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विराट व्यक्तित्व के धनी थे कवि चन्द्र…प्रभाकर

प्रतापगढ | साहित्यिक,सामाजिक एवं आध्यात्मिक चेतना के संवाहक वरिष्ठ साहित्यकार चंद्रमणि पांडेय ‘चंद्र’ की जयंती के अवसर पर अष्टभुजा नगर स्थित मणि- मंदिर में काव्य एवं विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया| कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार सुरेश संभव ने किया| कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार सुनील प्रभाकर, उद्घाटन अतिथि शिवशंकर सिंह, अति विशिष्ट अतिथि प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष रमाशंकर शुक्ल, समापन अतिथि राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के प्रदेश मंत्री सुरेंद्र प्रसाद ‘रुद्र’ रहे| इस अवसर पर उपस्थित साहित्यकारों एवं साहित्य प्रेमियों ने स्वर्गीय चंद्र मणि पांडेय ‘चंद्र’ जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किए| कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त करते हुए सुनील प्रभाकर ने कहा कि स्व. चंद्रमणि पांडेय सरल, सहज स्वभाव के विराट व्यक्तित्व के धनी थे| उनके अंदर श्रेष्ठ रचना धर्मिता थी |शुद्ध ,परिष्कृत, संस्कृतनिष्ठ खड़ी बोली के पोषक थे |उनकी रचनाओं में समाज की विभिन्न समस्याओं के साथ-साथ, आध्यात्मिक चित्र भी विद्यमान रहता था| उद्घाटन अतिथि  शिवशंकर सिंह ने कहा कि उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज और साहित्य को एक दिशा देने का कार्य किया।अति विशिष्ट अतिथि रमाशंकर शुक्ल ने भावांजलि देते हुए उनके प्रति अपने विचार व्यक्त किए| समापन अतिथि सुरेंद्र प्रसाद रुद्र ने कहा कि वे एक कुशल वक्ता और उच्च कोटि के धार्मिक प्रवृति के व्यक्ति थे |इस अवसर पर स्वर्गीय चंद्र मणि पांडेय ‘चंद्र’ के पुत्र और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, के जिला कार्यवाह डॉ सौरभ पांडेय ने वरिष्ठ साहित्यकार सुरेश संभव, सुनील प्रभाकर, अनूप अनुपम, डॉ गौरव त्रिपाठी, नितेश खंडेलवाल, सुरेंद्र प्रसाद रूद्र, रमाशंकर शुक्ल को अंगवस्त्रम और चंद्र का कविता संग्रह ”नमन है…” प्रदान कर सम्मानित किया|संचालन राजेश मिश्र ने तथा आमंत्रित अतिथियों का स्वागत और आभार डॉक्टर सौरभ पांडेय ने किया | इस अवसर पर प्रभाशंकर पांडेय,आशुतोष मिश्र, संजय तिवारी, धर्मेंद्र सिंह, दिनेश अग्रहरी, सीतांशु ओझा, प्रभात मिश्रा ,सर्वोत्तम पांडेय, गिरजा शंकर मिश्र,पंकज तिवारी आदि उपस्थित रहे|

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