लोकमित्र ब्यूरो
सोरांव (प्रयागराज)। बुढ़ापे के लक्षण दिखने लगे तो गृहस्थ आश्रम को त्याग कर प्रभु की शरण में ही आना उचित होता है। जब राजा दशरथ ने अपने कानों के पास के बालों को सफेद देखा तो उन्हें अपने बुढ़ापे की शुरुआत का एहसास हुआ। उन्होंने राम का राज्याभिषेक कर वन में जाकर गुरु के सानिध्य में प्रभु को याद करने की सोचा। इस उम्र में प्रभु का ध्यान, चिंतन व मनन ज्यादा करना चाहिए। यह बातें साध्वी अन्नपूर्णा माता जी ने सोरांव के माधवपुर सधनगंज में चल रहे नौ दिवसीय रामकथा के दौरान श्रोताओं से कही। उन्होंने कहा कि अक्सर अच्छे काम में ईर्ष्यालू लोग बाधा बन जाते हैं। जैसे राम के राज्याभिषेक में मंथरा ने अवरोध उत्पन्न कर दिया था। किसी भी व्यक्ति या वस्तु के प्रति अत्यंत लोभ व मोह अक्सर दुख के कारण बन जाते हैं। राम के प्रति अत्यंत मोह के कारण ही राजा दशरथ को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। परंतु इससे यह सीख भी मिलती है कि क्यों न जान ही दांव पर लग जाए परंतु व्यक्ति को अपने सत्कार का त्याग नहीं करना चाहिए। शिव, दधीचि व महाराज हरिश्चंद्र इसके साक्षात प्रमाण है। इस अवसर पर विनय कुमार त्यागी, रमेश साहू, राजेश साहू, राजेश कौशल, गोविंद पटेल व विजय पटेल समेत सैकड़ों श्रोता मौजूद रहे।
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सोरांव (प्रयागराज)। बुढ़ापे के लक्षण दिखने लगे तो गृहस्थ आश्रम को त्याग कर प्रभु की शरण में ही आना उचित होता है। जब राजा दशरथ ने अपने कानों के पास के बालों को सफेद देखा तो उन्हें अपने बुढ़ापे की शुरुआत का एहसास हुआ। उन्होंने राम का राज्याभिषेक कर वन में जाकर गुरु के सानिध्य में प्रभु को याद करने की सोचा। इस उम्र में प्रभु का ध्यान, चिंतन व मनन ज्यादा करना चाहिए। यह बातें साध्वी अन्नपूर्णा माता जी ने सोरांव के माधवपुर सधनगंज में चल रहे नौ दिवसीय रामकथा के दौरान श्रोताओं से कही। उन्होंने कहा कि अक्सर अच्छे काम में ईर्ष्यालू लोग बाधा बन जाते हैं। जैसे राम के राज्याभिषेक में मंथरा ने अवरोध उत्पन्न कर दिया था। किसी भी व्यक्ति या वस्तु के प्रति अत्यंत लोभ व मोह अक्सर दुख के कारण बन जाते हैं। राम के प्रति अत्यंत मोह के कारण ही राजा दशरथ को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। परंतु इससे यह सीख भी मिलती है कि क्यों न जान ही दांव पर लग जाए परंतु व्यक्ति को अपने सत्कार का त्याग नहीं करना चाहिए। शिव, दधीचि व महाराज हरिश्चंद्र इसके साक्षात प्रमाण है। इस अवसर पर विनय कुमार त्यागी, रमेश साहू, राजेश साहू, राजेश कौशल, गोविंद पटेल व विजय पटेल समेत सैकड़ों श्रोता मौजूद रहे।



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