लोकमित्र ब्यूरो
झूंसी (प्रयागराज)। श्री रामलीला कमेटी इसीपुर मलावा खुर्द के तत्वावधान में नन्हे-मुन्ने बाल कलाकारों के द्वारा मंचन पांचवे दिन का मनमोहक मंचन किया गया। जिसमें कुल पुरोहित वशिष्ठ के साथ भरत शत्रुघ्न दोनों भाई बड़े भैया श्री रामचंद्र जी को अयोध्या वापस लाने के लिए वन में तीनों माताएं, सुमंत व अयोध्या वासियों के साथ वन में जाकर भगवान से प्रार्थना की, लेकिन श्री रामचंद्र जी ने पिताजी के वचनों को मिथ्या न हो जाने के डर से अपनी चरण पादुका देकर उन्हें वापस अयोध्या भेज दिया। इस अवसर पर उन्होने भारत से कहा कि रघुकुल रीत सदा चली आई, प्राण जाए पर वचन न जाई। दूसरा मंचन सुपनखा पंचवटी में घूमने के लिए आई थी और श्री रामचंद्र जी को देखते हैं मोहित हो गयी और भगवान श्री राम से विवाह करने का प्रस्ताव रख दिया। इतने में मां जानकी आगमन होता है और सुपनखा को देखते ही तिलमिला गई। इतने में क्षुब्ध होकर सुपंखा सीता जी को खाने को दौड़ी, बगल में खड़े लक्ष्मण जी सुपंखा की नाक कान काट लेते है। वह कटी नाक कान को लेकर रावण के पास पहुंच कर आप बीती बताती है जिससे क्रुद्ध होकर रावण माता सीता का हरण कर लेता है। नन्हे-मुन्ने बाल कलाकारों के अभिनय को देखकर रामलीला मैदान में उपस्थित दर्शक भाव विभोर हो उठे। इस अवसर पर रामलीला के सभी पदाधिकारी अध्यक्ष अजय यादव, शिव कैलाश, पुरुषोत्तम सिंह, मूलचंद, वीरेंद्र कुमार यादव, नागेंद्र नाथ, विमलेश कुशवाहा, जय सिंह यादव, कौशल किशोर यादव व धर्मेंद्र कुशवाहा सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
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झूंसी (प्रयागराज)। श्री रामलीला कमेटी इसीपुर मलावा खुर्द के तत्वावधान में नन्हे-मुन्ने बाल कलाकारों के द्वारा मंचन पांचवे दिन का मनमोहक मंचन किया गया। जिसमें कुल पुरोहित वशिष्ठ के साथ भरत शत्रुघ्न दोनों भाई बड़े भैया श्री रामचंद्र जी को अयोध्या वापस लाने के लिए वन में तीनों माताएं, सुमंत व अयोध्या वासियों के साथ वन में जाकर भगवान से प्रार्थना की, लेकिन श्री रामचंद्र जी ने पिताजी के वचनों को मिथ्या न हो जाने के डर से अपनी चरण पादुका देकर उन्हें वापस अयोध्या भेज दिया। इस अवसर पर उन्होने भारत से कहा कि रघुकुल रीत सदा चली आई, प्राण जाए पर वचन न जाई। दूसरा मंचन सुपनखा पंचवटी में घूमने के लिए आई थी और श्री रामचंद्र जी को देखते हैं मोहित हो गयी और भगवान श्री राम से विवाह करने का प्रस्ताव रख दिया। इतने में मां जानकी आगमन होता है और सुपनखा को देखते ही तिलमिला गई। इतने में क्षुब्ध होकर सुपंखा सीता जी को खाने को दौड़ी, बगल में खड़े लक्ष्मण जी सुपंखा की नाक कान काट लेते है। वह कटी नाक कान को लेकर रावण के पास पहुंच कर आप बीती बताती है जिससे क्रुद्ध होकर रावण माता सीता का हरण कर लेता है। नन्हे-मुन्ने बाल कलाकारों के अभिनय को देखकर रामलीला मैदान में उपस्थित दर्शक भाव विभोर हो उठे। इस अवसर पर रामलीला के सभी पदाधिकारी अध्यक्ष अजय यादव, शिव कैलाश, पुरुषोत्तम सिंह, मूलचंद, वीरेंद्र कुमार यादव, नागेंद्र नाथ, विमलेश कुशवाहा, जय सिंह यादव, कौशल किशोर यादव व धर्मेंद्र कुशवाहा सहित तमाम लोग मौजूद रहे।



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