लोकमित्र ब्यूरो
लेड़ियारी (प्रयागराज)। कही जीवन का खतरा मंडरा रहा है तो कहीं डेंगू, टाईफाइट का दंश मौत का पर्याय बना है। किसी को सूगर का रोग सता रहा है तो किसी का दिल बीमार रहता है, कोई दौरे का मरीज है। ऐसे मरीजों व उनके स्वजनों को रोग के साथ मंहगी दवाएं भी दर्द दे रही है। मौसमी व मच्छर जनित बीमारियों की दवाओं के साथ ही जीवनरक्षक की श्रेणी मे आने वाली अन्य कई दवाएं भी महंगी हो गई है। सरकार के तमाम दावों के बावजूद सरकारी अस्पतालों मे पर्याप्त दवाएं नही है। जुकाम, बुखार, उल्टी, दर्द, गैस व कुछ चर्म रोग की दवाओं को छोड़कर ज्यादातर गंभीर रोगों की दवाएं बाहर से दवा लेना मरीजों की मजबूरी है। शूगर, दौरा, हृदय रोग, हार्मोनल, व बीपी जैसे बीमारियों की दवाएं बाहर से लेने मे उनका दर्द बढ़े दाम को सुनकर और बढ़ जा रहा है। हालात यह है कि इन दिनों उनके दाम हर पखवारे तेजी से बढ़ रहे है। इस पर किसी का कोई नियंत्रण भी नही दिखता। बहुत सी दवाओं के दाम अत्यधिक बढ़ गया है। डेंगू के मामले इन दिनों तेजी से बढ़े है। सीएचसी से लेकर पीएचसी से गांवों कस्बों तक नए – नए मरीज मिल रहे है। ऐसे मे प्लेटलेट्स मेडिसिन की खपत बढ़ गई है। मुख्य रूप से प्लेटोमेक्स व दवाओं की मांग बाजार मे बढ़ोतरी हुई है। दुकानों पर एक गत्ते की जगह 10 से 15 गत्ते की खपत प्रत्येक माह मे हो रही है।



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