प्रयागराज। प्रयागराज के इस्कॉन मंदिर में गोवर्धन पूजा के अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण और माता राधा का विशेष श्रृंगार किया गया। दीपोत्सव के बाद कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को गोवर्धन (गोधना) पूजा व अन्नकूट मनाया जाता है। देवस्थानों में अन्नकूट झांकियां भी सजाई जा रही है। भगवान श्रीकृष्ण ने आज के ही दिन गोवर्धन पर्वत को उठाया था। इसलिए भगवान श्रीकृष्ण की आज के दिन विशेष पूजा अर्चना की जाती है। इसी उपलक्ष्य में प्रयागराज के खुल्दाबाद स्थिति इस्कॉन मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण और माता राधा की विशेष आरती और पूजा शुरू हुई है। हरे रामा हरे कृष्णा की धुन पर हजारों भक्त झूमते दिखे। अन्नकूट, गोवर्धन पूजा आज बुधवार को थी। भाई दूज कल गुरुवार को है। 27 अक्टूबर को ही कायस्थ समाज के आराध्य भगवान् चित्रगुप्तजी की पूजा होगी। गुरुवार को ही कलम-दवात का पूजन होगा। कलम-दवात पूजन में आवश्यकतानुसार कलम व दवात लेकर उसका पूजन करके रख लिया जाता है। फिर वर्षपर्यन्त उसी का प्रयोग बही-खाता, पञ्चाङ्ग -निर्माण, कुंडली-निर्माण, शिक्षा-कार्य, आदि में किया जाता है। विद्यार्थियों को और ज्योतिषीगणों को यह कलम-दवात पूजन अवश्य करके रख लेना चाहिए, उसी से सब कार्य करने चाहिए। भाई दूज के दिन यमुना में स्नान का महत्व है। इस दिन यमुना तट पर यमुना जी का पूजन, दीपदान करना चाहिए। भाई दूज के दिन बहन के घर ही भोजन करना चाहिए। अन्नकूट गोवर्धन पूजा का ही समारोह है। इसमें त्यौहार में देवालयों और घरों में भगवान को कूटे हुए अन्न से तैयार किए गए 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया जाता है। देवालयों में विभिन्न आकृतियां उकेरकर झांकियां सजाई जा रही हैं। यह द्वावर युग की बात है। बृज के सभी नर-नारी इंद्र का पूजन करते थे। इंद्र को 56 भोग लगाया करते थे। भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र का घमंड तोड़ने के लिए बचपन में ही इंद्र की पूजा पर ब्रज में रोक लगा दी थी। गोवर्धन पूजा करानी शुरू कर दी थी। इससे कुपित होकर इंद्र ने इतनी बारिश शुरू कर दी कि लगा पूरा ब्रज पानी के सैलाब में बह जाएगा। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने गाेवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठिका उंगली पर उठा लिया। सभी ब्रज वासी उसके नीचे आ गए और उनके प्राणों की रक्षा हो सकी। तब से कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा व अन्नकूट मनाने की परंपरा चली आ रही है। विद्वानों के अनुसार इस बार कार्तिक शुक्ल द्वितीया यानी यम द्वितीया पर भैया दूज मनाया जाता है। द्वितीया 26 अक्टूबर को दोपहर 3:35 बजे से 27 अक्टूबर को दोपहर 2:12 बजे तक रहेगी। ऐसे में भैया दूज 27 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इसी दिन कलम दवात के देवता चित्रगुप्त सहित यम पूजन किया जाएगा। भैया दूज के दिन भाई अपने बहन के घर भोजन करते हैं। इसलिए इसे भैया दूज के नाम से जाना जाता है।
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इस्कॉन मंदिर में धूमधाम से मनाई गयी गोवर्धन पूजा
प्रयागराज। प्रयागराज के इस्कॉन मंदिर में गोवर्धन पूजा के अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण और माता राधा का विशेष श्रृंगार किया गया। दीपोत्सव के बाद कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को गोवर्धन (गोधना) पूजा व अन्नकूट मनाया जाता है। देवस्थानों में अन्नकूट झांकियां भी सजाई जा रही है। भगवान श्रीकृष्ण ने आज के ही दिन गोवर्धन पर्वत को उठाया था। इसलिए भगवान श्रीकृष्ण की आज के दिन विशेष पूजा अर्चना की जाती है। इसी उपलक्ष्य में प्रयागराज के खुल्दाबाद स्थिति इस्कॉन मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण और माता राधा की विशेष आरती और पूजा शुरू हुई है। हरे रामा हरे कृष्णा की धुन पर हजारों भक्त झूमते दिखे। अन्नकूट, गोवर्धन पूजा आज बुधवार को थी। भाई दूज कल गुरुवार को है। 27 अक्टूबर को ही कायस्थ समाज के आराध्य भगवान् चित्रगुप्तजी की पूजा होगी। गुरुवार को ही कलम-दवात का पूजन होगा। कलम-दवात पूजन में आवश्यकतानुसार कलम व दवात लेकर उसका पूजन करके रख लिया जाता है। फिर वर्षपर्यन्त उसी का प्रयोग बही-खाता, पञ्चाङ्ग -निर्माण, कुंडली-निर्माण, शिक्षा-कार्य, आदि में किया जाता है। विद्यार्थियों को और ज्योतिषीगणों को यह कलम-दवात पूजन अवश्य करके रख लेना चाहिए, उसी से सब कार्य करने चाहिए। भाई दूज के दिन यमुना में स्नान का महत्व है। इस दिन यमुना तट पर यमुना जी का पूजन, दीपदान करना चाहिए। भाई दूज के दिन बहन के घर ही भोजन करना चाहिए। अन्नकूट गोवर्धन पूजा का ही समारोह है। इसमें त्यौहार में देवालयों और घरों में भगवान को कूटे हुए अन्न से तैयार किए गए 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया जाता है। देवालयों में विभिन्न आकृतियां उकेरकर झांकियां सजाई जा रही हैं। यह द्वावर युग की बात है। बृज के सभी नर-नारी इंद्र का पूजन करते थे। इंद्र को 56 भोग लगाया करते थे। भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र का घमंड तोड़ने के लिए बचपन में ही इंद्र की पूजा पर ब्रज में रोक लगा दी थी। गोवर्धन पूजा करानी शुरू कर दी थी। इससे कुपित होकर इंद्र ने इतनी बारिश शुरू कर दी कि लगा पूरा ब्रज पानी के सैलाब में बह जाएगा। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने गाेवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठिका उंगली पर उठा लिया। सभी ब्रज वासी उसके नीचे आ गए और उनके प्राणों की रक्षा हो सकी। तब से कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा व अन्नकूट मनाने की परंपरा चली आ रही है। विद्वानों के अनुसार इस बार कार्तिक शुक्ल द्वितीया यानी यम द्वितीया पर भैया दूज मनाया जाता है। द्वितीया 26 अक्टूबर को दोपहर 3:35 बजे से 27 अक्टूबर को दोपहर 2:12 बजे तक रहेगी। ऐसे में भैया दूज 27 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इसी दिन कलम दवात के देवता चित्रगुप्त सहित यम पूजन किया जाएगा। भैया दूज के दिन भाई अपने बहन के घर भोजन करते हैं। इसलिए इसे भैया दूज के नाम से जाना जाता है।



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