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फॉगिंग होने से मच्छरों की भरमार

लोकमित्र ब्यूरो
लेड़ियारी, (प्रयागराज)। इन दिनों मौसम के बदलाव से लोगों को सर्दी-जुकाम – बुखार से काफी पीड़ित है। ऐसे मे मच्छरजनित के बढ़ती संख्या ने स्थिति की और भी खराब कर दिया है। लोगों को रातों की नींद भी मच्छरों ने दूभर कर दिया है। यही कारण है कि क्षेत्र मे संक्रामक बीमारी फैल रही है लेकिन संबंधित विभाग के अधिकारियों व ग्राम प्रधान ध्यान इस ओर नही जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से पूर्व मे मच्छरों के प्रकोप को रोकने के लिए दवा का छिड़काव और फॉगिंग की जाती थी लेकिन तीन दशक से फॉगिंग और दवा का छिड़काव बंद कर दिया गया। इससे मच्छर संक्रामक बीमारी, मलेरिया, टाईफाइट डेंगू, उल्टी, दस्त और आदि तरह – तरह की बिमारी फैल रहा है। अस्पतालों मे ऐसे मरीज की संख्या बढ़ गई है। जिससे इस लापर क्षेत्र की जनता नीम हकीम के सहारे इलाज कराने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। बताया जाता है कि शासन द्वारा प्रति माह आशा और ग्राम प्रधानों के खाते मे दस हजार रुपये दवा का छिड़काव के लिए उपलब्ध कराया जाता है लेकिन इस पैसे का कोई अता-पता न होने से बंदर वांट हो जाता है। ग्राम प्रधान गीता देवी ने बताया कि हमारे गांव मे कोई सफाई कर्मी न होने से चारों ओर गंदगी का अब्बास लगा हुआ है। शासन द्वारा निर्गत धन आशा स्वयं निकालती है। इस पैसे से मेरा कोई सरोकार नही है। इस संबंध मे कोरांव बीडीओ को प्रार्थनापत्र दिये जाने के बावजूद आज तक कोई सफाई कर्मी नही भेजा गया।
ग्रामीणों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों मे सफाई कर्मी अधिकांश गांव मे नदारद है। जिससे बने नालियां साफ-सफाई न होने से बजबजा रही है। इससे ज्यादा मच्छर लग रहे है। खंड विकास अधिकारी मुकेश कुमार का कहना है कि लगे सफाई कर्मी अधिकांश गांव के अपना ट्रांसफर करा लिये है।क्षजो दर्जनों गांवों सफाई कर्मी की रिक्त है। इसके लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है।

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लोकमित्र ब्यूरो
लेड़ियारी, (प्रयागराज)। इन दिनों मौसम के बदलाव से लोगों को सर्दी-जुकाम – बुखार से काफी पीड़ित है। ऐसे मे मच्छरजनित के बढ़ती संख्या ने स्थिति की और भी खराब कर दिया है। लोगों को रातों की नींद भी मच्छरों ने दूभर कर दिया है। यही कारण है कि क्षेत्र मे संक्रामक बीमारी फैल रही है लेकिन संबंधित विभाग के अधिकारियों व ग्राम प्रधान ध्यान इस ओर नही जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से पूर्व मे मच्छरों के प्रकोप को रोकने के लिए दवा का छिड़काव और फॉगिंग की जाती थी लेकिन तीन दशक से फॉगिंग और दवा का छिड़काव बंद कर दिया गया। इससे मच्छर संक्रामक बीमारी, मलेरिया, टाईफाइट डेंगू, उल्टी, दस्त और आदि तरह – तरह की बिमारी फैल रहा है। अस्पतालों मे ऐसे मरीज की संख्या बढ़ गई है। जिससे इस लापर क्षेत्र की जनता नीम हकीम के सहारे इलाज कराने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। बताया जाता है कि शासन द्वारा प्रति माह आशा और ग्राम प्रधानों के खाते मे दस हजार रुपये दवा का छिड़काव के लिए उपलब्ध कराया जाता है लेकिन इस पैसे का कोई अता-पता न होने से बंदर वांट हो जाता है। ग्राम प्रधान गीता देवी ने बताया कि हमारे गांव मे कोई सफाई कर्मी न होने से चारों ओर गंदगी का अब्बास लगा हुआ है। शासन द्वारा निर्गत धन आशा स्वयं निकालती है। इस पैसे से मेरा कोई सरोकार नही है। इस संबंध मे कोरांव बीडीओ को प्रार्थनापत्र दिये जाने के बावजूद आज तक कोई सफाई कर्मी नही भेजा गया।
ग्रामीणों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों मे सफाई कर्मी अधिकांश गांव मे नदारद है। जिससे बने नालियां साफ-सफाई न होने से बजबजा रही है। इससे ज्यादा मच्छर लग रहे है। खंड विकास अधिकारी मुकेश कुमार का कहना है कि लगे सफाई कर्मी अधिकांश गांव के अपना ट्रांसफर करा लिये है।क्षजो दर्जनों गांवों सफाई कर्मी की रिक्त है। इसके लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है।

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