षा के साथ ही अपनी संस्कृति को पहचानने का कार्य करें, तो वह अनूठा ही होगा। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, प्रयागराज (एनसीजेडसीसी) के द्वारा बुधवार से सात दिवसीय भित्ति चित्र कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। केंद्र परिसर की दीवारों पर पारम्परिक लोक चित्रकला शैली की विभिन्न विधाओं के माध्यम से कार्यशाला के अन्तर्गत चित्रों को दीवारों पर उकेरा जायेगा। संवाद का माध्यम भित्ति चित्र को म्यूरल पेंटिंग के नाम से जाना जाता है। जिसमें कलाकार रंगों की अद्भुत मिलावट से एक जीवंत चित्र खींच देते हैं। यह दीवारों पर उकेरे गए ऐसे चित्र हैं जो बिल्कुल जीवंत लगते हैं, यह कला भारतीयों के लिए नई नहीं है, लेकिन आधुनिक चित्रकला ने इसे लोकप्रिय बनाने के लिए खूब मदद की है। भित्ति चित्र के माध्यम से अपनी बात लोगों तक पहुंचाना भारतीय संस्कृति की पुरानी पहचान रही है। सात दिन तक चलने वाली इस कार्यशाला में साक्षात्कार के माध्यम से चयनित 15 युवा चित्राकारों ने प्रतिभाग किया है।

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प्रयागराज। देश की विभिन्न संस्कृतियों की कलाकृतियों को अभी तक आपने चित्रों के माध्यम से संग्रहलयों में देखा होगा, लेकिन यदि इस तरह के भित्ति चित्र सांस्कृतिक केंद्र में नजर आएं और जनमानस को शिक्षा के साथ ही अपनी संस्कृति को पहचानने का कार्य करें, तो वह अनूठा ही होगा। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, प्रयागराज (एनसीजेडसीसी) के द्वारा बुधवार से सात दिवसीय भित्ति चित्र कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। केंद्र परिसर की दीवारों पर पारम्परिक लोक चित्रकला शैली की विभिन्न विधाओं के माध्यम से कार्यशाला के अन्तर्गत चित्रों को दीवारों पर उकेरा जायेगा। संवाद का माध्यम भित्ति चित्र को म्यूरल पेंटिंग के नाम से जाना जाता है। जिसमें कलाकार रंगों की अद्भुत मिलावट से एक जीवंत चित्र खींच देते हैं। यह दीवारों पर उकेरे गए ऐसे चित्र हैं जो बिल्कुल जीवंत लगते हैं, यह कला भारतीयों के लिए नई नहीं है, लेकिन आधुनिक चित्रकला ने इसे लोकप्रिय बनाने के लिए खूब मदद की है। भित्ति चित्र के माध्यम से अपनी बात लोगों तक पहुंचाना भारतीय संस्कृति की पुरानी पहचान रही है। सात दिन तक चलने वाली इस कार्यशाला में साक्षात्कार के माध्यम से चयनित 15 युवा चित्राकारों ने प्रतिभाग किया है।

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