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कौंधियारा में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया दीपों का पर्व

लोकमित्र ब्यूरो
कौंधियारा (प्रयागराज)।  दीपावली पर्व पर दीपोत्सव के पीछे कई ऐतिहासिक रहस्य छुपे हैं। इसी दिन अयोध्या के राजा राम लंका के अत्याचारी रावण का वध कर अयोध्या लौटे थे। इसी प्रकार कृष्ण भक्ति के अनुसार इस दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध किया था। वही विष्णु भगवान ने नरसिंह रूप धारण कर हिरण्य कश्यप का वध इसी दिन किये थे। समुद्र मंथन के पश्चात लक्ष्मी व धनवंतरी इसी दिन प्रगट हुयी थी। इस प्रकार इस पर्व का विशेष महत्व माना जाता है। दीपावली पर्व धन वैभव की कामना को लेकर कौंधियारा  क्षेत्र में धूमधाम व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। शाम होते ही घर कार्यालय दुकान और अन्य प्रतिष्ठानों में गणेश लक्ष्मी कुबेर और मां सरस्वती सहित अन्य देवी-देवताओं की विधि विधान से पूजा की गई। घर दरवाजों एवं मंदिरों को रंग-बिरंगी झालरों एवं मोमबत्तियो से सजाया गया। दीपावली में दीपक की पूजा का विशेष महत्व है। इससे घर में दरिद्र रूपी अंधकार का नाश होता  है। यह पर्व पांच दिवसीय न पर्व माना जाता है। धनतेरस से लेकर भाई दूज तक हर कोई अपने दोस्तों रिश्तेदारों और मिलने वाले सभी को मिठाई के साथ शुभकामना देता है।

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कौंधियारा (प्रयागराज)।  दीपावली पर्व पर दीपोत्सव के पीछे कई ऐतिहासिक रहस्य छुपे हैं। इसी दिन अयोध्या के राजा राम लंका के अत्याचारी रावण का वध कर अयोध्या लौटे थे। इसी प्रकार कृष्ण भक्ति के अनुसार इस दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध किया था। वही विष्णु भगवान ने नरसिंह रूप धारण कर हिरण्य कश्यप का वध इसी दिन किये थे। समुद्र मंथन के पश्चात लक्ष्मी व धनवंतरी इसी दिन प्रगट हुयी थी। इस प्रकार इस पर्व का विशेष महत्व माना जाता है। दीपावली पर्व धन वैभव की कामना को लेकर कौंधियारा  क्षेत्र में धूमधाम व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। शाम होते ही घर कार्यालय दुकान और अन्य प्रतिष्ठानों में गणेश लक्ष्मी कुबेर और मां सरस्वती सहित अन्य देवी-देवताओं की विधि विधान से पूजा की गई। घर दरवाजों एवं मंदिरों को रंग-बिरंगी झालरों एवं मोमबत्तियो से सजाया गया। दीपावली में दीपक की पूजा का विशेष महत्व है। इससे घर में दरिद्र रूपी अंधकार का नाश होता  है। यह पर्व पांच दिवसीय न पर्व माना जाता है। धनतेरस से लेकर भाई दूज तक हर कोई अपने दोस्तों रिश्तेदारों और मिलने वाले सभी को मिठाई के साथ शुभकामना देता है।

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