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शेष भगवान के सिर पर यह समस्त ब्रह्मांड है विराजित:– धर्माचार्य ओम प्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुज दास

प्रतापगढ़ । रामानुज आश्रम में नाग पंचमी के पावन अवसर पर शेष भगवान का दूध दही घी मधु शक्कर एवं गंगा जल से अभिषेक करने के पश्चात धर्माचार्य ओम प्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुज दास ने शालिग्राम शिला में विराजित शेष भगवान का दर्शन कराते हुए कहा कि श्री शेष भगवान जिनका एक नाम अनंत है उन्हीं के सिर पर यह ब्रह्मांड विराजित है। शास्त्रों के अनुसार यह पृथ्वी उनके फण पर एक पीली सरसों के समान है , उनके शरीर से बनी हुई शैय्या के ऊपर क्षीर सागर में भगवान श्रीमन्नारायण शयन करते हैं। माता लक्ष्मी जी भगवान के श्री चरणों का कैंकर्य करती रहती है। आप की आराधना से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है और जो लोग ठाकुर जी की शरण में जाते हैं उस जीव को इस संसार से भी मुक्ति मिलती है।नाग पंचमी के दिन शेष भगवान एवं प्रयागराज में स्थित भगवान वेणी माधव के पास श्री बासुकीनाथ का पूजन करने से सर्पों का भय नहीं रहता है। ऋषि आस्तिक का नाम लेने से भी सर्प जीव को कष्ट नहीं देते हैं।

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प्रतापगढ़ । रामानुज आश्रम में नाग पंचमी के पावन अवसर पर शेष भगवान का दूध दही घी मधु शक्कर एवं गंगा जल से अभिषेक करने के पश्चात धर्माचार्य ओम प्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुज दास ने शालिग्राम शिला में विराजित शेष भगवान का दर्शन कराते हुए कहा कि श्री शेष भगवान जिनका एक नाम अनंत है उन्हीं के सिर पर यह ब्रह्मांड विराजित है। शास्त्रों के अनुसार यह पृथ्वी उनके फण पर एक पीली सरसों के समान है , उनके शरीर से बनी हुई शैय्या के ऊपर क्षीर सागर में भगवान श्रीमन्नारायण शयन करते हैं। माता लक्ष्मी जी भगवान के श्री चरणों का कैंकर्य करती रहती है। आप की आराधना से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है और जो लोग ठाकुर जी की शरण में जाते हैं उस जीव को इस संसार से भी मुक्ति मिलती है।नाग पंचमी के दिन शेष भगवान एवं प्रयागराज में स्थित भगवान वेणी माधव के पास श्री बासुकीनाथ का पूजन करने से सर्पों का भय नहीं रहता है। ऋषि आस्तिक का नाम लेने से भी सर्प जीव को कष्ट नहीं देते हैं।

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